Dharuhera News: धारूहेड़ा। साहबी बैराज में भरा प्रदूषित पानी अब धारूहेड़ा के आसपास के गांवों के लिए आफत बन गया है। पिछले कई दिनों से हो रही हुई बारिश से मसानी बैराज का जलस्तर बढ़ गया है । जिससे ओवरफ्लो हुआ पानी आसपास के खेतों में फैल गया है। रविवार को खलियावास गांव में बाढ़ जैसे हालात हो गए हैं। गांव की करीब 200 एकड़ कृषि भूमि जलमग्न हो गई है।

दो घरों की दीवारें गिरी, बडा हादसा टला
मसानी बैराज से आ रहे दूषित और काले पानी ने आसपास के गांवों में तबाही मचानी शुरू कर दी है। गांव खलियावास में दूषित जलभराव के कारण दो ग्रामीणों के मकानों की दीवारें गिर गईं। दीवार गिरने के वक्त पास ही काम कर रहे किसान बाल-बाल बच गए, जिससे एक बड़ा हादसा होने से टल गया। ग्रामीणों में इस प्रशासनिक लापरवाही को लेकर भारी रोष है।
200 एकड फसल हुई जलमग्न
पानी खेतों की मेड़ को पार कर गांव की मुख्य सड़क पर पहुंच गया है। ग्रामीणों को अब गांव में पानी घुसने का डर सताने लगा है। गांव को बचाने के लिए ग्रामीणों को खुद खलियावास-तितरपुर मुख्य रास्ते को खोदकर पानी का बहाव मोड़ना पड़ा। ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन की ओर से समय रहते जलनिकासी की व्यवस्था नहीं की गई, जिसके चलते उन्हें अपने स्तर पर यह कदम उठाना पड़ा।

मसानी बैराज से आ रहे दूषित और काले पानी ने आसपास के गांवों में तबाही मचानी शुरू कर दी है। गांव खलियावास में दूषित जलभराव के कारण दो ग्रामीणों के मकानों की दीवारें गिर गईं। दीवार गिरने के वक्त पास ही काम कर रहे किसान बाल-बाल बच गए, जिससे एक बड़ा हादसा होने से टल गया। ग्रामीणों में इस प्रशासनिक लापरवाही को लेकर भारी रोष है।
गांव खलियावास में बाढ जैसे हालात
मसानी बैराज से काफी बडी मात्रा में काला केमिकलयुक्त गंदे पानी ने गांव खलियावास को चारों तरफ से घेर लिया है। पानी के अत्यधिक भराव और मकानों की नींव में पानी रिसने के कारण गांव के निवासी शमशेर और लीलू के मकानों की दीवारें अचानक ढह गईं। इतना ही नहीं गांव में कई एकड में जलभराव हो गया है।
गांव खलियावास में घुसे इस बदबूदार और दूषित पानी से न केवल मकानों और फसलों को नुकसान पहुँच रहा है, बल्कि गांव में संक्रामक बीमारियों और महामारी फैलने का खतरा भी मंडराने लगा है। ग्रामीणों का कहना है कि दूषित पानी से नालियां और रास्ते पूरी तरह लबालब हो चुके हैं, जिससे लोगों का अपने ही घरों से निकलना दूभर हो गया है। पानी की बहाव लगातार बढता ही जा रही है अगर तीतरपुर जाने वाली सडक को नही तोडने गांव की पानी में डूब जाता।
बाल-बाल बचा किसान: प्रत्यक्षदर्शियों और ग्रामीणों का आरोप है कि जिस समय शमशेर के मकान की दीवार गिरी, ठीक उसी समय उसके पास एक किसान काम कर रहा था। गनीमत यह रही कि दीवार का मलबा किसान के ऊपर नहीं गिरा और वह समय रहते दूर हट गया, वरना बड़ा जानलेवा हादसा हो सकता था।
जलभराव अब केवल कृषि भूमि तक सीमित नहीं रहा। इंदिरा गांधी विश्वविद्यालय की ओर भी पानी बढ़ रहा है। विश्वविद्यालय तक जाने वाले मार्ग पर पानी पहुंचने से सड़क के ऊपर से पानी बहने की स्थिति बन रही है।ग्रामीणों ने सरकार और प्रशासन से मांग की है कि मौके पर तत्काल वरिष्ठ अधिकारियों की टीम भेजी जाए। जलस्तर की निगरानी के साथ पंप लगाकर पानी की निकासी कराई जाए और गांवों की आबादी तथा मुख्य रास्तों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।













