शंभू बॉर्डर न्यूज़ : भारत-अमेरिका मुक्त व्यापार समझौते (FTA) के विरोध में मंगलवार को किसानों ने दिल्ली में प्रस्तावित महापंचायत में शामिल होने का ऐलान किया है। पंजाब के अलग-अलग जिलों से किसान संगठनों के जत्थे राजधानी की ओर रवाना होने की तैयारी में हैं। इसे देखते हुए हरियाणा प्रशासन ने पंजाब-हरियाणा सीमा पर स्थित शंभू बॉर्डर पर सुरक्षा व्यवस्था को पहले से अधिक मजबूत कर दिया है। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों को अलर्ट पर रखा गया है ताकि किसी भी स्थिति से समय रहते निपटा जा सके।
सीमा पर बैरिकेडिंग, भारी मशीनें भी तैनात
दिल्ली की ओर बढ़ने वाले संभावित काफिलों को नियंत्रित करने के लिए शंभू बॉर्डर पर अतिरिक्त बैरिकेड लगाए गए हैं। पुलिस बल के साथ-साथ जेसीबी और क्रेन जैसी मशीनों को भी मौके पर तैनात किया गया है, ताकि आवश्यकता पड़ने पर रास्तों को तुरंत नियंत्रित किया जा सके। प्रशासन का कहना है कि आम लोगों की आवाजाही प्रभावित न हो और कानून-व्यवस्था पूरी तरह सामान्य बनी रहे, इसके लिए सभी जरूरी इंतजाम किए गए हैं।
फिलहाल हाईवे पर यातायात जारी, हालात पर लगातार नजर
अभी राष्ट्रीय राजमार्ग-44 पर यातायात सामान्य रूप से चल रहा है और मार्ग को पूरी तरह बंद नहीं किया गया है। हालांकि प्रशासन लगातार हालात की समीक्षा कर रहा है। अधिकारियों का कहना है कि यदि परिस्थितियों में बदलाव होता है तो सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। यात्रियों से भी यात्रा से पहले ट्रैफिक की स्थिति की जानकारी लेने की सलाह दी गई है।
किसान बोले- विरोध व्यापार समझौते का, किसी सरकार से टकराव नहीं
किसान संगठनों के नेताओं का कहना है कि उनका आंदोलन भारत-अमेरिका मुक्त व्यापार समझौते के विरोध तक सीमित है। उनका दावा है कि यह प्रदर्शन किसी राज्य सरकार या पुलिस प्रशासन के खिलाफ नहीं है। किसानों का कहना है कि वे शांतिपूर्ण ढंग से अपनी बात सरकार तक पहुंचाना चाहते हैं और पूरे आंदोलन के दौरान अनुशासन बनाए रखने का प्रयास करेंगे।
कई संगठनों ने महापंचायत में शामिल होने की घोषणा
पंजाब के विभिन्न किसान संगठनों के अलावा अन्य राज्यों से जुड़े किसान संगठन भी दिल्ली में आयोजित महापंचायत में शामिल होने की तैयारी कर रहे हैं। अलग-अलग जिलों से ट्रैक्टर-ट्रालियों और अन्य वाहनों के माध्यम से किसानों के जत्थे रवाना हो रहे हैं। संगठनों का कहना है कि इस प्रदर्शन का उद्देश्य केंद्र सरकार तक अपनी मांगों और चिंताओं को प्रभावी ढंग से पहुंचाना है।
अधिकारियों और किसान नेताओं के बीच हुई बातचीत
दिल्ली रवाना होने से पहले किसान नेताओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने सीमा पर मौजूद प्रशासनिक अधिकारियों से मुलाकात की। दोनों पक्षों के बीच सुरक्षा व्यवस्था और आगे की रणनीति को लेकर चर्चा हुई। अधिकारियों ने किसानों की बात सुनने के बाद स्थिति की समीक्षा करने और आवश्यक निर्णय लेने की बात कही। फिलहाल बातचीत के जरिए समाधान निकालने की कोशिश जारी है।
शंभू बॉर्डर पहले भी रहा आंदोलन का बड़ा केंद्र
शंभू बॉर्डर बीते वर्षों में किसान आंदोलनों का प्रमुख केंद्र रह चुका है। लंबे समय तक चले धरने के दौरान हजारों किसान इसी सीमा पर डटे रहे थे। उस दौरान दिल्ली की ओर बढ़ने की कई कोशिशें हुईं, लेकिन सुरक्षा एजेंसियों ने उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया था। लंबे आंदोलन का असर राष्ट्रीय राजमार्ग पर यातायात, व्यापार और स्थानीय कारोबार पर भी देखने को मिला था।
किसानों की पुरानी मांगें अब भी कायम
किसान संगठन लगातार न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) को कानूनी दर्जा देने, किसानों और खेत मजदूरों के कर्ज से राहत, कृषि सुधारों से जुड़े लंबित मुद्दों के समाधान तथा आंदोलन के दौरान दर्ज मामलों को वापस लेने जैसी मांगें उठाते रहे हैं। उनका कहना है कि जब तक इन मुद्दों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक आंदोलन और विरोध कार्यक्रम जारी रहेंगे।
प्रशासन की अपील- शांति बनाए रखें
हरियाणा प्रशासन ने किसानों और आम नागरिकों से शांति बनाए रखने की अपील की है। अधिकारियों का कहना है कि सुरक्षा व्यवस्था केवल एहतियात के तौर पर की गई है ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से बचा जा सके। वहीं पुलिस ने भी स्पष्ट किया है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना उनकी प्राथमिक जिम्मेदारी है और सभी पक्षों से सहयोग की अपेक्षा की जा रही है। आने वाले घंटों में किसानों के दिल्ली कूच और प्रशासन की रणनीति पर सभी की नजर बनी हुई है।













