इंदिरा गांधी विश्वविद्यालय, मीरपुर, रेवाड़ी, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA), रेवाड़ी तथा जिला जेल, रेवाड़ी के संयुक्त तत्वावधान में “Vocational Training Certificate Course in Culinary Skills for Jail Inmates” का शुभारंभ किया गया। इस अवसर पर बंदियों के कौशल विकास एवं पुनर्वास को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए इंदिरा गांधी विश्वविद्यालय, मीरपुर, रेवाड़ी, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, रेवाड़ी तथा जिला जेल अधीक्षक, रेवाड़ी के मध्य समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में इंदिरा गांधी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. असीम मिगलानी उपस्थित रहे। इस अवसर पर मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी (CJM) डॉ. रेणु सोलखी, जिला जेल अधीक्षक श्री रेशम तथा प्रो. अदिति शर्मा, निदेशक युवा कल्याण (DYW) एवं विभागाध्यक्ष, होटल एवं टूरिज्म मैनेजमेंट विभाग विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं।
पुनर्वास एवं आत्मनिर्भरता की विशेष आवश्कता
कुलपति प्रो. असीम मिगलानी ने अपने संबोधन में कहा कि शिक्षा एवं कौशल विकास समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचना चाहिए। विश्वविद्यालय का उद्देश्य केवल परिसर तक सीमित न रहकर समाज के उन वर्गों तक भी गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण पहुंचाना है जिन्हें पुनर्वास एवं आत्मनिर्भरता की विशेष आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि यह प्रशिक्षण कार्यक्रम बंदियों के आत्मविश्वास को बढ़ाने के साथ-साथ उन्हें सम्मानजनक आजीविका के अवसर प्रदान करेगा।
प्रशिक्षण बंदियों को मिलेगी नई दिशा और नई पहचान
CJM डॉ. रेणु सोलखी ने कहा कि कौशल आधारित शिक्षा बंदियों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने का प्रभावी माध्यम है। ऐसे कार्यक्रम उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने तथा रिहाई के बाद स्वावलंबी जीवन जीने के लिए प्रेरित करते हैं।जिला जेल अधीक्षक श्री रेशम ने इस पहल के लिए विश्वविद्यालय एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि व्यावसायिक प्रशिक्षण बंदियों को नई दिशा और नई पहचान प्रदान करेगा तथा उनके पुनर्वास की प्रक्रिया को मजबूत बनाएगा।
प्रो. अदिति शर्मा ने बताया कि यह एक माह का व्यावसायिक प्रशिक्षण प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम होगा, जिसके अंतर्गत बंदियों को पाक-कला (Culinary Skills) का व्यापक एवं व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा। प्रशिक्षण में भारतीय व्यंजन, बेकरी एवं कन्फेक्शनरी उत्पाद, इटैलियन व्यंजन, विभिन्न प्रकार के सलाद, कॉन्टिनेंटल भोजन तथा आधुनिक कुकरी तकनीकों का प्रशिक्षण शामिल रहेगा।
उन्होंने यह भी बताया कि इस संपूर्ण प्रशिक्षण कार्यक्रम का संचालन इंदिरा गांधी विश्वविद्यालय के होटल एवं टूरिज्म मैनेजमेंट विभाग के शिक्षकगण द्वारा किया जाएगा। विभाग के विशेषज्ञ संकाय सदस्य बंदियों को व्यावहारिक कक्षाओं, डेमोंस्ट्रेशन तथा हैंड्स-ऑन प्रशिक्षण के माध्यम से पाक-कौशल में दक्ष बनाएंगे।कार्यक्रम में डॉ. विक्रांत, डॉ. पवन तथा डॉ. नवनीत भी विशेष रूप से उपस्थित रहे और उन्होंने इस पहल को सामाजिक पुनर्वास, कौशल विकास एवं आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया।
अंत में सभी अतिथियों ने इस अभिनव पहल की सराहना करते हुए कहा कि शिक्षा, न्याय व्यवस्था और सुधारात्मक तंत्र के समन्वय से समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाया जा सकता है। यह कार्यक्रम बंदियों को नई आशा, नए कौशल और सम्मानजनक भविष्य की दिशा प्रदान करने वाला महत्वपूर्ण प्रयास सिद्ध होगा।













