हरियाणा में लंबे अंतराल के बाद मानसून ने एक बार फिर रफ्तार पकड़ ली है। सोमवार को प्रदेश के कई हिस्सों में हुई बारिश के बाद मौसम पूरी तरह बदल गया और लोगों को उमस भरी गर्मी से बड़ी राहत मिली। मौसम विभाग का कहना है कि आने वाले दिनों में बारिश की गतिविधियां और तेज हो सकती हैं। इसके चलते कई जिलों के लिए चेतावनी भी जारी की गई है।
13 जिलों में भारी बारिश की संभावना, लोगों को सतर्क रहने की सलाह
मौसम विभाग के ताजा पूर्वानुमान के अनुसार 21 से 24 जुलाई के बीच हरियाणा के उत्तरी, मध्य और दक्षिणी हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश के साथ कुछ स्थानों पर तेज वर्षा होने की संभावना है। खासतौर पर पंचकूला, अंबाला, यमुनानगर, कुरुक्षेत्र और करनाल में भारी बारिश की आशंका को देखते हुए ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। वहीं कैथल, पानीपत, जींद, रोहतक, सोनीपत, झज्जर, गुरुग्राम और फरीदाबाद समेत कई जिलों में येलो अलर्ट लागू रहेगा।
हरियाणा में मानसून,इन जिलों में हुई बारिश, तापमान में दर्ज हुई गिरावट
बीते 24 घंटे के दौरान हिसार, फतेहाबाद, जींद, कैथल, करनाल, रोहतक, झज्जर, सोनीपत, पंचकूला, कुरुक्षेत्र, भिवानी, चरखी दादरी और फरीदाबाद सहित कई जिलों में बारिश दर्ज की गई। बारिश के बाद अधिकतम तापमान में उल्लेखनीय गिरावट देखने को मिली, जिससे लोगों को लू और तेज गर्मी से राहत मिली। कई शहरों में दिन का तापमान सामान्य से नीचे पहुंच गया।
मानसून ट्रफ में बदलाव से बढ़ी बारिश की गतिविधियां
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार मानसून ट्रफ की स्थिति में बदलाव और उत्तर भारत के ऊपर बने मौसमीय सिस्टम के कारण हरियाणा में नमी वाली हवाओं का प्रवाह बढ़ा है। इसके अलावा पंजाब क्षेत्र के आसपास बने साइक्लोनिक सर्कुलेशन का असर भी प्रदेश के मौसम पर दिखाई दे रहा है। यही वजह है कि अगले कुछ दिनों तक बारिश का सिलसिला जारी रहने की संभावना बनी हुई है।
दिन में ठंडक, लेकिन रात में बढ़ सकती है उमस
लगातार बादल छाए रहने और बीच-बीच में बारिश होने से दिन के तापमान में कमी आएगी। हालांकि वातावरण में नमी बढ़ने के कारण रात के समय उमस महसूस हो सकती है। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि बारिश के दौरान तेज हवा और गरज-चमक भी देखने को मिल सकती है, इसलिए खुले स्थानों पर सावधानी बरतने की जरूरत है।
किसानों के लिए राहत की खबर
बारिश की वापसी को खरीफ फसलों के लिए फायदेमंद माना जा रहा है। धान, बाजरा, कपास और अन्य फसलों को इस बारिश से नमी मिलेगी, जिससे सिंचाई पर निर्भरता कम होगी। कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को सलाह दी है कि भारी बारिश वाले क्षेत्रों में खेतों से जल निकासी की व्यवस्था बनाए रखें ताकि फसलों को नुकसान न पहुंचे।












