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रविवार, 1 नवम्बर 2026

Cheque Bounce: चेक बाउंस पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला! क्या कहता है कानून

Written by: सुनील चौहान

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Cheque Bounce: अगर आप लेन-देन में चेक का इस्तेमाल करते हैं या फिर बिजनेस में डील करते हैं तो चेक बाउंस से जुड़ी जानकारी आपके लिए बेहद जरूरी है। पहले चेक बाउंस…


Cheque Bounce: अगर आप लेन-देन में चेक का इस्तेमाल करते हैं या फिर बिजनेस में डील करते हैं तो चेक बाउंस से जुड़ी जानकारी आपके लिए बेहद जरूरी है। पहले चेक बाउंस होते ही दूसरा व्यक्ति केस कर देता था और जेल जाने का डर सताने लगता था। लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा बदलाव करते हुए कहा है कि अब ऐसे मामलों में आरोपी को सीधे जेल भेजना जरूरी नहीं है। आरोपी को पहले अपनी सफाई देने और सुधरने का मौका दिया जाएगा।Cheque Bounce

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Cheque Bounce आज के समय में पैसे का लेन-देन काफी होता है और इस लेन-देन में कई लोग चेक का भी इस्तेमाल करते हैं। ऐसे में अगर चेक बाउंस हो जाए तो मामला सिर्फ पैसे तक ही सीमित नहीं रहता बल्कि कानूनी झंझट में भी बदल सकता है। कई लोगों के मन में यह सवाल जरूर आता है कि क्या चेक बाउंस होने पर जेल भी हो सकती है? आइए इस सवाल के जवाब को डिटेल में समझते हैं और साथ ही यह भी जानते हैं कि आप इससे कैसे बच सकते हैं।

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चेक बाउंस क्या होता है?

जब कोई व्यक्ति किसी को चेक देता है और उसके बैंक खाते में पर्याप्त बैलेंस नहीं होता है तो बैंक उस चेक को “बाउंस” कर देता है यानी रिजेक्ट कर देता है। इसके अलावा गलत सिग्नेचर, ओवरराइटिंग या एक्सपायर चेक भी बाउंस हो सकता है। इसलिए चेक भरते समय सावधानी बरतना जरूरी है।Cheque Bounce

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कब बढ़ सकती है परेशानी?

अगर कोई व्यक्ति बार-बार चेक बाउंस करता है और जानबूझकर पैसे नहीं देता या नोटिस का जवाब नहीं देता, तो कोर्ट सख्त रुख अपना सकता है और जेल की सजा भी हो सकती है। साथ ही कई मामलों में दोनों पक्ष आपस में समझौता कर लेते हैं। सुप्रीम कोर्ट भी कह चुका है कि अगर समझौता हो जाए तो जेल से बचा जा सकता है।

क्या अब चेक बाउंस होने पर नहीं होगी जेल?

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सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया है कि अब चेक बाउंस होने पर ही आरोपी को सीधे जेल नहीं भेजा जाएगा। सबसे पहले उसे नोटिस मिलेगा, उसे अपना पक्ष रखने का मौका दिया जाएगा और अगर वह मामले को सुलझा लेता है तो केस आगे नहीं बढ़ेगा। यह कदम उन लोगों के लिए राहत की बात है जो गलती से या अनजाने में चेक बाउंस कर देते हैं।

कौन से कानून लागू होते हैं?

भारत में चेक बाउंस के मामलों को नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट, 1881 की धारा 138, 139 और 142 के तहत निपटाया जाता है। अगर कोर्ट में दोषी पाया जाता है तो दो साल की सजा या जुर्माना या दोनों का प्रावधान है। लेकिन अंतिम फैसला आने तक जेल भेजना जरूरी नहीं है।

क्या यह अपराध जमानती है?

हां, सुप्रीम कोर्ट ने भी कहा है कि चेक बाउंस एक जमानती अपराध है। इसका मतलब यह है कि अगर आपके खिलाफ कोई केस दर्ज होता है तो आप गिरफ्तारी के बजाय जमानत पा सकते हैं और कोर्ट में अपना स्पष्टीकरण दे सकते हैं।

अंतरिम मुआवजा क्या है?

2019 के कानून संशोधन के अनुसार, कोर्ट आरोपी को शिकायतकर्ता को कुल राशि का 20% तक अंतरिम मुआवजा देने का निर्देश दे सकता है। अगर आरोपी बाद में केस जीत जाता है तो उसे यह पैसा वापस मिल सकता है। इससे शिकायतकर्ता को तुरंत राहत मिलती है और आरोपी को भी सुधरने का मौका मिलता है।

 

सुनील चौहान
About the Author सुनील चौहान

सुनील चौहान Best24News के संस्थापक एवं वरिष्ठ संपादक हैं। उन्हें रेवाड़ी, धारूहेड़ा और हरियाणा की स्थानीय पत्रकारिता का लगभग 10 वर्षों का अनुभव है। वे पहले दैनिक जागरण, राजस्थान पत्रिका, हरिभूमि और अमर उजाला जैसे समाचार संस्थानों से जुड़े रहे हैं। वे राजनीति, अपराध, प्रशासन, शिक्षा, रोजगार और स्थानीय जनसमस्याओं से जुड़ी खबरों के संपादन एवं प्रकाशन का कार्य करते हैं। उनका उद्देश्य पाठकों तक तथ्यात्मक, निष्पक्ष और विश्वसनीय समाचार पहुंचाना है। View all posts by सुनील चौहान →

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