
हरियाणा: पानीपत के सेक्टर-12 स्थित आर्य समाज मंदिर में रविवार को आर्य समाज के संतों और प्रबुद्धजनों की बैठक हुई। बैठक में हरियाणा में अंधविश्वास और पाखंड के खिलाफ अभियान चलाने का निर्णय लिया गया। बैठक के बाद गुरुकुल कालवा के स्वामी दिव्यानंद ने बताया कि संत रामपाल की ओर से आर्य समाज को शास्त्रार्थ की चुनौती दी गई थी।
15 नवंबर को होगा विशाल सम्मेलन: इसी चुनौती को स्वीकार करते हुए 3 अक्टूबर को आर्य समाज के कई स्वामी और विद्वान धनाना स्थित रामपाल के आश्रम पहुंचे थे। स्वामी दिव्यानंद के अनुसार, वहां उनकी ओर से डिबेट के लिए कोई सामने नहीं आया।स्वामी दिव्यानंद ने बताया कि अब 15 नवंबर को जींद के गुरुकुल कालवा में विशाल आर्य सम्मेलन आयोजित किया जाएगा। इस सम्मेलन के मंच से संत रामपाल को शास्त्रार्थ में शामिल होने का औपचारिक निमंत्रण दिया जाएगा।
उन्होंने कहा कि मंच पर आर्य समाज के संतों और विद्वानों के लिए बैठने की व्यवस्था होगी और रामपाल के लिए भी अलग कुर्सी रखी जाएगी, ताकि वे आकर धर्म और शास्त्रों के विषय पर चर्चा कर सकें।
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ये रहे मौजूद: बैठक में दिलबाग आर्य, आचार्य राजेंद्र, जिला परिषद के वाइस चेयरमैन सुरेश आर्य मलिक, प्रोफेसर आनंद आर्य, शशि चड्ढा, रमेश बजाज, निशांत आर्य, संदीप आर्य, चंद्र गुलाटी और आदम प्रकाश आर्य सहित अन्य लोग मौजूद रहे। वक्ताओं ने कहा कि समाज को अंधविश्वास से मुक्त करने के उद्देश्य से यह अभियान आगे भी जारी रहेगा।
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