Dharuhera News: धारूहेड़ा: हरियाणा के जिला रेवाडी के कस्बा धारूहेड़ा की तीन गांवों की पंंचायत में स्ट्रीट लाइटों को लेकर बडा गोलमाल मामले का खुलासा हुआ है। इन ग्राम पंचायतों में पांच साल के दौरान स्ट्रीट लाइट और हाईमास्ट लाइट खरीद में लाखों रूपए की हेराफेरी की है। इसी को लेकर गुरुग्राम एसीबी ने मालपुरा और सुनारिया असदपुर पंचायतों के सरपंच, सचिव समेत आठ लोगों को आरोपी बनाया है। बता दे इसकी जांच एसीबी रेवाड़ी के प्रभारी निरीक्षक जयपाल सिंह को सौंपी गई है।Dharuhera News
सरकार चाहे कोई भी आ जाए। भ्रष्टचार रूकने वाला है। क्योकि हर महकमे में अधिकारी की फर्जी करने का रास्ता बताते है। बस सवाल यह है अगर कोई जाग चाहे तो कार्रवाई होगी नहीं मामला बंद हो जाता है। वैसे पंचायतों में फर्जी वाडे का यह कोई पहला मामला नहीं है। ि
जानिए कैसे लगाया चूना: जांच में सामन आया कि फर्मों की फर्जी कोटेशन लगाकर निर्धारित दर से अधिक कीमत पर लाइटें खरीदी गईं। घटाल महानियावास ग्राम पंचायत के रिकॉर्ड की जांच में वर्ष 2010 से 2013 के बीच स्ट्रीट लाइट खरीद के चार बिल सामने आए। इनमें बालाजी इलेक्ट्रिक स्टोर नई सब्जी मंडी और भारत इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग, पाल्हावास से लाइट खरीद दिखाई गई। एक बिल में 26 स्ट्रीट लाइट 1.25 लाख रुपये से अधिक में खरीदी गईं। तकनीकी मूल्यांकन में इस खरीद पर 81,212 रुपये का अंतर पाया गया।
इतना ही नहीं मार्च 2011 के एक अन्य बिल में 30 Street Light की खरीद पर तकनीकी मूल्यांकन में 93,660 रुपये अधिक खर्च होने की बात सामने आई भी आई है। इन दोनों मामलों में लगी कोटेशन की जांच में भी सवाल उठे। एक फर्म के संचालक ने स्पष्ट किया कि रिकॉर्ड में लगी कोटेशन उनकी फर्म की नहीं थी। दूसरी फर्म की कोटेशन देने से भी संबंधित संचालक ने इनकार किया। जांच में एक फर्म का आबकारी एवं कराधान विभाग में रिकॉर्ड भी नहीं मिला।
वर्ष 2013 के दो अन्य बिलों में 60 और 50 स्ट्रीट लाइटों की खरीद दिखाई गई। इनमें 56,520 और 47,100 रुपये का अंतर तकनीकी मूल्यांकन में सामने आया। जांच रिपोर्ट में इन मामलों में भी सरकारी राशि की रिकवरी का सुझाव दिया गया है।
इन लोगो पर हुआ मामला दर्ज: जांच के चलते घटाल महानियावास के तत्कालीन सरपंच रामपाल, तत्कालीन ग्राम सचिव राजपाल, इलेक्ट्रिकल स्टोर के रघुबीर सिंह, मालपुरा की तत्कालीन सरपंच सुशीला देवी, तत्कालीन ग्राम सचिव राम सिंह, फर्म मालिक प्रदीप कुमार, सुनारिया असदपुर के तत्कालीन सरपंच राकेश और तत्कालीन ग्राम सचिव राजेश गुप्ता शामिल हैं।
बडा खुलासा: जांच में पता चला है ग्राम पंंचायतों में ग्राम सचिव की संरपचों से मिल ऐसा खेल करवाते है। आजकल इसकी उपर की कमाई बंद हो गई तो ये ग्राम सचिव ही खुद ऐसे रास्ते बताते है ताकि वे मिलकर अपनी जेब भर सके। लेकिन सबसे अहम बात यह है पंचायत में ऐसे मामलों का विरोध क्यों नहीं किया जाता है।












