हरियाणा के जिला रेवाड़ी की शर्मिला ने एक बार फिर देश का नाम रोशन किया है। रेवाड़ी की पैरा एथलीट नया इतिहास रच दिया हे। ग्लासगो में चल रहे राष्ट्रमंडल खेलों में खिलाड़ी शर्मिला धनखड़ (Sharmila Dhankar) ने एफ 57 कैटेगरी की शाटपुट में स्वर्ण पदक जीत कर रेवाड़ी को नाम रोशन कर दिया है। ग्लास्गो में खेले जा रहे कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 का पांचवां दिन भारतीय खिलाड़ियों के लिए बहुत शानदार रहा। इस दिन भारत को कुल 6 मेडल मिले। शर्मिला धनखड़ ने भारत को इस कॉमनवेल्थ गेम्स का दूसरा गोल्ड मेडल दिलाया।
सोमवार देर रात मिली इस जीत के साथ वह कॉमनवेल्थ खेलों में पैरा एथलेटिक्स में गोल्ड मेडल जीतने वाली पहली भारतीय खिलाड़ी बन गई हैं। इसके साथ ही पैरा एथलेटिक्स में मेडल के लिए भारत का 20 साल का इंतज़ार भी ख़त्म हो गया है। इससे पहले इस स्पर्द्धा में भारत को आख़िरी पदक 2006 के कॉमनवेल्थ गेम्स में मिला था।

बता दे कि शर्मिला की कहानी एक गोल्ड मेडल की नहीं है। गरीबी, पोलियो, घरेलू हिंसा और आर्थिक तंगी जैसी कई मुश्किलों से लड़ते हुए उन्होंने आज ये मुकाम हासिल किया है। खेल ने उनकी जिंदगी बदल दी है और आज वह लाखों लोगों के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं। इससे बडे गर्व की बात यह है देश के 20 साल के रिकार्ड को देबारा से जिंदा कर दिया हैं
बता दे कि राष्ट्रमंडल खेलों के लिए खिलाड़ी शर्मिला धनखड़ (Sharmila Dhankar) भारतीय दल के साथ ग्लासगो रवाना हुईं थीं। 39 वर्षीय शर्मिला इससे पहले 2022 में भी राष्ट्रमंडल खेलों में हिस्सा ले चुकी हैं। इसमें चौथा स्थान प्राप्त किया था। उस वक्त प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने उनसे संवाद भी किया था।
जानिए कौन हैं शर्मिला धनखड़?
- शर्मिला धनखड़ हरियाणा के महेंद्रगढ़ जिले की रहने वाली हैं तथा रेवाड़ी की बहुं है
- दो साल की उम्र में पोलियो हो गया था, जिससे उनके एक पैर पर असर पड़ा।
- वह महिला शॉट पुट और डिस्कस थ्रो की पैरा खिलाड़ी हैं।
- F57 वर्ग उन खिलाड़ियों के लिए होता है जिनके निचले अंगों में कमजोरी, कमी या चलने-फिरने में दिक्कत होती है।
34 साल की उम्र में शुरू किया खेल
बता दे कि शर्मिला ने 34 साल की उम्र में खेलना शुरू किया। 2021 में उन्होंने पैरा नेशनल चैंपियनशिप में राष्ट्रीय रिकॉर्ड के साथ गोल्ड जीता। 2022 बर्मिंघम कॉमनवेल्थ गेम्स और 2023 एशियाई पैरा खेलों में वह चौथे स्थान पर रहीं। इसी साल दुबई में हुए फज्जा इंटरनेशनल पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप में उन्होंने शॉट पुट में गोल्ड और डिस्कस में ब्रॉन्ज जीता।

सोमवार देर रात हुई प्रतियोगिता में उन्होंने 9.61 मीटर दूर शॉट पुट फेंककर यह उपलब्धि हासिल की है। दूसरे नम्बर पर रही खिलाड़ी ने 8.36 मीटर दूर शॉट पुट फेंका है। तीन माह से वह बेंगलुरू के भारतीय खेल प्राधिकरण संस्थान में अभ्यास कर रहीं थीं।
पति ने दिया साथ, घर बेचकर पूरा किया सपना
बता दे कि दूसरी शादी के बाद उनके पति अजीत सिंह ने उन्हें पैरा खेलों में आने के लिए प्रेरित किया।
कोच टेक चंद और देवेंद्र की देखरेख में उन्होंने प्रशिक्षण लिया था आर्थिक तंगी के कारण 2023 में परिवार को रेवाड़ी का अपना घर बेचकर किराए के मकान में रहना पड़ा ताकि उनका खेल जारी रह सके। अब उनका सपना फिर से अपना घर खरीदने का है।
मूल रूप से महेंद्रगढ़ जिले के छितरौली में जन्मी शर्मिला का रेवाड़ी में विवाह हुआ है। उनकी दो बेटियां हैं। बड़ी बेटी अंजू अंडर-16 जैवलिन थ्रो खिलाड़ी हैं, जबकि छोटी बेटी लक्ष्मी अंडर-14 हाई जंप में हिस्सा लेती हैं













