IAS Ram Kumar Singh (Best24News) हरियाणा के पंचकूला नगर निगम में हुए 79.46 करोड़ रुपए के हाई-प्रोफाइल फंड घोटाले में गिरफ्तार आईएएस (IAS) राम कुमार सिंह और पंचायत विभाग के तत्कालीन सुपरिंटेंडेंट प्रिंस शर्मा की 3 दिन की सीबीआई रिमांड आज (सोमवार) समाप्त हो रही है।IAS Ram Kumar Singh
केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की विशेष अदालत में दोनों आरोपियों को दोबारा पेश किया जाएगा। इससे पहले गुरुवार को एजेंसी ने दोनों को गिरफ्तार किया था। सूत्रों के मुताबिक, जांच के दौरान आरके सिंह दुबई में बेटे के खाते में भेजी गई रकम और बेनामी संपत्तियों का संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए हैं। IAS Ram Kumar Singh
मोबाइल से गायब मिले रिकॉर्ड, गवाहों पर प्रभाव का डर
CBI ने कोर्ट में रिमांड मांगते हुए दलील दी थी कि आरोपियों के MOBILE से जुड़े महत्वपूर्ण संदेश और संचार रिकॉर्ड (Communication Records) गायब मिले हैं, जिनकी रिकवरी करना बेहद जरूरी है। इसके अलावा, जांच एजेंसी ने आशंका जताई है कि राम कुमार सिंह जैसे वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी के बाहर रहने से गवाहों और मामले से जुड़े अन्य व्यक्तियों पर प्रभाव पड़ सकता है।
CBI ने कोर्ट में रखे ये 3 सबसे बड़े तर्क
जांच एजेंसी ने IAS R K SINGH और प्रिंस शर्मा के खिलाफ कोर्ट में रिमांड के लिए मुख्य रूप से तीन बड़े कारण स हैं:
नियमों के खिलाफ बैंक खाता खुलवाना: जांच में सामने आया कि तत्कालीन कमिश्नर रहे राम कुमार सिंह ने सह-आरोपियों के साथ मिलकर वित्त विभाग के नियमों के विपरीत जाकर IDFC First Bank (सेक्टर-32) में नया खाता खुलवाया और ₹100 करोड़ से अधिक की सरकारी राशि ट्रांसफर करने की मंजूरी दी।
डिजिटल साक्ष्य और गायब चेक: डिजिटल सबूतों से संकेत मिले हैं कि इस कथित साजिश के बदले आईएएस अधिकारी को अवैध लाभ (रिश्वत) मिला। उनके हस्ताक्षर वाले तीन चेक अभी तक बरामद नहीं हुए हैं, जिनका इस्तेमाल फंड के दुरुपयोग में हुआ।
प्रिंस शर्मा की संदिग्ध भूमिका: पंचायत विभाग के तत्कालीन सुपरिंटेंडेंट प्रिंस शर्मा उस विभाग में तैनात नहीं थे, फिर भी उन्होंने बैंक खातों के दस्तावेजों में अपना मोबाइल नंबर दर्ज कराया और वेरिफिकेशन कॉल्स का हिस्सा रहे।
₹2.5 करोड़ का दुबई कनेक्शन और 15 एकड़ जमीन
CBI सूत्रों के अनुसार, इस घोटाले की परतें विदेशों तक जुड़ी हैं। आरोपी आईएएस अधिकारी आरके सिंह के बेटे के दुबई स्थित बैंक खाते में ₹2.5 करोड़ ट्रांसफर किए जाने के सबूत मिले हैं।
इसके साथ ही, करनाल में खरीदी गई 15 एकड़ कृषि भूमि और कुछ अन्य बेनामी संपत्तियों के बारे में भी IAS अधिकारी जांच एजेंसी को कोई ठोस या संतोषजनक जवाब नहीं दे सके हैं। आज कोर्ट में पेशी के बाद यह साफ होगा कि CBI उनकी और रिमांड मांगती है या उन्हें न्यायिक हिरासत (Jail) में भेजा जाता है।












