हरियाली बढ़ाने के लिए रेवाड़ी में छह करोड़ रुपये से होगा पौधरोपण, जानिए अरावली ग्रीन वॉल प्रोजेक्ट की सच्चाई

On: July 21, 2026 9:15 AM
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हरियाणा में वन क्षेत्र और हरियाली केवल सरकारी फाइलों

रेवाड़ी: हरियाणा सरकार एक बार फिर जिले में हरियाली का बढाने के लिए योजना तैयार की है। इस योजना के चलते अलग-अलग ब्लॉकों में पौधरोपण को लेकर 6 करोड़ रुपये के टेंडर जारी किए गए हैं। सवाल यह है हर साल हरियाली बढाने के लिए पौधारोपण के नाम पर करोंडो बजट खर्च किया जाता है लेकिन हरियाली केवल कागजो में ही हो रही है।

बता दे रेवाडी में वन क्षेत्र बढ़ाने के लिए वन विभाग की ओर से राज्य योजना के तहत बड़े पैमाने पर पौधरोपण अभियान चलाया जाएगा। सभी टेंडरों की अंतिम तिथि 23 जुलाई निर्धारित है।

वन विभाग की योजना के अनुसार नाहड़, गढ़ी बोलनी, झाबुआ, बावल, जाटूसाना, रेवाड़ी, खोल और धारूहेड़ा ब्लॉकों में राज्य योजना के तहत नए पौधे लगाए जाएंगे।

  • बावल : 1.20 करोड़ रुपये
  • रेवाड़ी : 1.16 करोड़ रुपये,
  • जाटूसाना : 80 लाख रुपये
  • खोल : 80 लाख रुपये
  • धारूहेड़ा : 80 लाख रुपये
  • नाहउ : 40 लाख रुपये
  • गढ़ी बोलनी : 40 लाख रुपये
  • झाबुआ : 40 लाख रुपये

स्थानीय पर्यावरणीय परिस्थितियों के अनुरूप विभिन्न प्रजातियों के पौधे लगाए जाएंगे ताकि उनकी जीवित रहने की संभावना अधिक रहे। योजना के तहत जिले के सरकारी संस्थानों कॉलेज, आईटीआई और सरकारी स्कूलों के परिसर में पौधरोपण किए जाएंगे। इससे विद्यार्थियों और कर्मचारियों को पर्यावरण संरक्षण का संदेश मिलेगा।

 

रोटरी क्लब ऑफ रेवाड़ी: पर्यावरण संरक्षण और वृक्षारोपण के प्रति जागरूकता का दिया संदेश
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जानिए कैसे होता है पोधारोपण

हरियाणा में पिछले साल हरियाली बढ़ाने के नाम पर वन विभाग ने जो पौधरोपण कराया, उसमें भारी भ्रष्टाचार सामने आया है। विभाग की ओर से हरियाणा में बडी संख्या पौधे रोपने थे, लेकिन ज्यादातर जगह लीपापोती कर दी गई। कुछ साइट्स पर पौधे लगाना तो दूर, गड्ढे ही नहीं खोदे गए। एक साइट पर पौधरोपण का एरिया ही कम कर दिया गया। इन साइट्स पर कागजों में लाखों पौधे लगाए गए, लेकिन मौके पर पौधों का नामोनिशान नहीं है। इसके बावजूद भुगतान पूरा उठाया गया।

कागजो में बढ रही हरियाली: हर साल वन विभााग लाखों रूपए खर्च करके पौधारोपण करता है। इनता ही नही सामाजिक सगठनों, स्कूलो में अभियान चलाकर पौधे वितरित किए जाते है। लेकिन हर साल पौधों की संख्या बढने की बजाय घटती ही जा रही है। क्योंकि केवल कागजो में ही अभियान चल रहा है। धरातल पर कोई कोई काम नहीं हो रहा हैं सरकार को पता है फिर कोई ठोस कदम नहीं उठाय जा रहा है।

कागजों में बढ़ रही हरियाली (Greenery increasing only on paper) एक ऐसी गंभीर समस्या और कटाक्ष है, जहां सरकारी रिकॉर्ड और दावों में तो देश या राज्य में जंगल बढ़ते दिखाई देते हैं, लेकिन असलियत में ज़मीन पर हरियाली गायब होती जा रही है।

कागजों में हरियाली का खेल क्यों और कैसे होता है?

