रेवाड़ी शहर को रात में रोशन रखने के लिए हर साल लाखों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, लेकिन जमीनी तस्वीर कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। नगर परिषद की ओर से स्ट्रीट लाइटों की देखरेख और मरम्मत पर सालाना 70 लाख रुपये से अधिक खर्च होने के बावजूद शहर के कई प्रमुख मार्गों और रिहायशी इलाकों में रात के समय अंधेरा पसरा रहता है। खराब स्ट्रीट लाइटों के कारण जहां लोगों को परेशानी हो रही है, वहीं बारिश के मौसम में सड़क पर बने गड्ढे और बेसहारा पशु हादसों का खतरा भी बढ़ा रहे हैं।
शहर के कई ऐसे हिस्से हैं, जहां रात में सफर करने वाले लोगों को पर्याप्त रोशनी नहीं मिलती। दिल्ली रोड, नारनौल रोड, झज्जर चौक, रेलवे रोड, कोर्ट मार्ग, अनाज मंडी रोड, सर्कुलर रोड, मॉडल टाउन, ब्रास मार्केट और गढ़ी बोलनी रोड समेत कई स्थानों पर स्ट्रीट लाइटों के खराब होने की शिकायतें सामने आती रही हैं। कुछ जगहों पर लाइटें लंबे समय से बंद हैं तो कहीं पर्याप्त रोशनी नहीं होने के कारण राहगीरों और वाहन चालकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
बारिश में सड़क के गड्ढे बन रहे बड़ा खतरा, अंधेरे में नहीं दिखती राह
मानसून के दौरान यह समस्या और गंभीर हो जाती है। बारिश के बाद सड़कों पर जमा पानी कई बार गड्ढों को ढक देता है। ऐसे में यदि आसपास स्ट्रीट लाइट भी बंद हो तो वाहन चालकों के लिए सड़क की स्थिति का अंदाजा लगाना मुश्किल हो जाता है। खासकर दोपहिया वाहन चालकों के लिए यह स्थिति बेहद जोखिम भरी साबित हो सकती है। अचानक गड्ढा सामने आने पर वाहन का संतुलन बिगड़ने से दुर्घटना की आशंका बनी रहती है।इसके अलावा रात के समय सड़कों पर बैठे बेसहारा पशु भी अंधेरे के कारण आसानी से दिखाई नहीं देते। इससे वाहन चालकों के सामने अचानक ब्रेक लगाने या रास्ता बदलने की स्थिति पैदा हो सकती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि शहर में बेहतर रोशनी केवल सुविधा का विषय नहीं है, बल्कि यह सड़क सुरक्षा से भी सीधे जुड़ा हुआ मामला है।
महिलाओं और बुजुर्गों के लिए भी मुश्किल, रात में पैदल निकलना हुआ चुनौतीपूर्ण
स्ट्रीट लाइट खराब होने का असर सड़क पर चलने वाले हर व्यक्ति पर पड़ता है। रात में काम से लौटने वाले लोगों के अलावा महिलाओं, बुजुर्गों और पैदल यात्रियों को भी अंधेरी सड़कों से गुजरना पड़ता है। कई कॉलोनियों और बाजारों में रोशनी की कमी के कारण लोगों को असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों की मांग है कि नगर परिषद को केवल मुख्य सड़कों पर ही नहीं, बल्कि गली-मोहल्लों में भी स्ट्रीट लाइट व्यवस्था की नियमित जांच करनी चाहिए।
रेवाड़ी में 70 लाख के खर्च के बाद भी रोशनी की कमी पर उठे सवाल
रेवाड़ी की स्ट्रीट लाइट व्यवस्था पर हर साल 70 लाख रुपये से अधिक खर्च किए जाने के बावजूद यदि कई इलाकों में अंधेरा बना हुआ है, तो रखरखाव की प्रक्रिया पर सवाल उठना लाजिमी है। लोगों का कहना है कि स्ट्रीट लाइटों की खराबी का पता चलने के बाद मरम्मत का इंतजार करने के बजाय नगर परिषद को नियमित निरीक्षण की व्यवस्था बनानी चाहिए। इससे खराब लाइटों की पहचान समय रहते हो सकेगी और लोगों को लंबे समय तक परेशानी नहीं झेलनी पड़ेगी।














