
रेवाड़ी: उप कृषि निदेशक रेवाडी डॉ. राकेश कुमार की अध्यक्षता में मंगलवार को जिला में तैनात किए गए नोडल अधिकारियों के साथ बैठक की गई तथा आवश्यक दिशा निर्देश दिए गए। उन्होने गाँवों में नियुक्त किए गए सभी नोडल अधिकारियों को खेतों में आगजनी की घटनाओं की निगरानी व रोकथाम के लिए लगातार गाँवों में गश्त (पेट्रोलिंग) करने बारे निर्देश दिए।
उन्होने बताया कि पराली को जलाने से वायु प्रदुषण बढ़ता है, मिट्टी की जैविक गुणवत्ता प्रभावित होती है। पराली का प्रबन्धन करने के लिए आज किसानो के पास विकल्प मौजूद है। किसान सुपर सीडर, रिर्वसीबल एम बी प्लॉव, जीरो टिल सीड ड्रील, रोटावेटर व हैरो आदि की सहायता से धान की फसल अवशेषो को मिट्टी में मिलाएं। हरियाणा सरकार ने फसल अवशेष प्रबन्धन करने के लिए सी आर एम स्कीम लागू की हुई है। उन्होने बताया कि यदि कोई किसान पराली जलाता हुआ पाया जाता है तो पाँच हजार से तीस हजार रूपये तक जुर्माना लगाया जाएगा व मेरी फसल मेरा ब्यौरा पोर्टल पर भूमि रिकॉर्ड में रेड एन्ट्री दर्ज की जाएगी।
इसके साथ-साथ सम्बन्धित किसान पर कानूनी कार्यवाही करते हुए एफ आई आर भी दर्ज की जाएगी।इंजी. दिनेश शर्मा सहायक कृषि अभियन्ता, रेवाडी ने बताया कि जिले में धान की कटाई शुरू हो चुकी है। पराली नही जलाने व इसका प्रबन्धन करने वाले किसानो को 1200 रूपये प्रति एकड प्रोत्साहन राशी दी जाती है। कृषि विभाग द्वारा किसानो को फसल अवशेष न जलाने के लिए जागरूक करने व प्रोत्साहन राशी की प्रक्रिया के लिए 132 गाँवो में नोडल अधिकारी नियुक्त किए गए है।
रेवाडी जिले में इस बार मेरी फसल मेरा ब्यौरा पोर्टल पर 4780 एकड का पंजीकरण हुआ है। फसल अवशेष प्रबन्धन कार्य के लिए सभी टीमें लगातार कार्य कर रही है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य किसानो को पराली जलाने से रोकना है तथा फसल अवशेषों के बेहतर उपयोग को बढावा देना है।
ये रहे मौजूद: इस मीटिंग में इंजी. दिनेश शर्मा सहायक कृषि अभियन्ता, रेवाडी, मनोज कुमार, तकनीकी सहायक, डॉ. मनोज, डॉ. अजीत, डॉ. नवीन खण्ड कृषि अधिकारी, इंजी. सुनिल कुमार, कृषि विकास अधिकारी (कृषि यन्त्र) व सभी नोडल अधिकारी मौजूद रहे।
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