Breaking News: भारतीय रिजर्व बैंक यानी आरबीआई ने देश की मौद्रिक नीति को लेकर कई बड़ा एलान किया है। आरबीआई के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने मौद्रिक नीति समिति यानी एमपीसी की बैठक के नए नतीजों की घोषणा की। बता दें कि आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बताया कि एमपीसी के सभी सदस्यों ने सर्वसम्मति से पॉलिसी रेपो रेट को बिना किसी बदलाव के 5.25 पर्सेंट पर बरकरार रखने के लिए वोट किया है।Breaking News
बदले गए नए नियमों की पूरी जानकारी की शेयर‘ बता दे कि रिजर्व बैंक के इन फैसलों का सीधा असर देश के आम नागरिकों से लेकर विदेश में रहने वाले निवेशकों पर पड़ने वाला है। गवर्नर ने इस बैठक के बाद प्रेस रिलीज के जरिए नीतिगत दरों और निवेश के नए नियमों की पूरी जानकारी शेयर की है। इस बैठक में देश की आर्थिक स्थिति और वित्तीय बदलावों का बारीकी से आकलन करने के बाद कई बड़े फैसले लिए गए हैं।
रेपो रेट 5.25 पर्सेंट पर बरकरार’ RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बताया कि एमपीसी के सभी सदस्यों ने सर्वसम्मति से पॉलिसी रेपो रेट को बिना किसी बदलाव के 5.25 पर्सेंट पर बरकरार रखने के लिए वोट किया है। लिक्विडिटी एडजस्टमेंट फैसिलिटी यानी एलएएफ के तहत रेपो रेट को स्थिर रखने का यह फैसला देश के आर्थिक हालातों को देखकर लिया गया है।
विदेशी बैंको के लिए बडा योगदान: बता दे कि इस बार की मौद्रिक नीति समीक्षा बैठक में शेयर बाजार के निवेशकों के लिए एक बहुत बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है। रिजर्व बैंक ने देश से बाहर रहने वाले लोगों के लिए भारतीय शेयर बाजार में निवेश के नियमों को पहले से कहीं ज्यादा आसान और बेहतर कर दिया है।
बैंक रेट भी 5.50 पर स्थिर
इसके साथ ही स्टैंडिंग डिपॉजिट फैसिलिटी यानी एसडीएफ रेट को भी 5.00 पर्सेंट पर बनाए रखा गया है। वहीं दूसरी तरफ मार्जिनल स्टैंडिंग फैसिलिटी यानी एमएसएफ रेट और बैंक रेट भी 5.50 पर्सेंट पर स्थिर रहेंगे। एमपीसी ने इस बार भी अपने न्यूट्रल स्टांस यानी तटस्थ रुख को जारी रखने का फैसला किया है।
दुनिया के किसी भी कोने में रहने वाला कोई भी बाहरी नागरिक अब बढ़ी हुई लिमिट के साथ बिना किसी सेबी रजिस्ट्रेशन के भारतीय शेयर बाजार के इक्विटी इंस्ट्रूमेंट्स में निवेश कर सकता है। आरबीआई का मानना है कि मैक्रोइकोनॉमिक और फाइनेंशियल हालातों को देखते हुए लिया गया यह फैसला बाजार में विदेशी निवेश को बढ़ावा देगा।













