हरियाणा में खेती करने वाले किसानों के लिए कृषि विभाग ने एक ऐसी जरूरी सलाह जारी की है, जिसे नजरअंदाज करना फसल पर भारी पड़ सकता है। आमतौर पर किसान बुवाई से पहले खेत की मिट्टी की जांच करवाने पर ध्यान देते हैं, लेकिन सिंचाई के लिए इस्तेमाल होने वाले पानी की गुणवत्ता को लेकर उतनी गंभीरता नहीं दिखाई जाती। विशेषज्ञों के मुताबिक, लंबे समय तक खराब गुणवत्ता वाले पानी से सिंचाई करने पर खेत की मिट्टी प्रभावित हो सकती है और इसका सीधा असर फसल की पैदावार पर पड़ सकता है।
सिर्फ मिट्टी की जांच कराना ही काफी नहीं
कृषि विभाग का कहना है कि अच्छी फसल के लिए मिट्टी और पानी दोनों की स्थिति को समझना जरूरी है। कई बार खेत की जमीन उपजाऊ होती है, बीज भी अच्छी गुणवत्ता का होता है और किसान खाद का भी सही इस्तेमाल करता है, फिर भी उत्पादन उम्मीद के मुताबिक नहीं मिल पाता। ऐसे मामलों में सिंचाई के पानी की गुणवत्ता भी एक महत्वपूर्ण वजह हो सकती है। पानी में लवणता या क्षारीयता अधिक होने पर धीरे-धीरे मिट्टी की उर्वरता प्रभावित होने की संभावना रहती है।
सरकार ने किसानों को दी पानी की जांच कराने की सलाह
इसी को ध्यान में रखते हुए हरियाणा सरकार किसानों को समय-समय पर ट्यूबवेल के पानी की जांच कराने के लिए जागरूक कर रही है। कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्याम सिंह राणा ने भी किसानों को वैज्ञानिक तरीके से खेती करने पर जोर दिया है। विभाग की ओर से किसानों के बीच ‘करवाओगे पानी की जांच, नहीं आएगी फसल उत्पादन पर आंच’ संदेश के जरिए पानी की गुणवत्ता जांचने के प्रति जागरूकता बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है।पानी की जांच रिपोर्ट मिलने के बाद किसान यह समझ सकते हैं कि उनके खेत के लिए किस तरह की फसल अधिक उपयुक्त रहेगी। इसके अलावा खाद और उर्वरकों का इस्तेमाल भी जरूरत के अनुसार किया जा सकता है। इससे खेती में होने वाले अनावश्यक खर्च को कम करने और उत्पादन बेहतर करने में मदद मिल सकती है।
पानी का सैंपल देने से पहले यह काम जरूर करें
ट्यूबवेल के पानी की जांच कराने के लिए किसान को सबसे पहले बोरवेल या ट्यूबवेल को करीब 30 मिनट तक लगातार चलाना चाहिए। इसके बाद साफ प्लास्टिक की बोतल में लगभग 500 मिलीलीटर से एक लीटर तक पानी का नमूना लिया जा सकता है। सैंपल की सही पहचान के लिए बोतल पर किसान का नाम, मेरी फसल-मेरा ब्यौरा (एमएफएमबी) आईडी, गांव का नाम, किल्ला या खसरा नंबर, मोबाइल नंबर और बोरवेल की गहराई की जानकारी लिखना जरूरी है।
नजदीकी लैब में जमा करा सकते हैं पानी का नमूना
सैंपल तैयार करने के बाद किसान इसे अपने नजदीकी मृदा स्वास्थ्य जांच प्रयोगशाला यानी साइल टेस्टिंग लैब में जमा करा सकते हैं। जांच रिपोर्ट के आधार पर किसान को सिंचाई के पानी की गुणवत्ता के बारे में जानकारी मिलेगी। इसके साथ ही फसल का चुनाव और खाद प्रबंधन किस तरीके से किया जाए, इसे लेकर भी वैज्ञानिक सलाह प्राप्त की जा सकती है।
किसानों के लिए जारी किया गया टोल-फ्री नंबर
कृषि विभाग ने किसानों से अपील की है कि वे बिना जांच और अनुमान के आधार पर खेती करने के बजाय वैज्ञानिक सलाह को प्राथमिकता दें। पानी की जांच या कृषि से संबंधित अधिक जानकारी के लिए किसान 1800-180-2117 टोल-फ्री नंबर पर संपर्क कर सकते हैं। इसके अलावा अपने जिले के कृषि उप-निदेशक कार्यालय से भी आवश्यक जानकारी हासिल की जा सकती है।













