Wildlife Corridor: पंजाब के निवासियों और दिल्ली-हरियाणा से ट्राइसिटी की ओर सफर करने वाले वाहन चालकों के लिए एक बड़ी और ऐतिहासिक खबर सामने आई है। राज्य में पहली बार एक आधुनिक वन्यजीव गलियारे (Wildlife Corridor) के निर्माण को हरी झंडी मिल गई है। यह अनोखा वाइल्डलाइफ कॉरिडोर बहुप्रतीक्षित ‘जीरकपुर बाईपास रोड प्रोजेक्ट’ (Zirakpur Bypass Road Project) के अंतर्गत बनाया जाएगा, जिसे केंद्रीय मंत्रिमंडल (Union Cabinet) की अंतिम स्वीकृति प्राप्त हो चुकी है। इस प्रोजेक्ट के बनने से जहां एक ओर ट्रैफिक जाम से मुक्ति मिलेगी, वहीं दूसरी ओर जंगलों के जीवों की सुरक्षा भी सुनिश्चित होगी।
जीरकपुर बाईपास परियोजना को मिली दो साल बाद मंजूरी
जीरकपुर बाईपास रोड परियोजना पिछले दो वर्षों से वन भूमि के कारण अटकी हुई थी. यह परियोजना वन संरक्षण अधिनियम (Forest Conservation Act – FCA) के तहत फंसी हुई थी. क्योंकि प्रस्तावित मार्ग वन क्षेत्र से होकर गुजरता है. इस समस्या का हल निकालते हुए सरकार ने एलिवेटेड रोड के निर्माण का प्रस्ताव रखा. जिससे वन्यजीवों की आवाजाही सुरक्षित बनी रहे और सड़क यातायात भी सुचारु रूप से चल सके.
6-लेन सड़क से जुड़ेगा जंगल
यह प्रस्तावित सड़क 6 लेन की होगी और जंगल के बीच से गुजरते हुए लगभग 50 एकड़ भूमि को प्रभावित करेगी. हालांकि इस बात का खास ध्यान रखा गया है कि वन्यजीवों की आवाजाही में कोई बाधा ना आए. इसलिए लगभग 3 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड स्ट्रेच इस क्षेत्र में बनाया जाएगा. जिससे जंगल के जानवर एक ओर से दूसरी ओर आसानी से जा सकें.
जानिए प्रोजेक्ट की लागत, लंबाई और निर्माण योजना
जीरकपुर बाईपास प्रोजेक्ट की कुल लंबाई 19.2 किलोमीटर है, जो पंजाब और हरियाणा को जोड़ेगी. इस पूरी परियोजना पर 1,878.31 करोड़ रुपये का खर्च अनुमानित है. एलिवेटेड रोड के निर्माण में अतिरिक्त 200 करोड़ रुपये खर्च होंगे. यह गलियारा प्राकृतिक परिवेश और इकोलॉजिकल बैलेंस को बनाए रखते हुए विकसित किया जाएगा.
3 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड स्ट्रेच क्यों है खास?
पर्यावरणविदों के अनुसार, यह कॉरिडोर प्राकृतिक परिवेश और इकोलॉजिकल बैलेंस (पारिस्थितिक संतुलन) को बनाए रखते हुए विकसित किया जा रहा है। इसकी कार्यप्रणाली को नीचे दिए गए चरणों से आसानी से समझा जा सकता है:
इस प्रोजेक्ट की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह राज्य का पहला वाइल्डलाइफ कॉरिडोर होगा. इससे सड़क विकास और पर्यावरण संरक्षण दोनों के बीच संतुलन स्थापित होगा. वन्यजीवों के लिए बिना किसी खतरे के आवागमन संभव होगा. जिससे जंगलों में बायोडायवर्सिटी को नुकसान नहीं पहुंचेगा. साथ ही यह मॉडल भविष्य की परियोजनाओं के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण बन सकता है.
भविष्य के प्रोजेक्ट्स के लिए बनेगा रोल मॉडल
इस प्रोजेक्ट की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह पंजाब राज्य का पहला आधिकारिक वाइल्डलाइफ कॉरिडोर होगा। यह देश में इस बात का बेहतरीन उदाहरण पेश करेगा कि सड़कों के विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन कैसे स्थापित किया जा सकता है। इससे जंगलों की बायोडायवर्सिटी (जैव विविधता) को बिना कोई नुकसान पहुंचाए हाईवे कनेक्टिविटी को सुधारा जा रहा है। यह मॉडल भविष्य में देश भर में बनने वाले अन्य नेशनल हाईवे प्रोजेक्ट्स के लिए भी एक प्रेरणादायक उदाहरण बनेगा।










