धारूहेड़ा (Best24News): औधोगिक कस्बे धारूहेड़ा और राजस्थान की सीमा से सटे गांव महेश्वरी स्थित प्राचीन शिव मंदिर क्षेत्र के लाखों श्रद्धालुओं के लिए अगाध आस्था और विश्वास का केंद्र है। लगभग एक सदी पुराना यह मंदिर न केवल महेश्वरी गांव, बल्कि आसपास की दर्जनों सोसायटियों, कॉलोनियों और भिवाड़ी क्षेत्र के शिवभक्तों के लिए प्रमुख धार्मिक स्थल है।
इतिहास: जब जोहड़ की खुदाई में प्रकट हुए स्वयंभू शिवलिंग
मंदिर के इतिहास को लेकर बुजुर्ग बताते हैं कि करीब दस दशक (100 वर्ष) पूर्व गांव के जोहड़ के पास खुदाई का कार्य चल रहा था। उसी दौरान वहां जमीन से एक दिव्य शिवलिंग प्रकट हुआ।

शिवलिंग के प्रकट होते ही ग्रामवासियों ने पूर्ण विधि-विधान के साथ उसी स्थान पर छोटे से मंदिर की स्थापना की। समय के साथ-साथ श्रद्धालुओं की आस्था बढ़ती गई और अब तक दो बार मंदिर का भव्य जीर्णोद्धार (सौंदर्यीकरण व विस्तार) किया जा चुका है। वर्तमान में मंदिर में भगवान शिव के साथ पूरे शिव परिवार की अत्यंत मनमोहक मूर्तियां स्थापित हैं।
सावन माह में उमड़ रहा श्रद्धालुओं का सैलाब
सावन के पावन महीने में मंदिर परिसर को आकर्षक रोशनी और फूलों से भव्य रूप से सजाया गया है। प्रतिदिन प्रातःकाल से ही मंदिर में भगवान शिव का रुद्राभिषेक, जलाभिषेक और विशेष पूजा-अर्चना की जा रही है।प्रतिदिन शाम को महिला मंडली व शिवभक्तों द्वारा भजन-कीर्तन व भव्य आरती की जाती है।आरती के पश्चात श्रद्धालुओं में प्रसाद का वितरण किया जाता है।सावन सोमवार और महाशिवरात्रि के दिन यहां विशाल मेले जैसा माहौल रहता है।

कैसे पहुंचें मंदिर?
धारूहेड़ा बस स्टैंड से लगभग 6 किलोमीटर दूर भिवाड़ी मार्ग पर गांव महेश्वरी स्थित है।
धारूहेड़ा या भिवाड़ी से निजी वाहन (कार/बाइक) अथवा ऑटो/सार्वजनिक परिवहन से आसानी से पहुँचा जा सकता है। मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं के वाहनों के लिए परिसर के पास पार्किंग की समुचित व्यवस्था की गई है।
पुजारी राजेंद्र सिंह: “यह शिव मंदिर अत्यंत प्राचीन और सिद्ध पीठ है। जो भी श्रद्धालु सच्चे मन और श्रद्धा से भगवान शिव का जलाभिषेक कर मन्नत मांगता है, भोलेनाथ उसकी सभी मनोकामनाएं अवश्य पूरी करते हैं। सुबह और शाम को मंदिर में दर्शनार्थियों का तांता लगा रहता है।”
पारस (श्रद्धालु): “मैं पिछले कई वर्षों से लगातार इस मंदिर में पूजा-अर्चना करने आ रहा हूँ। इस मंदिर की अगाध आध्यात्मिक ऊर्जा मन को शांति देती है। सावन के दिनों में यहाँ का भक्तिमय माहौल देखने लायक होता है।”













