IGU Rewari और गीता ज्ञान संस्थानम् के बीच हुआ MOU, जानिए क्या होगा फायदा

On: June 11, 2026 5:53 PM
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IGU Rewari और गीता ज्ञान संस्थानम् के बीच हुआ MOU, जानिए क्या होगा फायदा

IGU Rewari: इंदिरा गांधी विश्वविद्यालय मीरपुर, रेवाड़ी और गीता ज्ञान संस्थान (जीआईईओ गीता), कुरुक्षेत्र के बीच गीता के प्रचार-प्रसार को लेकर समझौता ज्ञापन हस्ताक्षर किया गया। इंदिरा गांधी विश्वविद्यालय की तरफ से कुलपति प्रोफेसर असीम मिगलानी और जीआईईओ गीता की ओर से परम पूज्य स्वामी ज्ञानानंद जी महाराज ने एमओयू पर हस्ताक्षर किए।IGU Rewari

एमओयू का उद्देश्य गीता आधारित शिक्षा, शोध और अकादमिक गतिविधियों को नई गति देना है। इसके साथ ही भगवद्गीता के शाश्वत ज्ञान को अकादमिक जगत से जोड़ते हुए विद्यार्थियों, शोधार्थियों और समाज के विभिन्न वर्गों तक पहुंचाना है। इसके तहत दोनों संस्थाएं गीता के अध्ययन, शोध, प्रशिक्षण और प्रसार के लिए संयुक्त रूप से कार्य करेंगी तथा शैक्षणिक और संस्थागत सहयोग को मजबूत बनाएंगी।IGU Rewari

गीता संबंधी पाठ्यक्रमों का संचालन करेगा विश्वविद्यालय : मिगलानी ।
इंदिरा गांधी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर असीम मिगलानी ने बताया कि एमओयू के अनुसार इंदिरा गांधी विश्वविद्यालय गीता संबंधी कार्यक्रमों और पाठ्यक्रमों के संचालन के लिए आवश्यक शैक्षणिक एवं आधारभूत संरचना उपलब्ध कराएगा। विश्वविद्यालय छात्रों को गीता अध्ययन और उससे जुड़ी गतिविधियों में भागीदारी के लिए प्रोत्साहित करेगा।

IGU Rewari और गीता ज्ञान संस्थानम् के बीच हुआ MOU, जानिए क्या होगा फायदा
IGU Rewari और गीता ज्ञान संस्थानम् के बीच हुआ MOU, जानिए क्या होगा फायदा

इसके अतिरिक्त विश्वविद्यालय द्वारा संचालित पाठ्यक्रमों की सैद्धांतिक और प्रायोगिक परीक्षाएं आयोजित की जाएंगी। समझौते में शैक्षणिक गुणवत्ता और सहभागिता सुनिश्चित करने पर भी विशेष जोर दिया गया है।

जीआईईओ गीता संस्थान की ओर से स्वामी ज्ञानानंद महाराज ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल रोजगार प्राप्त करना नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण और जीवन मूल्यों का विकास भी होना चाहिए। गीता के अध्ययन को विश्वविद्यालयों और शिक्षण संस्थानों से जोड़ना एक सराहनीय और दूरदर्शी पहल है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि गीता ज्ञान संस्थानम् और इंदिरा गांधी विश्वविद्यालय के बीच हुआ समझौता युवाओं में नैतिकता, आध्यात्मिकता और राष्ट्र सेवा की भावना को मजबूती देगा। दोनों संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने विश्वास व्यक्त किया कि यह समझौता केवल एक औपचारिक साझेदारी नहीं, बल्कि भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक शिक्षा के समन्वय की दिशा में सराहनीय पहल है।

उन्होंने कहा कि इस सहयोग से विद्यार्थियों और शोधार्थियों को नए अवसर प्राप्त होंगे तथा भगवद्गीता के ज्ञान, दर्शन और जीवन मूल्यों के व्यापक प्रसार को नई ऊर्जा मिलेगी।

जीआईईओ गीता सचिव मदन मोहन छाबड़ा ने बताया कि एमओयू के तहत दोनों संस्थाएं मिलकर भगवद्गीता पर आधारित अल्पकालिक एवं दीर्घकालिक शैक्षणिक पाठ्यक्रम संचालित करेंगी। साथ ही, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सेमिनार, कार्यशालाएं और शोध संगोष्ठियां आयोजित की जाएंगी। गीता के दार्शनिक, नैतिक और सामाजिक मूल्यों को जन-जन तक पहुंचाने के लिए विभिन्न विस्तार गतिविधियां भी चलाई जाएंगी।

इसके तहत, भगवद्गीता से संबंधित सर्टिफिकेट, डिप्लोमा, स्नातक, स्नातकोत्तर और पीएचडी कार्यक्रमों के पाठ्यक्रमों में किसी प्रकार के संशोधन अथवा अन्य शैक्षणिकत निर्णय लिए जाने की स्थिति में विश्वविद्यालय के बोर्ड ऑफ स्टडीज़ में गीता ज्ञान संस्थानम् के कम से कम एक प्रतिनिधि को विशेष आमंत्रित सदस्य के रूप में शामिल किया जाएगा।

इस अवसर पर आईजीयू के कुलसचिव प्रोफेसर दिलबाग सिंह, अधिष्ठाता शैक्षणिक मामले प्रोफेसर सुनील कुमार, गीता अध्ययन एवं शोध केंद्र गीता ज्ञान संस्थानम के निदेशक प्रोफेसर विवेक कोहली तथा गीता अध्ययन एवं शोध केंद्र के संयोजक डॉ. तरुण शास्त्री प्रमुख रूप से मौजूद रहे।

Harsh Chauhan

हर्ष चौहान Best24News में पत्रकार एवं कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं। वे हरियाणा, रेवाड़ी, धारूहेड़ा, अपराध, सामाजिक गतिविधियों और स्थानीय मुद्दों से जुड़ी खबरों की पिछले 6 साल रिपोर्टिंग कर रहे हैं।

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