हरियाणा की बेटी ने रचा नया इतिहास, ग्लासगो में चमका शर्मिला धनखड़ का सोना

On: July 28, 2026 10:31 AM
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ग्लासगो में चमका शर्मिला धनखड़ का सोना

शर्मिला धनखड़: हरियाणा के महेंद्रगढ़ जिले के छितरौली गांव की पैरा एथलीट शर्मिला धनखड़ ने ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स में शानदार प्रदर्शन करते हुए भारत के लिए ऐतिहासिक स्वर्ण पदक हासिल किया। महिलाओं की शॉटपुट एफ-57 स्पर्धा में शर्मिला ने 9.81 मीटर का बेहतरीन थ्रो दर्ज कर पहला स्थान हासिल किया। इस उपलब्धि के साथ वह कॉमनवेल्थ गेम्स की पैरा एथलेटिक्स स्पर्धा में भारत के लिए स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली खिलाड़ी बन गईं। उनकी इस ऐतिहासिक कामयाबी पर हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने भी उन्हें बधाई देते हुए कहा कि शर्मिला ने अपने प्रदर्शन से देश और प्रदेश दोनों का गौरव बढ़ाया है।

बचपन में पोलियो, जिंदगी में संघर्ष और फिर घरेलू हिंसा का दर्द

शर्मिला की सफलता की कहानी किसी प्रेरणादायक फिल्म से कम नहीं है। महज दो साल की उम्र में पोलियो के कारण उनका एक पैर प्रभावित हो गया था। इसके बाद आर्थिक परेशानियों के बीच उनका बचपन गुजरा। जिंदगी में मुश्किलें यहीं खत्म नहीं हुईं। शादी के बाद उन्हें दहेज उत्पीड़न और घरेलू हिंसा जैसी परिस्थितियों का भी सामना करना पड़ा। 26 साल की उम्र में दो बेटियों के साथ घर से बाहर कर दिए जाने के बाद भी उन्होंने परिस्थितियों के आगे झुकने के बजाय अपने जीवन को नए सिरे से संवारने का फैसला किया।

पति के सहयोग और अपनी मेहनत से खेल की दुनिया में बनाई अलग पहचान

शर्मिला ने दूसरी शादी के बाद अपने जीवन को नई दिशा दी। उनके पति अजीत और परिवार से मिले सहयोग ने उन्हें आगे बढ़ने का हौसला दिया। इसके बाद उन्होंने खेल को अपना लक्ष्य बनाया और लगातार मेहनत करते हुए पैरा एथलेटिक्स में अपनी पहचान मजबूत की। लंबे समय तक किए गए अभ्यास और तमाम चुनौतियों के बावजूद लक्ष्य पर कायम रहने का नतीजा अब ग्लासगो में मिले ऐतिहासिक स्वर्ण के रूप में सामने आया है। शर्मिला की उपलब्धि उन खिलाड़ियों के लिए भी उम्मीद की किरण है, जो विपरीत परिस्थितियों के बावजूद अपने सपनों को पूरा करने का जज्बा रखते हैं।

भारत के पदक अभियान को मिला एक और सहारा, हाई जंप में सर्वेश ने जीता रजत

ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत के लिए एक और अच्छी खबर पुरुषों की हाई जंप स्पर्धा से आई। भारतीय एथलीट सर्वेश कुशारे ने 2.25 मीटर की छलांग लगाकर रजत पदक अपने नाम किया। वह स्वर्ण पदक से थोड़ा पीछे रह गए, लेकिन उनके प्रदर्शन ने भारतीय दल की पदक तालिका में एक और उपलब्धि जोड़ दी। वहीं, शर्मिला धनखड़ का स्वर्ण संघर्ष और हिम्मत की ऐसी कहानी बन गया है, जो यह संदेश देती है कि मुश्किल हालात किसी व्यक्ति की मंजिल तय नहीं करते, बल्कि मजबूत इरादे और लगातार मेहनत इतिहास बदलने की ताकत रखते हैं।

Sunil Chauhan

सुनील चौहान हरियाणा के रेवाड़ी और धारूहेड़ा क्षेत्र की खबरों को कवर करते हैं। उन्हें पत्रकारिता में 10 वर्षों का अनुभव है वर्तमान में वे Best24News के साथ जुड़े हुए हैं ताजा और विश्वसनीय खबरें प्रकाशित कर रहे हैं।

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