CPR: Best24News: देश में हृदय गति रुकने (कार्डियक अरेस्ट और हार्ट अटैक) के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। हाल के समय में देखा गया है कि खेल के मैदान से लेकर शादी-समारोहों और दफ्तरों में चलते-फिरते लोग अचानक कार्डियक अरेस्ट के शिकार हो रहे हैं। ऐसे आपातकालीन मामलों में CPR (Cardiopulmonary Resuscitation) किसी भी व्यक्ति के लिए ‘संजीवनी’ साबित हो सकता है। बुधवार रात को धारूहेड़ा में आरडब्लूए के पूर्व उपप्रधान की हदय गति रूकने से मौत हो।
CPR in Heart Attack : आजकल कम उम्र में भी हार्ट अटैक का खतरा बढ़ता जा रहा है. पिछले कुछ समय में 40 से कम उम्र के कई युवा हार्ट अटैक से अपनी जान गंवा चुके हैं. सबसे चिंता की बात है कि हार्ट अटैक के मामले उन लोगों में देखे गए हैं, जो अक्सर जिम जाते हैं, फिटनेस को लेकर अलर्ट रहते हैं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, कार्डियक अरेस्ट आने पर मरीज को अस्पताल पहुंचाने तक कुछ ही मिनटों का बेहद कीमती समय (Golden Hour / Golden Period) मिलता है। अगर इस दौरान मरीज को सही समय पर सीपीआर दे दिया जाए, तो उसकी जान बचने की संभावना 2 से 3 गुना तक बढ़ जाती है। हृदय गति रुक जाने पर सीपीआर (कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन) एक आपातकालीन प्रक्रिया है।
सीपीआर क्या है?
सीपीआर का पूरा नाम कार्डियो पल्मोनरी रिससिटेशन है । यह एक आपातकालीन प्रक्रिया है जो कार्डियक अरेस्ट की स्थिति में आपकी जान बचा सकती है। कार्डियक अरेस्ट का मतलब है कि आपका दिल धड़कना बंद कर देता है और शरीर में खून पंप नहीं कर पाता। सीपीआर का मुख्य हिस्सा छाती को दबाना (छाती के बीचोंबीच जोर से और तेजी से दबाना) है। इससे शरीर के महत्वपूर्ण अंगों तक खून का प्रवाह बना रहता है।
क्या है CPR और यह क्यों जरूरी है?
सीपीआर (Cardiopulmonary Resuscitation) एक आपातकालीन प्राथमिक चिकित्सा (First-Aid) प्रक्रिया है। जब किसी व्यक्ति का दिल अचानक धड़कना बंद कर देता है, तो शरीर और दिमाग तक ऑक्सीजन युक्त खून की सप्लाई रुक जाती है।
सीपीआर के जरिए मरीज की छाती को दबाकर और कृत्रिम सांस देकर उसके शरीर और मस्तिष्क तक खून का बहाव बनाए रखा जाता है, जिससे डॉक्टर के पास पहुंचने तक मरीज के ब्रेन डेड (Brain Dead) होने का खतरा टल जाता है।
सीपीआर के प्रकार
सांसों के साथ सीपीआर (पारंपरिक सीपीआर) : इसमें छाती को दबाया जाता है और मुंह से मुंह लगाकर सांस दी जाती है। इस प्रकार की सीपीआर करने के लिए सीपीआर प्रमाणन आवश्यक है।
हाथों से की जाने वाली सीपीआर : इसमें केवल छाती को दबाया जाता है (सांस नहीं दी जाती)। इस प्रकार की सीपीआर के लिए सीपीआर प्रमाणन की आवश्यकता नहीं होती। आप इसे स्वयं सीख सकते हैं।
CPR देने के मुख्य फायदे
जान बचने की संभावना अधिक: कार्डियक अरेस्ट के तुरंत बाद सीपीआर मिलने से मरीज के जीवित बचने की संभावना 50% से 70% तक बढ़ जाती है। बता दे कि मस्तिष्क (Brain) को सुरक्षा के लिए दिल रुकने के 3-4 मिनट के भीतर अगर दिमाग को ऑक्सीजन न मिले तो ब्रेन टिश्यू डेड होने लगते हैं। सीपीआर दिमाग तक ऑक्सीजन पहुंचाता रहता है। यह तकनीक आपातकालीन चिकित्सा टीम या एम्बुलेंस के पहुंचने तक मरीज के अंगों को सक्रिय रखती है।
CPR देने का सही तरीका (Step-by-Step Guide):
अगर आपके सामने कोई व्यक्ति अचानक बेहोश होकर गिर जाता है या उसकी सांसें रुक जाती हैं, तो तुरंत इन स्टेप्स का पालन करें
सबसे पहले मरीज के कंधे थपथपाएं और जोर से पूछें—”क्या आप ठीक हैं?”
अगर व्यक्ति कोई जवाब न दे और उसकी सांस या नब्ज न चल रही हो, तो तुरंत एम्बुलेंस (108) को कॉल करें या किसी को बुलाने भेजें। मरीज को पीठ के बल किसी सख्त और समतल सतह पर लिटाएं।
छाती दबाना (Hands-Only CPR): अपनी दोनों हथेलियों को एक-दूसरे के ऊपर फंसाकर (Lock करके) मरीज की छाती के ठीक बीच (Breastbone) पर रखें। अपनी कोहनियों को सीधा रखते हुए अपनी पूरी ताकत से छाती को 1.5 से 2 इंच नीचे तक दबाएं। आपको एक मिनट में कम से कम 100 से 120 बार छाती को दबाना है (लगभग 1 सेकंड में 2 बार)।
माउथ-टू-माउथ सांस : अगर आप ट्रेंड हैं, तो हर 30 बार छाती दबाने के बाद 2 बार मरीज के मुंह में सांस दें। अगर आप ट्रेंड नहीं हैं, तो केवल बिना रुके छाती दबाते रहें (Hands-Only CPR)।
जागरूकता की भारी कमी: 98% लोग अब भी अनजान
एक आंकड़े के अनुसार भारत में लगभग 98% लोगों को सीपीआर देने की सही जानकारी नहीं है। विशेषज्ञों का मानना है कि स्कूल, कॉलेज, पुलिसकर्मियों, ड्राइवरों और सार्वजनिक स्थानों पर तैनात कर्मचारियों के लिए सीपीआर की ट्रेनिंग अनिवार्य की जानी चाहिए।













