हरियाणा सरकार ने ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने और उन्हें स्वरोजगार से जोड़ने की दिशा में नई पहल शुरू की है। इसके तहत पात्र स्वयं सहायता समूहों (SHG) को गांवों की शामलात भूमि डेयरी गतिविधियों के लिए पट्टे पर दी जा सकेगी। सरकार की इस व्यवस्था से उन महिलाओं को फायदा मिलने की उम्मीद है, जो पशुपालन और डेयरी का काम शुरू करना चाहती हैं, लेकिन जमीन की कमी के कारण आगे नहीं बढ़ पा रही हैं।नई व्यवस्था के तहत हरियाणा राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़े पात्र स्वयं सहायता समूह पंचायत की उपलब्ध शामलात भूमि का उपयोग डेयरी संचालन के लिए कर सकेंगे। इसका उद्देश्य महिलाओं के लिए आय का स्थायी साधन तैयार करने के साथ-साथ गांवों में पशुपालन और दुग्ध व्यवसाय को बढ़ावा देना है।
दो साल के लिए मिलेगा जमीन का पट्टा
प्रावधानों के मुताबिक, जिला प्रशासन की अनुमति से ग्राम पंचायत की अधिकतम 500 वर्ग गज तक शामलात भूमि स्वयं सहायता समूह को दो साल की अवधि के लिए पट्टे पर दी जा सकती है। यदि इस दौरान समूह की डेयरी गतिविधियां संतोषजनक तरीके से संचालित होती हैं, तो पट्टे की अवधि को आगे तीन साल तक बढ़ाने का प्रावधान भी रखा गया है।इस पहल के साथ महिलाओं को केवल जमीन उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि उन्हें पशुपालन और डेयरी प्रबंधन से जुड़ी जरूरी जानकारी भी दी जाएगी। इसके लिए प्रशिक्षित ‘पशु सखी’ स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को तकनीकी और व्यावहारिक मार्गदर्शन देंगी।
27 महिलाओं को दिया गया पशुपालन और डेयरी प्रबंधन का प्रशिक्षण
इसी कड़ी में जिला विकास भवन में पशु सखी प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में जिले के पांचों खंडों के 16 गांवों से जुड़ी 27 सक्रिय स्वयं सहायता समूह सदस्यों ने हिस्सा लिया। प्रशिक्षण के दौरान महिलाओं को पशुओं की देखभाल, डेयरी संचालन और पशुपालन से संबंधित विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी गई।अधिकारियों के अनुसार, जिले में कुल 50 सक्रिय महिलाओं को पशु सखी के रूप में प्रशिक्षित करने की योजना है। ये महिलाएं आगे अन्य स्वयं सहायता समूहों को पशुओं के पोषण, टीकाकरण, बेहतर प्रबंधन, दूध उत्पादन और बाजार में बिक्री से संबंधित जानकारी उपलब्ध कराने में मदद करेंगी।
योजना का लाभ लेने के लिए जरूरी होंगी ये शर्तें
शामलात भूमि पर डेयरी शुरू करने के लिए हर स्वयं सहायता समूह को कुछ निर्धारित पात्रता शर्तों को पूरा करना होगा। समूह कम से कम एक साल से सक्रिय होना चाहिए और उसकी नियमित बचत व ऋण गतिविधियों का रिकॉर्ड भी होना जरूरी है। इसके अलावा समूह में कम से कम 10 महिला सदस्य होनी चाहिए और सभी सदस्य संबंधित ग्राम पंचायत की निवासी होनी चाहिए।समूह की बैठकों में कम से कम 75 प्रतिशत उपस्थिति भी अनिवार्य होगी। वहीं, किसी सरकारी योजना या बैंक से जुड़ा डिफॉल्ट अथवा लंबित विवाद रखने वाले समूह इस सुविधा के लिए पात्र नहीं होंगे।इसके अलावा परिवार पहचान पत्र में जिस सदस्य या उसके परिवार के नाम 500 वर्ग गज या उससे अधिक जमीन दर्ज है, उस परिवार को भी इस योजना के दायरे से बाहर रखा जाएगा। इस शर्त का उद्देश्य उन महिलाओं को प्राथमिकता देना है, जिनके पास डेयरी गतिविधियां शुरू करने के लिए पर्याप्त निजी जमीन उपलब्ध नहीं है।
योजना से जुडी प्रमुख बातें
- पात्र स्वयं सहायता समूहों को अधिकतम 500 वर्ग गज तक शामलात भूमि पट्टे पर दी जा सकेगी।
- शुरुआत में जमीन का पट्टा दो साल के लिए होगा।
- डेयरी गतिविधियां संतोषजनक रहने पर पट्टे की अवधि तीन साल तक बढ़ाई जा सकती है।
- समूह का कम से कम एक साल से सक्रिय होना जरूरी होगा।
- समूह में न्यूनतम 10 महिला सदस्य होनी चाहिए।
- सभी सदस्यों का संबंधित ग्राम पंचायत का निवासी होना जरूरी है।
- समूह की बैठकों में कम से कम 75 प्रतिशत उपस्थिति अनिवार्य होगी।
- बैंक या सरकारी योजना में डिफॉल्ट करने वाले समूह पात्र नहीं होंगे।
- 500 वर्ग गज या उससे अधिक निजी जमीन वाले परिवारों को योजना का लाभ नहीं मिलेगा।
- प्रशिक्षित पशु सखी डेयरी संचालन, पशुपालन, ऋण और दूध की बिक्री से जुड़ी जानकारी देने में मदद करेंगी।














