धारूहेड़ा: ग्रामीण इलाकों में लगातार फैल रहे प्रदूषण और कचरे के ढेरों में लगाई जा रही आग को लेकर हरियाणा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की कार्रवाई केवल कागजों तक सीमित होकर रह गई है। पिछले एक साल के दौरान कार्रवाई करते हुए विभाग की ओर से धारूहेड़ा ब्लॉक के 11 गांवों की पंचायतों पर खुले में कूड़ा जलाने के आरोप में 2 लाख 75 हजार रुपये का पर्यावरण जुर्माना लगाया जा चुका है, लेकिन सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि एक साल बीत जाने के बाद भी इस जुर्माने की 1 रुपये की रिकवरी भी नहीं हो पाई है।
बता दे बार बार चेतावनी के बावजूद ग्राम पंंचायतो में कुडे का निस्तारण नहीं किया जाता है। कूडे को गांव के बाहर एकत्रित करके कूडे को चोरी छीपे जलाया जाता है। ग्रामीण क्षेत्रों में कचरे के सही निस्तारण के बजाय उनमें आग लगाने से बढ़ रहे वायु प्रदूषण को देखते हुए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने सख्त कदम उठाते हुए 11 गांवों की पंचायतों पर लगा 25-25 हजार का जुर्माना लगाते हुए कुल 2.75 लाख रुपये का जुर्माना ठोका गया।
बता दे पंचायतों का प्रशासनिक नियंत्रण ब्लॉक डेवलपमेंट एंड पंचायत ऑफिसर के पास होने के कारण वसूली की जिम्मेदारी विभागीय स्तर पर तय की गई थी। सरकारी कागजों में जुर्माना तो ठोक दिया गया, लेकिन पूरे 1 साल का समय बीत जाने के बाद भी बीडीपीओ कार्यालय द्वारा 2.75 लाख रुपये में से एक भी पैसा जमा नहीं कराया गया है।
प्रशासनिक लापरवाही और विभागों के बीच तालमेल की कमी से यह साफ जाहिर होता है कि जब नियमों का उल्लंघन करने वालों से चालान की रिकवरी ही नहीं की जा सकती, तो ऐसे कागजी जुर्माने लगाने का आखिर क्या औचित्य है? वसूली न होने के कारण गांवों में खुलेआम कूड़ा जलाने का सिलसिला आज भी बदस्तूर जारी है।
कूडा जलाने को लेकर विभाग की ओर से 11 गावों की पंचायतो को लेकर बीडीपीओ पर 2 लाख 75 रूप्ए जुर्माना लगया गया था। रिकवरी नहीं हुई है दोबारो से रिकवरी के लिए रिमांडर भेजा जाएगा अजय यादव, एसडीओ हरियाणा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड













