Dharuhera News: रेवाड़ी जिले की लाइफलाइन कही जाने वाली साहबी नदी और धारूहेड़ा के सीमावर्ती इलाकों को राजस्थान के भिवाड़ी व खुशखेड़ा औद्योगिक क्षेत्र से निकलने वाले दूषित पानी से बचाने की लड़ाई में एक बड़ा मोड़ आया है। केंद्र सरकार के आदेश पर राजस्थान प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा गठित की गई उच्च स्तरीय जांच कमेटी ने अपनी रिपोर्ट सौंप दी है।
रिपोर्ट में हुआ खुलासा: इस रिपोर्ट में बोर्ड ने आधिकारिक तौर पर स्वीकार किया है कि हरियाणा की सीमा में बड़ी मात्रा में दूषित पानी पहुंच रहा है, जिसमें जैविक और रासायनिक प्रदूषण फैलाने वाले खतरनाक तत्व सामान्य सीमा से कहीं अधिक पाए गए हैं।
बारिश और जलभराव का फायदा उठाकर कंपनियां छोड़ रहीं जहर
जांच रिपोर्ट के अनुसार, खुशखेड़ा औद्योगिक क्षेत्र के शनि मंदिर और उसके आसपास के निचले इलाकों में लंबे समय से जलभराव की गंभीर समस्या बनी हुई है। रिपोर्ट में कंपनियों की एक बड़ी चालाकी को उजागर किया गया है:Dharuhera News

बता दे कि रिपोर्ट में यह साफ तौर पर स्वीकार किया गया है कि कुछ औद्योगिक इकाइयां (इंडस्ट्रीज) इस जलभराव की स्थिति का गलत फायदा उठाती हैं। जैसे ही मौका मिलता है या बारिश होती है, वे अपना बेहद जहरीला अपशिष्ट जल (Industrial Waste Water) भी इसी सीवेज के पानी में मिला देती हैं।Dharuhera News
भिवाड़ी में सीवेज ट्रीटमेंट और प्रबंधन की क्षमता काफी कम है, जिसके कारण अनुपचारित (Untreated) गंदा पानी सीधे बहकर हरियाणा के सीमावर्ती और साहबी नदी के कैचमेंट क्षेत्रों को प्रभावित कर रहा है। इसको लेकर कई बार शिकायते की लेकिन कोई सुनवाई नहीं की जा रही है।Dharuhera News
केंद्र के निर्देश पर बोर्ड ने तैयार किया यह एक्शन प्लान
इस गंभीर प्रदूषण मामले को देखते हुए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने केंद्र और राज्य स्तर पर समाधान निकालने के लिए एक ब्लूप्रिंट तैयार किया है:Dharuhera News
आगे क्या है योजना’ बता दे कि यहां पर जमा होने वाले गंदे पानी की सुरक्षित निकासी के लिए लगभग छह किलोमीटर लंबी एक विशेष ड्रेन (नाली) बनाने की योजना को मंजूरी दी गई है।

इतना ही नहीं भिवाड़ी में घरेलू सीवेज को साफ करने के लिए 34 एमएलडी (Million Liters per Day) क्षमता का नया सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट शुरू किया गया है ताकि क्षमता की कमी दूर हो।Dharuhera News
कंपनियों के केमिकल वाले पानी को साफ करने के लिए खुशखेड़ा औद्योगिक क्षेत्र में एक कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (CETP) लगाने के लिए जमीन की पहचान कर ली गई है।
पीएमओ और केंद्रीय मंत्री तक पहुंचाई आवाज
इस पूरे मामले को राष्ट्रीय स्तर पर उठाई गई तथा इसको लेकर कार्यालय (PMO), केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) को पत्र लिखकर इस विनाशकारी प्रदूषण से अवगत कराया था।Dharuhera News
साहबी नदी क्षेत्र को इस प्रदूषण से बचाने और स्थानीय लोगों को बीमारियों से राहत दिलाने के लिए उनकी यह कानूनी लड़ाई आगे भी जारी रहेगी। उन्होंने मांग की है कि पानी में केमिकल छोड़ने वाली उन दोषी औद्योगिक इकाइयों की पहचान को सार्वजनिक किया जाए और उनके खिलाफ तुरंत सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।Dharuhera News