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, अगर किसी ज़मीन पर सिर्फ दस प्रतिशत (10%) हिस्से में भी पेड़-पौधे हैं, तो उसे ‘जंगल’ मान लिया जाता है। इसमें शहर के गोल्फ कोर्स और निजी बगीचे भी गिने जाते हैं। कई जगह करोड़ों का बजट पास होने के बाद भी ज़मीन पर गड्ढे नहीं खोदे जाते और न ही पेड़ लगाए जाते हैं। सिर्फ कागजों में पौधे दिखा दिए जाते हैं और मेंटेनेंस के नाम पर सरकारी पैसे का गबन कर लिया जाता है। विकास के नाम पर सदियों पुराने प्राकृतिक और घने जंगलों को काट दिया जाता है। उनकी भरपाई के लिए कहीं और छोटे पौधे लगा दिए जाते हैं।

 

023 में केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने किया शुभांरभ

25 मार्च 2023 को अरावली की गोद में बसे गुरुग्राम जिले के गांव टीकली में लगभग 50 पौधे लगाकर प्रोजेक्ट का शुभारंभ किया गया। शुभारंभ स्वयं केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ ही हरियाणा के तत्कालीन वन एवं पर्यावरण मंत्री की मौजूदगी में किया था।

आगे पौधे लगाने की बात दूर, लगाए गए पौधे भी जीवित नहीं रहे। पानी न मिलने से सभी धीरे-धीरे सूख गए। प्रोजेक्ट के शुभारंभ के दौरान कहा गया था कि जल्द ही आगे कैसे काम करना है, क्या-क्या काम होने हैं आदि विषयों का प्रारूप तैयार किया जाएगा। ढाई साल बाद भी न प्रोजेक्ट को लेकर अलग से बजट तैयार किया गया और न ही क्या-क्या कार्य हाेने हैं उसका प्रारूप तैयार किया गया।

 

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क्या है अरावली ग्रीन वॉल प्रोजेक्ट?

अरावली ग्रीन वॉल प्रोजेक्ट के तहत वर्ष 2030 तक दिल्ली से लेकर गुजरात तक 1400 किलोमीटर लंबी हरियाली की दीवार बनाई जानी है यानी पौधे इस तरह से लगाए जाने हैं कि हरियाली की दीवार दिखाई दे। इससे जहां राजस्थान से आने वॉली धूल भरी आंधी का प्रभाव दिल्ली सहित पूरे एनसीआर में कम होगा। वहीं प्रदूषण का स्तर भी कम होगा।

प्रोजेक्ट के तहत पहले चरण में आठ लाख हेक्टेयर भूमि पर पौधे लगाए जाने हैं। वर्ष 2030 तक दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान एवं गुजरात के 64.5 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में हरित पट्टी बनाने की योजना है। प्रोजेक्ट के तिहत अरावली पहाड़ी क्षेत्र के दायरे में आने वॉले क्षेत्र में जितने भी तालाब हैं, उन सभी का जीर्णोद्धार किया जाना है।

तालाबों के जीर्णोद्घार से जहां आसपास हरियाली बढ़ेगी वहीं भूजल स्तर ऊंचा होगा। प्रोजेक्ट के तहत 2.6 करोड़ हेक्टेयर बंजर भूमि को उपजाऊ बनाने का भी लक्ष्य है। अनुमान है कि प्रोजेक्ट पर काम होने से 2.5 से 3 अरब टन कार्बन डाइाक्साइड के बराबर अतिरिक्त अवशोषण क्षमता का विकास होगा।

Harsh Chauhan

मेरा नाम हर्ष चौहान है। मैं Best24News में कंटेंट राइटर के लगभग 4 सालों से काम रहा हूँ । मेरी हमेशा कोशिश रहती है आप लोगों तक ब्रेकिंग न्यूज़ जल्द से जल्द अपडेट करूं और न्यूज़ में कोई व्याकरण की गलती न हो।

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