
भिवाड़ी। करीब 20 साल बाद बस स्टैंड की बाट जोह रहे लोगों के लिए बडी खुशी की खबर है। जल्द ही भिवाड़ी बस स्टैंड की आधुनिक रूप देने की तैयारी की जा रही है। भिवाड़ी इंटीग्रेटेड डेवलपमेंट अथॉरिटी (बीडा) ने नए बस टर्मिनल का प्रारूप तैयार किया है। इस परियोजना पर करीब 32.55 करोड़ रुपये खर्च होंगे। प्रस्तावित टर्मिनल 27,814 वर्गमीटर जमीन पर विकसित किया जाएगा। हालांकि निर्माण बजट व वित्तीय हिस्सेदारी को लेकर अंतिम निर्णय होना बाकी है।
हाईटैक बनेगा भिवाड़ी बस स्टैंड : टर्मिनल भवन के निर्माण और फिनिशिंग पर 11.20 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। बिजली, प्लंबिंग, अग्निशमन और वेंटिलेशन जैसी व्यवस्थाओं के लिए 4.60 करोड़ रुपये प्रस्तावित हैं। बस बे और भारी वाहनों के अनुकूल कंक्रीट सतह पर 3.75 करोड़ रुपये तथा बस पार्किंग और परिसर की आंतरिक सड़कों पर 3.10 करोड़ रुपये खर्च करने का प्रस्ताव है। ईवी चार्जिंग व्यवस्था के लिए 1.40 करोड़ रुपये और कार, दोपहिया, टैक्सी व ऑटो पार्किंग के लिए 1.10 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए हैं।
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ये सुविधाए भी होगी उपलब्ध: बता दे कि प्रस्तावित बस टर्मिनल में बसों के ठहराव के लिए अलग-अलग बे, यात्री भवन, बस और निजी वाहनों की पार्किंग, डॉर्मिटरी, दुकानें, डिजिटल टिकटिंग, डिस्प्ले बोर्ड, सीसीटीवी कैमरे और इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए चार्जिंग की सुविधा विकसित करने की योजना है। इसके अलावा बिजली, प्लंबिंग, अग्निशमन, वेंटिलेशन, सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी), वर्षा जल निकासी, आंतरिक सड़कें, हरियाली और सुरक्षा व्यवस्था भी परियोजना का हिस्सा होंगी।
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इसके अलावा पानी की आपूर्ति, सीवरेज और अन्य सुविधाओं पर 1.10 करोड़ रुपये, वर्षा जल निकासी पर 1.35 करोड़ रुपये, बाहरी लाइटिंग व हरियाली पर 90 लाख रुपये और बाउंड्रीवॉल, प्रवेश द्वार व सुरक्षा व्यवस्था पर 65 लाख रुपये खर्च करने का प्रस्ताव है। टिकटिंग, डिस्प्ले, सीसीटीवी और साइन बोर्ड के लिए 85 लाख रुपये तथा फर्नीचर और संचालन संबंधी उपकरणों के लिए 70 लाख रुपये का अनुमान है। स्टाफ सुविधाओं और डॉर्मिटरी के लिए 55 लाख रुपये प्रस्तावित हैं।
योजना को सिरे चढाने के लिए होगी बैठक: इस परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए बीडा और राजस्थान राज्य पथ परिवहन निगम के अधिकारियों की आगामी बैठक अहम होगी। इसमें निर्माण बजट, दोनों विभागों की वित्तीय हिस्सेदारी और आगे की कार्ययोजना पर चर्चा की जाएगी। बस टर्मिनल को पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल पर विकसित करने के विकल्प पर भी विचार किया जा रहा है। अंतिम निर्णय के बाद ही निर्माण की प्रक्रिया और परियोजना की समयसीमा स्पष्ट हो सकेगी।
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