गुरूवार, 5 नवम्बर 2026

Haryana में दिवाली का नया अंदाज! सिर्फ रोशनी नहीं, अब पर्यावरण की भी होगी वैज्ञानिक निगरानी, जानें कैसे

Written by: Best24News

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Haryana: इस साल हरियाणा में दिवाली सिर्फ रोशनी और उत्सव का प्रतीक नहीं रही, बल्कि यह पर्यावरणीय जागरूकता का संदेश भी बन गई। हरियाणा स्टेट पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (HSPCB) ने पहली बार…


Haryana में दिवाली का नया अंदाज! सिर्फ रोशनी नहीं, अब पर्यावरण की भी होगी वैज्ञानिक निगरानी, जानें कैसे
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Haryana: इस साल हरियाणा में दिवाली सिर्फ रोशनी और उत्सव का प्रतीक नहीं रही, बल्कि यह पर्यावरणीय जागरूकता का संदेश भी बन गई। हरियाणा स्टेट पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (HSPCB) ने पहली बार एक ऐतिहासिक पहल शुरू की है। इस पहल के तहत न केवल वायु प्रदूषण बल्कि मृदा, जल और शोर स्तर की भी वैज्ञानिक निगरानी दिवाली के पहले, दौरान और बाद में की जा रही है। इसका उद्देश्य यह समझना है कि पटाखों का पर्यावरण पर वास्तविक प्रभाव कितना है और त्योहार के बाद प्रकृति कितनी जल्दी सामान्य स्थिति में लौटती है।

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प्रदूषण निगरानी के तीन चरण और वैज्ञानिक डेटा संग्रह

HSPCB के एयर सेल प्रमुख निर्मल कश्यप ने बताया कि पहले केवल दिवाली के बाद एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) पर ध्यान दिया जाता था। इस बार बोर्ड ने निगरानी का दायरा बढ़ाकर भूजल, मिट्टी और शोर प्रदूषण भी शामिल किया है। डेटा संग्रह को तीन चरणों में किया जा रहा है। पहला चरण दिवाली से पहले बेसलाइन स्थापित करने के लिए, दूसरा दिवाली की रात और तुरंत बाद जब पटाखों का उपयोग चरम पर होता है, और तीसरा चरण दिवाली के 48 घंटे बाद ताकि यह देखा जा सके कि प्रदूषण कितनी देर तक प्रभावी रहता है। इस दौरान एनसीआर के शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों दोनों से नमूने लिए जा रहे हैं, जिससे शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों की तुलना की जा सके।

मिट्टी और जल की जाँच और वैज्ञानिक महत्व

विशेषज्ञों के अनुसार, पटाखों में मौजूद भारी धातुएं जैसे बैरियम, स्ट्रॉन्शियम, सीसा और तांबा, वायु के माध्यम से जमीन पर गिरकर धीरे-धीरे भूजल और मिट्टी में मिल जाती हैं। इससे न केवल पीने के पानी की गुणवत्ता प्रभावित होती है बल्कि फसल उत्पादन पर भी असर पड़ता है। इस बार विशेष क्षेत्रों में विशेष सैम्पलिंग की गई है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि ये रासायनिक तत्व मिट्टी और पानी में कितनी गहराई तक प्रवेश कर चुके हैं। HSPCB का उद्देश्य इस डेटा को सार्वजनिक करना है ताकि छात्र, शोधकर्ता और नागरिक भी इसका उपयोग कर सकें।

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ग्रीन क्रैकर्स नीति और समाज के लिए संदेश

सुप्रीम कोर्ट ने दिवाली में केवल ग्रीन क्रैकर्स के उपयोग की अनुमति दी है, जो प्रदूषण को लगभग 30 प्रतिशत तक कम करते हैं। बावजूद इसके कई स्थानों पर पारंपरिक पटाखों का उपयोग देखा गया। इस बार बोर्ड ने ग्रीन क्रैकर्स नीति का पालन भी मॉनिटर किया और इसके लिए जिले प्रशासन और पुलिस के सहयोग से निरीक्षण टीम बनाई गई। HSPCB के प्रमुख निर्मल कश्यप ने कहा कि दिवाली खुशी और परंपरा का प्रतीक है, लेकिन पर्यावरणीय संतुलन को प्राथमिकता देना हर नागरिक की जिम्मेदारी है। यह पहल ग्रीन पॉलिसी 2030 की दिशा में ठोस कदम है और संदेश देती है कि परंपरा और पर्यावरण का संतुलन ही सतत विकास की नींव है।

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