शुक्रवार, 6 नवम्बर 2026

Bhiwadi Kala Pani: काश! रैंप पांच साल पहले बन जाता, तो धारूहेड़ा की 500 एकड भूमि बंजर होने से बच जाती

Written by: सुनील चौहान

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Bhiwadi Kala Pani: काश ! यह रैंप पांच साल पहले बन जाता, तो आज धारूहेड़ा की करीब 500 एकड़ उपजाऊ भूमि बंजर होने से बच सकती थी। यह पीड़ा अब इलाके के…


काश रैंप पांच साल पहले बन जाता, तो धारूहेड़ा की 500 एकड भूमि बंजर होने से बच जाती
काश रैंप पांच साल पहले बन जाता, तो धारूहेड़ा की 500 एकड भूमि बंजर होने से बच जाती
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Bhiwadi Kala Pani: काश ! यह रैंप पांच साल पहले बन जाता, तो आज धारूहेड़ा की करीब 500 एकड़ उपजाऊ भूमि बंजर होने से बच सकती थी। यह पीड़ा अब इलाके के किसानों, स्थानीय निवासियों और जनप्रतिनिधियों की जुबान पर है। भिवाड़ी से लगातार छोड़े जा रहे काले पानी ने पिछले कई वर्षों में धारूहेड़ा के बड़े भू-भाग को नुकसान पहुंचाया है। खेतों में औद्योगिक अपशिष्ट युक्त पानी भरने से न केवल फसलें खराब हुईं, बल्कि मिट्टी की उर्वरक क्षमता भी धीरे-धीरे समाप्त होती चली गई। इसका सीधा असर किसानों की आजीविका और क्षेत्र की कृषि व्यवस्था पर पड़ा है।Bhiwadi Kala Pani

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जमीन हुई बंजर: लोगों का कहना है कि भिवाड़ी औद्योगिक क्षेत्र से निकलने वाला गंदा पानी वर्षों से धारूहेड़ा की ओर बहता रहा, लेकिन समय रहते कोई ठोस व्यवस्था नहीं की गई। बरसात के मौसम में यह समस्या और भी विकराल रूप ले लेती थी। खेतों में महीनों तक पानी भरा रहने से जमीन दलदली हो गई और धीरे-धीरे खेती के लायक नहीं बची। कई किसानों को मजबूरी में अपनी जमीन खाली छोड़नी पड़ी या बेहद कम पैदावार से संतोष करना पड़ा। लोगों का मानना है कि यदि रैंप या स्थायी जल निकासी व्यवस्था पांच साल पहले ही बना दी जाती, तो इतनी बड़ी कृषि क्षति को रोका जा सकता था।Bhiwadi Kala Pani

धारूहेड़ा बाईपास पर बनाया गया रैंप मूल रूप से इसी समस्या के समाधान के लिए तैयार किया गया था, ताकि भिवाड़ी से आने वाला काला पानी हरियाणा क्षेत्र में प्रवेश न कर सके। हालांकि यह रैंप हाल ही में बन पाया और बीच में इसे तोड़े जाने तथा दोबारा बनाए जाने को लेकर विवाद भी खड़ा हो गया। लेकिन इस पूरी प्रक्रिया में सबसे ज्यादा नुकसान धारूहेड़ा के किसानों को उठाना पड़ा, जिनकी सैकड़ों एकड़ जमीन अब बंजर हो चुकी है।

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सोहना पलवल हाईवे पर धारूहेड़ा बाईपास पर बना विवादास्पद रैम्प एक बार फिर सुर्खियों में है। जिस रैम्प को कुछ समय पहले अज्ञात लोगों द्वारा तोड़ दिया गया था, उसे अब दोबारा बना दिया गया है। रैम्प के पुनर्निर्माण के साथ ही काले पानी और जलभराव का मुद्दा फिर से तूल पकड़ने लगा है, जिससे दोनों राज्यों के बीच टकराव की स्थिति बनती दिख रही है। हांलाकि जब गल्ती भिवाडी की है तो वह इसका विरोध कैसे करे।Bhiwadi Kala Pani

 

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कागजों में चल रहा एसटीपी कार्य: भिवाडी प्रशासन पिछले 5 साले से बडा एसटीपी बनाने की बात कर रहा है। सवाल यह है कि कपंनियों मे बिना एसटीवी एनओसी कैसे मिली। नेताओं ओर अधि​कारियों ने बिना एसटीपी होने के बावजूद अपनी जेब भरी। इसी का खामियाजा आज भिवाडी की जनता भुगत रही है। जब तक भिवाडी को लोग इन नेताओं का विरोध नहीं करेंगे तक तक यू की कंपनियों से काला पानी जारी रहेगा।Bhiwadi Kala Pani

