भिवाड़ी : बाबा अमरनाथ के दर्शन के लिए 16 सदस्यीय भक्त जत्था रवाना जय जयकरो के साथ रवाना हुआ। यात्रा पर निकलने से पहले पंडित ने पूजा-अर्चना की और नारियल फोड़कर सभी यात्रियों को आशीर्वाद दिया।
लगे जय जयकारें: बता दे जैसे ही जत्था भ्विाडी से रवाना हुआ तो श्रऋालुओं ने जयकारे लगा। बता दे कि यह जत्था भिवाड़ी से पहलगाम होते हुए अमरनाथ के दर्शन करेगा। यात्रा में शिवकुमार अग्रवाल (भिवाड़ी व्यापार मंडल के पूर्व अध्यक्ष), कमलेश कुमार अग्रवाल, उदयभान अग्रवाल, पवन मित्तल, सूरज, पंकज गुप्ता, रोहित विशाल, सत्यजीत, कृष्ण दत्त, अमित, विशाल जोशी, उमेश चंद्र, दिनेश शर्मा, महेश सैनी, महेश चंद्र और रितिक कुमार शामिल हैं।
यात्रा की सफलता की कामना:
इस अवसर पर भिवाड़ी व्यापार मंडल के पूर्व अध्यक्ष सुनील तायल, अध्यक्ष हरिकिशन शर्मा, महेंद्र मंगला, सत्यनारायण शर्मा, प्रेम चंद तायल, राजेंद्र ‘पप्पू’ अग्रवाल, दुर्गा प्रसाद और हरी प्रसाद गुप्ता सहित कई लोग उपस्थित थे। उन्होंने जत्थे को शुभकामनाएं दीं और यात्रा की सफलता की कामना की।
गुफा में कैसे बनता है शिवलिंग?
अमराथ की पवित्र गुफा में शिवलिंग का निर्माण किसी कृत्रिम तरीके से नहीं होता, बल्कि यह पूरी तरह से प्राकृतिक प्रक्रिया है. गुफा की छत से पानी की बूंदें लगातार नीचे की तरफ टपकती रहती हैं. चूंकि वहां पर तापमान बेहद कम होता है, इसलिए ये बूंदें जमकर एक खंभे का आकार ले लेती हैं, जिसे विज्ञान की भाषा में स्टैलेग्माइट कहा जाता है
Amarnath Shivling Melting: अमरनाथ यात्रा की शुरुआत के साथ ही इस बार ऐसी खबर सामने आई है जिसने शिवभक्तों को हैरान कर दिया है. अमरनाथ की पवित्र गुफा में प्राकृतिक रूप से बनने वाला शिवलिंग यात्रा शुरू होने के महज पांच दिनों के भीतर ही तेजी से सिमट गया है. करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र माने जाने वाले बाबा बर्फानी के इस तरह अचानक अंतर्ध्यान होने से हर कोई अचंभित है. पहले जो शिवलिंग पूरे सावन मास तक शान से चमकता था, वह अब इतनी जल्दी क्यों ओझल हो रहा है? यह सवाल अब सिर्फ आस्था का नहीं, बल्कि इसके पीछे प्रकृति और पर्यावरण के कई गंभीर वैज्ञानिक संकेत छिपे हुए हैं.













