रेवाड़ी जिले में हरित क्षेत्र बढ़ाने और पर्यावरण संरक्षण को मजबूत करने के उद्देश्य से वन विभाग ने इस बार व्यापक पौधरोपण अभियान की योजना तैयार की है। राज्य योजना के तहत करीब छह करोड़ रुपये की लागत से जिले के आठ ब्लॉकों में बड़े स्तर पर पौधे लगाए जाएंगे। इसके लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और तय समय के बाद कार्य एजेंसियों का चयन किया जाएगा। अभियान में बावल, रेवाड़ी, जाटूसाना, धारूहेड़ा, खोल, नाहड़, गढ़ी बोलनी और झाबुआ सहित सभी प्रमुख क्षेत्रों को शामिल किया गया है। इसके अलावा सरकारी स्कूलों, कॉलेजों, आईटीआई, कार्यालयों और अन्य सार्वजनिक परिसरों में भी पौधरोपण कराया जाएगा, ताकि पर्यावरण संरक्षण के साथ लोगों की भागीदारी भी बढ़ाई जा सके।
स्थानीय जलवायु के अनुरूप लगाए जाएंगे पौधे, लंबे समय तक हरियाली बढ़ाने पर रहेगा फोकस
वन विभाग इस अभियान में ऐसी पौध प्रजातियों को प्राथमिकता देगा जो रेवाड़ी की जलवायु और भौगोलिक परिस्थितियों में आसानी से विकसित हो सकें। विभाग का उद्देश्य केवल पौधे लगाना नहीं बल्कि उन्हें लंबे समय तक सुरक्षित और विकसित करना भी है। इसी कारण स्थानीय प्रजातियों के चयन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। योजना के तहत अलग-अलग ब्लॉकों में बजट के अनुसार पौधरोपण कार्य कराया जाएगा, जिसमें बावल और रेवाड़ी ब्लॉक को सबसे अधिक प्राथमिकता मिलने की संभावना है। विशेषज्ञों का मानना है कि सही प्रजातियों का चयन भविष्य में जिले के वन क्षेत्र और पर्यावरण संतुलन को बेहतर बनाने में अहम भूमिका निभाएगा।
पौधरोपण के साथ संरक्षण भी बनेगा सबसे बड़ी चुनौती, देखभाल पर रहेगा विशेष जोर
रेवाड़ी में हर वर्ष मानसून के दौरान बड़ी संख्या में पौधे लगाए जाते हैं, लेकिन पर्याप्त देखभाल, सिंचाई और सुरक्षा के अभाव में काफी पौधे कुछ ही समय में नष्ट हो जाते हैं। यही कारण है कि लगातार पौधरोपण के बावजूद जिले में अपेक्षित हरियाली विकसित नहीं हो पाई है। पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस बार पौधों की नियमित निगरानी, पानी की उपलब्धता और संरक्षण की प्रभावी व्यवस्था सुनिश्चित की गई तो आने वाले वर्षों में जिले का हरित क्षेत्र तेजी से बढ़ सकता है। इससे पर्यावरण संरक्षण को मजबूती मिलने के साथ-साथ लोगों को स्वच्छ और बेहतर वातावरण भी उपलब्ध होगा।













