
हरियाणा (Best24News): रासायनिक खाद, कीटनाशकों के अंधाधुंध इस्तेमाल और कृषि में बढ़ती लागत से परेशान किसानों के लिए हरियाणा सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। राज्य में प्राकृतिक खेती (Natural Farming) का दायरा बढ़ाने और मिट्टी की सेहत सुधारने के लिए गांवों की पंचायती जमीन का इस्तेमाल करने की योजना बनाई गई है। इस योजना के पहले चरण के तहत वर्ष 2027 की शुरुआत से ग्राम पंचायतों की कुल उपलब्ध भूमि का 10 प्रतिशत हिस्सा प्राकृतिक खेती के लिए पट्टे (Lease) पर आवंटित किया जाएगा।
लागत घटेगी, जैविक उपज की बिक्री के लिए मंडियों में अलग शेड : कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्याम सिंह राणा की अध्यक्षता में आयोजित बजट समीक्षा बैठक के दौरान इस नीति को जल्द से जल्द धरातल पर उतारने के निर्देश दिए गए हैं। हरियाणा में प्राकृतिक खेती को बड़ा बढ़ावा देने के लिए 10% पंचायती जमीन पर प्राकृतिक खेती करने की योजना बनाई गई है ताकि प्राकृतिक का रकबा बढ सकें।
800 एकड़ सरकारी जमीन पर शुरुआत: सरकार पहले ही कृषि विभाग की 800 एकड़ जमीन पर प्राकृतिक खेती करने की कार्ययोजना तैयार कर चुकी है। अब इसे पंचायत स्तर तक विस्तार दिया जा रहा है। प्राकृतिक खेती से तैयार उपज को बेचने में किसानों को दिक्कत न हो, इसके लिए प्रदेश की अनाज मंडियों में प्राकृतिक उपज की खरीद और बिक्री के लिए अलग काउंटर/शेड और आधुनिक टेस्टिंग लैब स्थापित की जाएंगी।
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लागत में कमी व मिट्टी की गुणवत्ता: देशी गाय के गोबर व गोमूत्र (जीवामृत/बीजामृत) से की जाने वाली इस खेती से किसानों का खाद-कीटनाशक का खर्च बचेगा और भूमि की उर्वरता भी लंबे समय तक बनी रहेगी।योजना के नियम और शर्तों का आधिकारिक इंतजारहालांकि पट्टे की अवधि, आवंटन की पात्रता, आरक्षण और अन्य विस्तृत नियम-शर्तों के संबंध में कृषि एवं विकास एवं पंचायत विभाग की ओर से जल्द ही विस्तृत दिशा-निर्देश (SOP) जारी किए जाएंगे।
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