शनिवार, 7 नवम्बर 2026

Haryana में संस्कृत का बड़ा प्रोजेक्ट, बघोला में CSU की स्थापना के पीछे की पूरी कहानी

Written by: Best24News

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Haryana के बघोला गांव में अब केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय (Central Sanskrit University - CSU) की स्थापना होने जा रही है। इसके लिए विद्या प्रचारिणी सभा, पलवल और हरियाणा संस्कृत विद्यापीठ, आदर्श संस्कृत…


Haryana में संस्कृत का बड़ा प्रोजेक्ट, बघोला में CSU की स्थापना के पीछे की पूरी कहानी
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Haryana के बघोला गांव में अब केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय (Central Sanskrit University – CSU) की स्थापना होने जा रही है। इसके लिए विद्या प्रचारिणी सभा, पलवल और हरियाणा संस्कृत विद्यापीठ, आदर्श संस्कृत महाविद्यालय बघोला ने कुल 12 एकड़ भूमि का दान दिया है। यह भूमि संस्कृत भाषा के प्रचार-प्रसार और संरक्षण के लिए दी गई है। इस योगदान को न केवल विश्वविद्यालय के लिए, बल्कि देश के शैक्षिक और सांस्कृतिक विकास के लिए भी एक मजबूत आधार माना जा रहा है। भूमि दान के दस्तावेज हरियाणा संस्कृत विद्यापीठ के सचिव दिनेश टायाल और प्राचार्य डॉ. पशुपतिनाथ मिश्रा द्वारा केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय को सौंपे गए।

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डॉ. पशुपतिनाथ मिश्रा ने कहा कि विश्वविद्यालय की स्थापना से हरियाणा और आसपास के राज्यों के युवा छात्रों में संस्कृत भाषा के प्रति रुचि बढ़ेगी और वे पीएचडी जैसी उच्च शिक्षा की ओर प्रेरित होंगे। यह क्षेत्र संस्कृत में शोध और विकास को भी बढ़ावा देगा। उन्होंने बताया कि वर्तमान में देश में लगभग 12 संस्कृत विश्वविद्यालय हैं और बघोला गांव में यह 13वां विश्वविद्यालय होगा। केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार प्रो. आर.जी. मुरलीकृष्ण और अन्य अधिकारी हरियाणा संस्कृत विद्यापीठ परिसर का दौरा कर केंद्रीय विश्वविद्यालय के विस्तार की संभावनाओं का मूल्यांकन कर चुके हैं।

प्रो. आर.जी. मुरलीकृष्ण ने बताया कि विश्वविद्यालय की स्थापना की प्रक्रिया शीघ्र शुरू की जाएगी। यह विश्वविद्यालय दिल्ली मुख्यालय के विस्तार के रूप में विकसित होगा। सरकारी मंजूरी मिलने के बाद, डीपीआर (डिज़ाइन प्रोजेक्ट रिपोर्ट) तैयार की जाएगी और नए भवन का निर्माण तथा शैक्षणिक पाठ्यक्रम शुरू किए जाएंगे। अकादमिक परिषद की मंजूरी मिलने के बाद ही नए पाठ्यक्रम शुरू किए जाएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि हरियाणा संस्कृत विद्यापीठ को केंद्रीय विश्वविद्यालय बनाने का प्रयास 1998 से चल रहा था, लेकिन विभिन्न कारणों से यह संभव नहीं हो पाया।

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दान और शैक्षणिक महत्त्व

कुछ समय पहले गांव के प्रधान और कुछ प्रमुख व्यक्तियों ने विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. श्रीनिवास वर्खेडी से मुलाकात कर विद्यापीठ को केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय बनाने का प्रस्ताव रखा और भूमि दान करने की पेशकश की। कुलपति ने इसे खुशी-खुशी स्वीकार किया और भूमि दान की प्रक्रिया पूर्ण की गई। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. श्रीनिवास वर्खेडी ने विद्या प्रचारिणी सभा, हरियाणा संस्कृत विद्यापीठ और आदर्श संस्कृत महाविद्यालय बघोला का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा, “संस्कृत, भारतीय ज्ञान परंपरा और शिक्षा के प्रचार के लिए भूमि दान से बड़ा दान और कोई नहीं हो सकता।” इस विश्वविद्यालय से भविष्य में संस्कृत शिक्षा और शोध के क्षेत्र में नए अवसर सृजित होंगे और देश में संस्कृत भाषा की महत्ता और भी बढ़ेगी।

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