रेवाड़ी: रेवाड़ी में बेसहारा गोवेशों से हर साल किसी ने किसी की जान जाती है। हर बार जिला प्रशासन कार्रवाई के आश्चवासन जनता को मूर्ख् बना देते है। जबकि धरातल पर कोई काम नहीं होता है। हर गली में कुत्ते, बंदर व गायों का जमवाडा लगा रहा है लेकिन जिम्मेदार केवल कागजों में अभियान चला रहते है। अब तक गोवंशो के हमले से 5 लोगेा की मौत् हो चुकी है लेकिन आत कोई मामला दर्ज नही किया गया। भ्रष्टाचार की भी हद होती है। नपा का मकसद सिर्फ जेब भरना है भले ही गोवशों की टक्कर से कितने भी हादसे हो जाए उनको कोई फर्फ नही पडता है।
वीडियों फुटेज के बावजूद गाय के मालिक पर कार्रवाई क्यों नही: सबसे अहम बात यह है अभी सेक्टर चार में हुए हादसे केा लेकर प्रशासन को सरेआम गोवंय के हमले की वीडियो मिल चुके है। आसानी से पहचाना जा सकता है कि कि इस गाय का मालिक कौन है। फिर भी प्रशासन ने मामला दर्ज नहीं किया। हो सकता हो नपा की टीम मालिक से मिल चुकी हो। सबसे दुख की बता यह है हादसा होने के बावजूद सेक्टर चार में गोवंश धडल्ले से धूम रहे है यानि पकडे ही नही जा रहे है। सुबह सुबह सेक्टर चार में 50 से ज्यादा गोवश धूमते रहते है। जिनमें अधिकाशं दूधारू गाये है।

शहर में आवारा पशुओं (Stray Cattle) की वजह से पैदा हो रही समस्याओं और हाल ही में हुए दर्दनाक हादसों को बेहद गंभीरता से लेते हुए जिला नगर आयुक्त, रेवाड़ी प्रदीप अहलावत द्वारा उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक बुलाई गई। इस बैठक में मुख्य सफाई निरीक्षक, पशुपालन विभाग के उप निदेशक तथा संबंधित एजेंसी/फार्म के प्रतिनिधि विशेष रूप से मौजूद रहे।
बैठक के दौरान शहर की सड़कों पर पशुओं के जमावड़े को लेकर जिला नगर आयुक्त ने कड़ा संज्ञान लिया। कार्य में लापरवाही और ढिलाई बरतने पर उन्होंने मुख्य सफाई निरीक्षक को फटकार लगाई और चेतावनी दी कि शहर की किसी भी सड़क या सार्वजनिक स्थान पर आवारा पशु घूमते हुए नजर नहीं आने चाहिए।
बैठक के प्रमुख बिंदु एवं निर्देश:
04 महीनों का ब्योरा तलब: जिला नगर आयुक्त ने सीएसआई से पिछले 04 महीनों की विस्तृत रिपोर्ट मांगी है, जिसमें यह बताना होगा कि इस दौरान किस गौशाला में कितने आवारा पशु/गायें भेजी गई हैं।
जुर्माना भरकर छुड़ाए गए पशुओं का हिसाब: आयुक्त ने यह भी रिपोर्ट मांगी है कि पकड़े गए पशुओं में से ऐसे कौन-कौन से मालिक हैं जिन्होंने जुर्माना (फीस) भरकर अपने पशु छुड़वाए हैं, उनकी सूची प्रस्तुत की जाए। एजेंसी से पशुओं की श्रेणीवार रिपोर्ट: संबंधित एजेंसी/फार्म को भी निर्देश दिए गए हैं कि वे पिछले 04 महीनों का पूरा डेटा प्रस्तुत करें कि उन्होंने कुल कितने नंदी (सांड), कितनी गायें और कितने छोटे बछड़े/बछड़ियों को पकड़ा है।
पशु स्वास्थ्य व बीमारियों पर चर्चा: बैठक में मौजूद पशुपालन विभाग के उप निदेशक के साथ आवारा व बेसहारा पशुओं को होने वाली विभिन्न बीमारियों पर विस्तृत चर्चा की गई तथा उनके स्वास्थ्य व टीकाकरण का ब्योरा लिया गया।
हादसे पर कार्रवाई के सख्त आदेश: हाल ही में आवारा पशुओं के कारण हुए दुखद हादसे में 02 नागरिकों की जान जाने की घटना पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए जिला नगर आयुक्त ने कार्यकारी अधिकारी को नियमानुसार त्वरित व सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए।
जिला नगर आयुक्त, रेवाड़ी ने कहा कि शहरवासियों की जान-माल की सुरक्षा हमारी प्राथमिक जिम्मेदारी है। आवारा पशुओं को पकड़ने के अभियान में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
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