शर्मिला धनखड़: एक मां की सफलता ने अपनी दो बेटियों के सपनों को नई दिशा दे दी है। कॉमनवेल्थ पैरा गेम्स 2026 में स्वर्ण पदक जीतने वाली शर्मिला धनखड़ की उपलब्धि से उनका परिवार बेहद उत्साहित है। मां की इस कामयाबी को देखकर उनकी बेटियां भी अपने खेल करियर को लेकर पहले से ज्यादा गंभीर हो गई हैं। दोनों का कहना है कि शर्मिला की उपलब्धि ने उन्हें यह विश्वास दिलाया है कि मजबूत इरादों के साथ आगे बढ़ने वाला व्यक्ति कठिन से कठिन परिस्थितियों को भी पीछे छोड़ सकता है।
घर में दो खिलाड़ी, दोनों की मंजिल देश के लिए मेडल
शर्मिला की बेटियां भी खेल के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाने के लिए लगातार मेहनत कर रही हैं। बड़ी बेटी अनुज जैवलिन थ्रो में अभ्यास कर रही हैं, जबकि छोटी बेटी लक्ष्मी ने लॉन्ग जंप को अपने खेल के रूप में चुना है। दोनों की नजर आने वाले समय में बड़े स्तर की प्रतियोगिताओं पर है। वे चाहती हैं कि एक दिन उन्हें भी भारत की ओर से अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में उतरने का अवसर मिले और वे अपने प्रदर्शन से देश को गौरवान्वित कर सकें।
शर्मिला धनखड़: मां की कहानी ने बेटियों को सिखाया मुश्किलों से लड़ना
बेटियों के लिए शर्मिला की जिंदगी खुद एक सबक है। उन्होंने अपने जीवन में ऐसे दौर भी देखे, जब परिस्थितियां उनके पक्ष में नहीं थीं। इसके बावजूद उन्होंने आगे बढ़ने का रास्ता चुना। बेटियों का कहना है कि मां को संघर्ष करते हुए देखकर उन्होंने धैर्य और मेहनत का महत्व समझा है। आज जब शर्मिला ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर स्वर्ण पदक हासिल किया है, तो उनकी बेटियों को भी अपने सपनों को पूरा करने का हौसला मिला है।
शर्मिला की जीत के बाद बेटियों का संकल्प और मजबूत
अब अनुज और लक्ष्मी अपनी मां की उपलब्धि को एक नई शुरुआत के तौर पर देख रही हैं। दोनों का मानना है कि खेल में सफलता हासिल करने के लिए लंबे समय तक अनुशासन और निरंतर अभ्यास जरूरी है। इसी दिशा में वे अपने प्रदर्शन को बेहतर करने की कोशिश कर रही हैं। उनका सपना है कि भविष्य में जब वे किसी बड़े अंतरराष्ट्रीय मंच पर उतरें तो उनके सामने भी देश का तिरंगा हो और वे भारत के खाते में पदक जोड़ सकें।शर्मिला के जीवन में निजी स्तर पर भी कई उतार-चढ़ाव आए। उनका विवाह कम उम्र में हुआ था, लेकिन 26 साल की उम्र में उनका पहला वैवाहिक रिश्ता समाप्त हो गया। उस समय उनकी दो बेटियां थीं। इसके बाद उन्होंने बेटियों के साथ मायके लौटकर जीवन को नए सिरे से आगे बढ़ाया। दो साल बाद उन्होंने अजीत के साथ दूसरा विवाह किया। इसके बाद उन्हें ऐसा जीवनसाथी मिला, जिसने उनके फैसलों का समर्थन किया और आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया।
पति की एक सलाह बनी खेल करियर की शुरुआत का कारण
शर्मिला के खेल सफर की शुरुआत में अजीत का सुझाव महत्वपूर्ण साबित हुआ। पैरा खिलाड़ियों की सफलता से संबंधित एक खबर देखने के बाद उन्होंने शर्मिला को भी इस क्षेत्र में अपनी किस्मत आजमाने के लिए कहा। यह विचार धीरे-धीरे उनके जीवन का लक्ष्य बन गया। शर्मिला ने अभ्यास शुरू किया और खेल के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को मजबूत करती चली गईं। वक्त के साथ उनकी मेहनत रंग लाई और उन्होंने देश के लिए स्वर्ण पदक जीतने की उपलब्धि हासिल कर ली।













