रेवाड़ी में बेसहारा गोवंशों को आंतक बढता जा रहे हैं । बार बार हो रहे हादसों का लेकर प्रशासन गंभीर नहीं है। बेसहारा गोवंश के हमलों से लगातार हो रही मौतों के बाद मृतकों के स्वजनों ने विरोध जतना शुरू कर दिया है। सड़कों पर बढ़ती बेसहारा गोवंशी की संख्या के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय क्यों नहीं है। गोंवश मालिको पर व नपा अधिकारियों पर कार्रवाई क्यों नहीं।
अधिकारियों पर कार्रवाई क्यों नहीं
सेक्टर चार में पहले कई गोंवश लोगो कुचल चुके है। रहने वाले सेवानिवृत्त कैप्टन जगराम की मौत के बाद उनके पोते महेश कुमार ने कहा कि शहर की सड़कों पर बेसहारा गोवंशी की समस्या लगातार गंभीर होती जा रही है। गोवंशी पकड़ने और उन्हें सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने के नाम पर बार-बार टेंडर जारी किए जाते हैं, लेकिन धरातल पर स्थिति में कोई खास बदलाव नहीं आया।

बता दे हर साल बेसहारा पशुओं को सड़कों से हटाने और शहर को कैटल फ्री बनाने के नाम पर लाखों रुपये खर्च किए जा चुके हैं। इसके बावजूद जमीनी हकीकत कुछ और ही नजर आती है। रिकॉर्ड में रेवाड़ी कैटल फ्री शहर बताया जाता है, लेकिन सड़कों पर सैकड़ों की संख्या में बेसहारा पशु घूमते दिखाई दे रहे हैं।
कई मौत होने पर कार्रवाई क्यों नहीं: बता दे रेवाड़ी के सेक्टर-4 निवासी पूर्व कैप्टन जगराम स्कूटी पर सब्जी लेकर घर लौट रहे थे। इसी दौरान सड़क पर घूम रहे बेसहारा पशु ने उनकी स्कूटी को टक्कर मार दी। हादसे में वह बेसुध होकर सड़क पर गिर गए। उन्हें उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई।
उन्होंने कहा कि इस पूरे मामले में अब तक जारी किए गए टेंडरों और खर्च हुई राशि की जांच होनी चाहिए तथा लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई की जानी चाहिए। गोवंश को पकड़ने के लिए अब तक छोड़े गए टेंडरों और उनमें खर्च की गई राशि की जांच कराई जाए। साथ ही दूध निकालने के बाद गोवंशी को सड़कों पर खुला छोड़ने वाले पशुपालकों के विरुद्ध भी कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए। इतना ही नहीं नगर परिषद के अधिकारियों पर एफआईआर दर्ज होनी चाहिए।












