Haryana News: इन मजदूरों को सरकार देगी ₹5 लाख, परिवार को भी मिलेगी आर्थिक सुरक्षा

On: April 22, 2026 9:53 PM
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Haryana News: हरियाणा सरकार के द्वारा समय-समय पर मजदूरों के लिए महत्वपूर्ण फैसले लिए जाते हैं। राज्य सरकार के द्वारा मजदूरों के लिए बड़ा फैसला लिया गया है। अब राज्य में लिवर से संबंधित गंभीर बीमारी के इलाज के लिए सरकार मजदूरों को ₹500000 देगी और परिवार के देखरेख के लिए भी सहायता राशि जारी करेगी। सरकार के फैसले से मजदूरों को काफी फायदा होगा।

राज्य में अब न्यूमोकोनियोसिस जैसी जानलेवा बीमारी से जूझ रहे मजदूरों को पुनर्वास के तहत अधिकतम 5 लाख रुपये तक की एकमुश्त आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी। यह कदम उन श्रमिकों के लिए संजीवनी साबित हो सकता है, जो लंबे समय से धूल और प्रदूषण वाले कार्यस्थलों में काम करने के कारण गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का सामना कर रहे हैं।

नई नीति के अनुसार, यदि किसी श्रमिक को न्यूमोकोनियोसिस डायग्नोसिस बोर्ड द्वारा प्रमाणित किया गया है, लेकिन वह इस योजना का लाभ उठाने से पहले ही मृत्यु को प्राप्त हो जाता है, तो उसके आश्रितों को भी 5 लाख रुपये की सहायता दी जाएगी।

इसके अलावा सिलिकोसिस, एस्बेस्टोसिस, बायसिनोसिस और बैगासोसिस जैसी बीमारियों से पीड़ित श्रमिकों को हर महीने 4,000 रुपये की पेंशन दी जाएगी। अगर मरीज की मृत्यु हो जाती है, तो उसके आश्रितों को 3,500 रुपये मासिक पेंशन मिलेगी।

मरीजों के इलाज के लिए आर्थिक सहायता के अलावा, मृत्यु की स्थिति में आश्रितों को 1 लाख रुपये और अंतिम संस्कार के लिए 15,000 रुपये दिए जाएंगे। वहीं, बच्चों की शिक्षा के लिए भी सरकार ने विशेष प्रावधान किए हैं। पहली से पांचवीं कक्षा तक 5,000 रुपये, छठी से आठवीं तक 6,000 रुपये, नौवीं-दसवीं के लिए 8,000 रुपये, ग्यारहवीं-बारहवीं के लिए 10,000 रुपये और उच्च शिक्षा के लिए 12,000 रुपये सालाना सहायता दी जाएगी।

बेटियों की शादी के लिए 51,000 रुपये और बेटों की शादी के लिए 11,000 रुपये की सहायता भी प्रदान की जाएगी। इस पूरी योजना के लिए एक विशेष कोष बनाया जाएगा, जिसमें 70 प्रतिशत योगदान हरियाणा श्रम कल्याण बोर्ड और 30 प्रतिशत योगदान भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड द्वारा दिया जाएगा।

Sunil Chauhan

सुनील चौहान हरियाणा के रेवाड़ी और धारूहेड़ा क्षेत्र की खबरों को कवर करते हैं। उन्हें पत्रकारिता में 10 साल का अनुभव है और वे सामाजिक, प्रशासनिक और स्थानीय मुद्दों पर रिपोर्टिंग करते हैं।

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