भिवाड़ी की बीडीआई (BDI) सनसाइन सिटी सोसायटी से जुड़े विवाद ने नया मोड़ ले लिया है। पुलिस थाना भिवाड़ी में न्यायालय के आदेश पर बीडीआई एस्टेट प्राइवेट लिमिटेड के निदेशकों और अन्य लोगों के खिलाफ एफआईआर संख्या 0330/2026 दर्ज की गई है।
मामला 6 जुलाई 2026 को दर्ज हुआ, जबकि शिकायत सोसायटी के कोषाध्यक्ष देवेंद्र सिंह ने 15 जून 2026 को न्यायालय में इस्तगासे के माध्यम से प्रस्तुत की थी। पुलिस ने मामला भारतीय न्याय संहिता की धारा 125, 308(2), 351(2), 351(3) और 61(2) के तहत दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
एफआईआर में बीडीआई एस्टेट प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक सुमित बैरी, शिखा बैरी, जानवी कौर, अधिकृत प्रतिनिधि अभिषेक शाह तथा पांच से छह अज्ञात बाउंसरों को नामजद किया गया है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि बिल्डर ने सोसायटी के क्लब हाउस पर कब्जा कर उसे होटल गोल्डन ट्यूलिप के नाम से संचालित किया, जबकि इसके लिए आवश्यक विभागीय स्वीकृतियां नहीं ली गईं। साथ ही राजस्थान ओनरशिप अपार्टमेंट एक्ट 2015 और फरवरी 2026 में उच्च न्यायालय के हैंडओवर आदेश के बावजूद सोसायटी का प्रबंधन अब तक निवासियों को नहीं सौंपा गया।
परिवादी ने आरोप लगाया कि बिल्डर की मेंटेनेंस एजेंसी ने अवैध रूप से मेंटेनेंस राशि वसूली और उसका उपयोग सोसायटी के रखरखाव के बजाय अन्य परियोजनाओं में किया। शिकायत में यह भी कहा गया कि विरोध करने पर उनके फ्लैट की बिजली और पानी काट दिया गया, जिसके बाद उन्हें टैंकरों से पानी मंगवाना पड़ा। बीडा के मुख्य कार्यकारी अधिकारी द्वारा इस मामले में बिल्डर और मेंटेनेंस एजेंसी पर कार्रवाई और पेनल्टी लगाए जाने का भी उल्लेख किया गया है।
एफआईआर के अनुसार 30 मई 2026 को सोसायटी के बच्चों को स्विमिंग पूल का उपयोग करने से रोक दिया गया तथा बाउंसरों द्वारा अभद्र व्यवहार कर उन्हें बाहर निकाल दिया गया। शिकायत में आरोप है कि बार बार अवैध नोटिस भेजकर धन की मांग की गई और विरोध करने पर गाली गलौज, मारपीट तथा जान से मारने की धमकी दी गई। शिकायतकर्ता का कहना है कि पहले पुलिस में शिकायत देने के बावजूद मामला दर्ज नहीं हुआ, जिसके बाद उन्हें न्यायालय की शरण लेनी पड़ी।

पुलिस ने प्रकरण दर्ज कर जांच थाना प्रभारी भिवाड़ी को सौंप दी है। यह मामला पहले सामने आई बीडा की निरीक्षण रिपोर्ट, क्लब हाउस में कथित अवैध होटल संचालन और उच्च न्यायालय के हैंडओवर आदेश से जुड़े विवादों के कारण भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। जांच के बाद ही आरोपों की पुष्टि और आगे की कानूनी कार्रवाई तय होगी।













