रेवाड़ी। इंदिरा गांधी विश्वविद्यालय, मीरपुर के 14वें स्थापना दिवस की समापन संध्या पर रेवाड़ी की प्रमुख सांस्कृतिक संस्था बंजारा के कलाकारों ने हरियाणवी लोकनाट्य ‘अनारनट’ की शानदार प्रस्तुति दी। कल्पना चावला ऑडिटोरियम में आयोजित संगीत संध्या में लोकगीतों, संवाद और नृत्य की जुगलबंदी ने दर्शकों का मन मोह लिया। प्रस्तुति के दौरान विश्वविद्यालय के विद्यार्थी और अतिथि कलाकारों के साथ झूमते नजर आए।

कार्यक्रम विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. असीम मिगलानी के मार्गदर्शन में आयोजित हुआ। कुलपति ने लोकनाट्य की सराहना करते हुए कहा कि संस्कृति से जुड़ी परंपराएं हमारी अनमोल धरोहर हैं। भावी पीढ़ी को अपनी लोक संस्कृति और परंपराओं से परिचित कराना जरूरी है।
मुंबई के कथाकार एवं फिल्म लेखक बाबू गौतम द्वारा लिखित एवं निर्देशित संगीत नाटक को संस्था के निदेशक विजय भाटोटिया का सान्निध्य मिला। सांग शैली में प्रस्तुत इस संगीत संध्या का विद्यार्थियों और अतिथियों ने आनंद लिया। नाटक के गीत संस्कृति लेखक सत्यवीर नाहड़िया ने लिखे, जबकि संगीत मुकेश वर्मा ने दिया।

वरिष्ठ रंगकर्मी गोपाल शर्मा और खूबराम सैनी ने ‘अनारनट’ की कहानी को रोचक अंदाज में प्रस्तुत किया। बंजारा के कलाकार सत्यप्रकाश सैनी, मयंक सैनी, गीतांजलि, अजय शर्मा, योगेश कौशिक, देवेंद्र सिंह, राहुल, यतिन चारण और अनीता ने अभिनय व नृत्य से प्रस्तुति में रंग भर दिया। सह निर्देशन की जिम्मेदारी ऋषि सिंघल और नृत्य निर्देशन विनोद रंजन ने संभाला। नाटक के गीत मुकेश वर्मा, ध्रुव खेड़ा और मुकेश काले ने प्रस्तुत किए।

विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रो. दिलबाग सिंह भी कार्यक्रम में मौजूद रहे। उन्होंने कलाकारों की प्रस्तुति की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे सांस्कृतिक आयोजन विद्यार्थियों को अपनी जड़ों और समृद्ध लोक विरासत से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
कार्यक्रम के समापन पर कुलपति प्रो. असीम मिगलानी और कुलसचिव प्रो. दिलबाग सिंह ने सभी कलाकारों को स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मानित किया। इस अवसर पर अधिष्ठाता शैक्षणिक मामले प्रो. सुनील कुमार, अधिष्ठाता छात्र कल्याण प्रो. करण सिंह, प्रो. अदिति शर्मा, डॉ. ईश्वर शर्मा, डॉ. संदीप पुरवा, डॉ. संदीप यादव, डॉ. अमनदीप, डॉ. बीरेंद्र सिंह सहित विश्वविद्यालय का शिक्षण एवं गैर-शिक्षण स्टाफ और बड़ी संख्या में विद्यार्थी मौजूद रहे।













