Best24News: जेएमआईसी अदालत ने जाट आरक्षण आंदोलन से जुड़े एक मामले में एक बडा फैसला सुनाया है। न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी अभिषेक गर्ग की अदालत ने जाट आरक्षण आंदोलन से जुड़े एक मामले में 17 आरोपियों को बरी कर दिया है। कोर्ट के फैसले से आरोपियो ने राहत की सांस ली है
जेएमआईसी अभिषेक गर्ग की अदालत ने 11 सितंबर को यह फैसला सुनाया। जिसके आदेशों की प्रति बुधवार को दी गई। फैसले के अनुसार आरोपियों में जगबीर, झाबर, मणीराम, जगदीश, सचिन पवार, प्रदीप, राजेश पहाड़ी, संजय, ओम प्रकाश, रमेश, सुरेश कुमार, सुल्तान, अनिल गोदारा, राम निवास, अमित ढाका, सुरेंद्र और एक अन्य जगदीश शामिल थे। इन पर भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं, सार्वजनिक संपत्ति क्षति निवारण अधिनियम और राष्ट्रीय राजमार्ग अधिनियम के तहत आरोप लगाए गए थे।
न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी अभिषेक गर्ग की अदालत ने पाया कि अभियोजन पक्ष आरोपियों की पहचान और सरकारी संपत्ति को हुए नुकसान को संदेह से परे साबित करने में विफल रहा। अग्रोहा थाना पुलिस ने वर्ष 2016 में राष्ट्रीय राजमार्ग 10 पर सड़क जाम करने और तोड़फोड़ के आरोपों में केस दर्ज किया था। जिसमें 17 लोगों को आरोपी बनाया गया था।
सरकारी संपत्ति को पहुंचाया था नुकसान: बता दे कि अभियोजन पक्ष ने आरोप लगाया था कि 20 फरवरी 2016 को 50-60 लोगों ने अग्रोहा चौक पर राष्ट्रीय राजमार्ग-10 को अवरुद्ध किया था। उन्होंने वाहनों की आवाजाही रोकी और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाया था। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष संदेह से परे अपना मामला साबित करने में विफल रहा। आरोपियों की पहचान एक महत्वपूर्ण मुद्दा था, क्योंकि घटना में 100 से 150 लोग शामिल थे।











