Traffic Rule Change: आज अप्रैल का महीना शुरु हो रहा है। ऐसे में कार या बाइक चलाने वाले सावधान हो जाएं। इस नए साल यानि 2025.26 से ट्रैफिक नियम और ज्यादा सख्त हो गए हैं। अगर आपके पास पहले से कुछ पेंडिंग (Pending chalan) चालान है आपने भुगतान नहीं किया है तो आपके लिए काफी महंगा साबित हो सकता है। नए नियमों के तहत आपका ड्राइविंग लाइसेंस जब्त हो सकता है। जानिए नए ट्रैफिक नियम क्या है। New Traffic Rule
तीन महीने के लिए DLजब्त: बता दे कि ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करने वालों को समय पर जुर्माना न भरने पर सजा देने के उद्देश्य से, सरकार ने एक नया, सख्त समाधान पेश किया है. अगर आपके पास पिछले तीन महीनों से लंबित ई-चालान राशि है जिसका भुगतान नहीं किया गया है, तो कानून प्रवर्तन एजेंसियों द्वारा आपका ड्राइविंग (Lience) लाइसेंस जल्द ही निलंबित किया जा सकता है.
इसके अलावा, अगर आपके पास एक वित्तीय वर्ष में रेड सिग्नल कूदने या खतरनाक ड्राइविंग के लिए 3 चालान हैं, तो आपका लाइसेंस कम से कम तीन महीने के लिए जब्त किया जा सकता है.
ये भी पढ़ें:अंतरमहाविद्यालय खो-खो प्रतियोगिता में यदुवंशी डिग्री कॉलेज, नारनौल की टीम उपविजेता
सिर्फ 40 प्रतिशत चालान की वसूली: बता दे कि यह सख्त नियम इसलिए लाया गया है क्योंकि सरकार ने देखा कि ई-चालान राशि की वसूली केवल 40 प्रतिशत ही हो पाई है. सख्त कानून न केवल आपके ड्राइविंग लाइसेंस को खतरे में डालेंगे, बल्कि सूत्रों का कहना है कि सरकार एक रणनीति तैयार कर रही है जिसमें पिछले वित्तीय वर्ष से कम से कम 2 लंबित चालान होने पर उच्च बीमा प्रीमियम को जोड़ने की योजना है.
क्योंकि अक्सर कुछ वाहन मालिकों ने देर से अलर्ट या( E Chalan) गलत चालान के कारण जुर्माना नहीं भरा है. ऐसे मामलों के लिए, सरकार एक व्यापक मानक संचालन प्रक्रिया के साथ आने की योजना बना रही है, जिसमें कैमरों के लिए न्यूनतम विनिर्देश और लंबित चालानों के बारे में वाहन मालिकों या ड्राइवरों को हर महीने अलर्ट भेजना शामिल है, जब तक कि भुगतान नहीं किया जाता है।
ये भी पढ़ें:हरियाणा में कैदियों को बडा तोहफा, जेल में शिकायत दर्ज करवाने का दिया अधिकार
जानिए कहां है सबसे कम वसूली दर: यह मुख्य रूप से चालानों की कम वसूली दर के कारण है. प्रकाशित रिपोर्टों के अनुसार, जारी किए गए सभी ई-चालानों में से केवल 40 प्रतिशत ही वसूले जाते हैं. राज्यवार वसूली दर को देखते हुए, दिल्ली में सबसे कम वसूली दर 14 प्रतिशत है, इसके बाद कर्नाटक में 21 प्रतिशत और तमिलनाडु और उत्तर प्रदेश में 27 प्रतिशत है. महाराष्ट्र और हरियाणा में वसूली दर सबसे अधिक 62 और 76 प्रतिशत है.
