शुक्रवार, 6 नवम्बर 2026

Breaking news: अल फलाह समूह और ट्रस्ट पर ईडी का शिकंजा, 140 करोड़ की संपत्ति जब्त

Written by: Best24News

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  Breaking news: प्रवर्तन निदेशालय ने अल फलाह समूह के अध्यक्ष जवाद अहमद सिद्दीकी और अल फलाह चैरिटेबल ट्रस्ट के खिलाफ धनशोधन निवारण अधिनियम की धाराओं के तहत बड़ी कार्रवाई की है।…


 

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Breaking news: प्रवर्तन निदेशालय ने अल फलाह समूह के अध्यक्ष जवाद अहमद सिद्दीकी और अल फलाह चैरिटेबल ट्रस्ट के खिलाफ धनशोधन निवारण अधिनियम की धाराओं के तहत बड़ी कार्रवाई की है। ईडी द्वारा दायर लगभग 260 पन्नों के आरोपपत्र में सिद्दीकी और ट्रस्ट को दो मुख्य आरोपी बनाया गया है। आरोप है कि समूह ने छात्रों से वसूली गई फीस के जरिए अवैध धन जुटाया और अपने शैक्षणिक संस्थानों की मान्यता और प्रमाणन को लेकर गलत जानकारी दी। ईडी ने अदालत से दोनों के खिलाफ मुकदमा चलाने की अनुमति मांगी है, हालांकि अभी तक अदालत ने इस आरोपपत्र पर संज्ञान नहीं लिया है।

ईडी ने  जारी बयान में बताया कि उसने विश्वविद्यालय की जमीन और इमारत को अस्थायी रूप से जब्त कर लिया है, जिसकी अनुमानित कीमत करीब 140 करोड़ रुपये बताई गई है। यह संपत्ति हरियाणा के फरीदाबाद जिले के धौज क्षेत्र में स्थित है।

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जांच एजेंसी के अनुसार, मेडिकल कॉलेज से जुड़े कई गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। आरोपपत्र में दावा किया गया है कि कॉलेज में डॉक्टरों की नियुक्ति केवल कागजों पर की गई थी। इन डॉक्टरों को नियमित शिक्षक दर्शाने के लिए ‘22 दिन पंच’ या ‘सप्ताह में दो दिन’ जैसी शर्तें दिखाकर राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग से आवश्यक मंजूरी हासिल की गई, ताकि मेडिकल कॉलेज और उससे जुड़ी स्वास्थ्य सेवाएं बिना किसी रुकावट के संचालित होती रहें।

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ईडी की जांच में विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार का बयान भी दर्ज किया गया है, जिसमें उन्होंने जांच एजेंसियों द्वारा परिसर का दौरा करने और विश्वविद्यालय अस्पताल से जुड़े डॉ. मुज़म्मिल और डॉ. शाहीन की गिरफ्तारी की पुष्टि की है। रजिस्ट्रार ने यह भी स्वीकार किया कि 2019 में स्थापित मेडिकल कॉलेज में डॉक्टरों की नियुक्ति बिना किसी पुलिस सत्यापन के की गई थी। वहीं विश्वविद्यालय की कुलपति और प्राचार्य ने ईडी को बताया कि जिन डॉक्टरों पर आतंक से जुड़े मामलों में कथित संलिप्तता के आरोप हैं, वे सभी उनके कार्यकाल में नियुक्त हुए थे।

 

इनमें जनरल मेडिसिन विभाग के जूनियर रेजिडेंट डॉ. मुज़म्मिल गनई, फार्माकोलॉजी के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. शाहीन सईद और जनरल मेडिसिन के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. उमर नबी शामिल बताए गए हैं। इस मामले ने निजी शैक्षणिक संस्थानों की मान्यता प्रक्रिया और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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