यह मामला केवल एक रैम्प तक सीमित नहीं है, बल्कि वर्षों से चली आ रही उस गंभीर जलभराव समस्या से जुड़ा है, जिसने धारूहेड़ा और आसपास के इलाकों में रहने वाले लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित किया है। बरसात का मौसम शुरू होते ही भिवाड़ी की सड़कें, कॉलोनियां और औद्योगिक क्षेत्र पानी से भर जाते हैं। वहीं दूसरी ओर धारूहेड़ा के लोग आरोप लगाते हैं कि भिवाड़ी से छोड़ा जा रहा औद्योगिक अपशिष्ट युक्त काला पानी उनके क्षेत्र में प्रवेश कर रहा है।Bhiwadi Kala Pani

मजबूरी में बनाना पडा रैंप: हरियाणा के लोगों की ओर से कई बार अपील की गई कालवा पानी मत छोडो, लेकिन कंपनी वाले पानी क्या रखें उनके पास एसटीपी की सुविधा ही नहीं है। जो एसटीपी बनाने में लगात आती उसे मंत्रि ओर अधिकारियों को दे दिया ऐसे में अब काला पानी कैसे रूके।

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BHIWADI KALA PANI

बता दें कि भिवाड़ी और धारूहेड़ा के बीच नेशनल हाईवे बाईपास पर यह रैम्प पहली बार वर्ष 2023 में हरियाणा प्रशासन द्वारा बनाया गया था। भिवाड़ी एक बड़ा औद्योगिक क्षेत्र है, जहां से फैक्ट्रियों का अपशिष्ट युक्त पानी निकलता है। इस पानी को धारूहेड़ा की ओर जाने से रोकने और अपने क्षेत्र को जलभराव व प्रदूषण से बचाने के उद्देश्य से हरियाणा की सीमा में यह रैम्प तैयार किया गया था। हालांकि यह रैम्प भिवाड़ी के लिए परेशानी का कारण बन गया, क्योंकि बारिश के समय पानी की निकासी बाधित होने से वहां जलभराव की समस्या और गंभीर हो गई।

भिवाड़ी प्रशासन की ओर से कई बार यह दावा किया जाता रहा है कि काले पानी की निकासी को नियंत्रित किया जा रहा है और उसे हरियाणा की ओर नहीं छोड़ा जा रहा। इसके बावजूद धारूहेड़ा के लोग आरोप लगाते हैं कि हकीकत में हालात इसके उलट हैं और काला पानी लगातार उनके क्षेत्र में पहुंच रहा है। इसी को लेकर रैम्प को लेकर विवाद बार-बार गहराता जा रहा है।

शनिवार को सेक्टर 4 के एक नंबर गेट पर पानी भर गया और सड़क पर यातायात पूरी तरह ठप हो गया।
शनिवार को सेक्टर 4 के एक नंबर गेट पर पानी भर गया और सड़क पर यातायात पूरी तरह ठप हो गया।

महेश्वरी के पूर्व सरपंच किया था NGT में दावा: करीब दस साल पहले महेश्वरी के पूर्व सरंपच कर्ण सिंह काले पानी से गांव की बंजर हुई जमीन को लेकर NGT में केस किया था। उस समय भी भिवाडी प्रशास ने बडा एसटीपी बनाने की बात कहते हुए इस मामले को टाल दिया था। अगर उस समय ही कार्रवाई हो जाती तो ये जमीन बंजर होने से बच जाती।

सुनील चौहान
About the Author सुनील चौहान

सुनील चौहान Best24News के संस्थापक एवं वरिष्ठ संपादक हैं। उन्हें रेवाड़ी, धारूहेड़ा और हरियाणा की स्थानीय पत्रकारिता का लगभग 10 वर्षों का अनुभव है। वे पहले दैनिक जागरण, राजस्थान पत्रिका, हरिभूमि और अमर उजाला जैसे समाचार संस्थानों से जुड़े रहे हैं। वे राजनीति, अपराध, प्रशासन, शिक्षा, रोजगार और स्थानीय जनसमस्याओं से जुड़ी खबरों के संपादन एवं प्रकाशन का कार्य करते हैं। उनका उद्देश्य पाठकों तक तथ्यात्मक, निष्पक्ष और विश्वसनीय समाचार पहुंचाना है। View all posts by सुनील चौहान →

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