मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026

अहंकार मनुष्य के पतन का कारण, किसी भी चीज का अहंकार नहीं करना चाहिए: बाबा उमाकांत महाराज

Written by: सुनील चौहान

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बावल(Best24News)  बाबा उमाकांत महाराज ने कहा कि जीवात्मा परमात्मा का अंश है और मूल रूप से निर्मल एवं स्वच्छ है। मन, बुद्धि, चित्त और अहंकार के प्रभाव में व्यक्ति से अच्छे-बुरे कर्म…


अहंकार मनुष्य के पतन का कारण, किसी भी चीज का अहंकार नहीं करना चाहिए: बाबा उमाकांत महाराज
अहंकार मनुष्य के पतन का कारण, किसी भी चीज का अहंकार नहीं करना चाहिए: बाबा उमाकांत महाराज
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बावल(Best24News)  बाबा उमाकांत महाराज ने कहा कि जीवात्मा परमात्मा का अंश है और मूल रूप से निर्मल एवं स्वच्छ है। मन, बुद्धि, चित्त और अहंकार के प्रभाव में व्यक्ति से अच्छे-बुरे कर्म होते हैं। गलत कर्मों के कारण समय के साथ आत्मा पर अज्ञानता और विकारों का प्रभाव बढ़ता जाता है।

कस्बा मे संत बाबा उमाकांत महाराज ने सत्संग में कहा कि इंसान को किसी भी चीज का अहंकार नहीं करना चाहिए। अहंकार मनुष्य के पतन का कारण बनता है और उसका नामोनिशान तक मिटा सकता है। उन्होंने कहा कि काम, क्रोध, लोभ और मोह पर विजय प्राप्त करने के बाद भी यदि अहंकार नहीं गया तो साधक आध्यात्मिक मार्ग पर आगे नहीं बढ़ सकता।

बाबा उमाकांत महाराज ने कहा कि साधना के दौरान यदि व्यक्ति को अपनी उपलब्धियों का अहंकार हो जाए तो वह ऊंचाई से नीचे गिर सकता है। इसलिए अहंकार को परछाई की तरह समझना चाहिए। उन्होंने कहा माया छाया एक सी, बिरला जाने कोई, भगता के पीछे फिरे, सम्मुख भागे सोई।

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कस्बे में आयोजित सत्संग में बाबा उमाकांत महाराज ने कहा कि संत परमात्मा से जुड़े होते हैं और उनके भीतर आध्यात्मिक शक्ति होती है। संतों की कृपा से कई बार अनहोनी टल सकती है। दुर्घटना, बीमारी या अन्य कारणों से आने वाले संकट का समय भी आगे बढ़ाया जा सकता है। इसी कारण संतों को धरती का सरताज कहा जाता है।

बाबा उमाकांत महाराज ने कहा गलत कर्मों के कारण समय के साथ आत्मा पर अज्ञानता और विकारों का प्रभाव बढ़ता जाता है। उन्होंने बताया कि गुरु महाराज की पावन स्मृति में बावल में मंदिर का निर्माण कराया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सच्चे संत के सत्संग से मनुष्य की अज्ञानता दूर होती है और उसे जीवन के वास्तविक उद्देश्य की जानकारी मिलती है। प्रभु की दया से ही मनुष्य को सत्संग सुनने का अवसर मिलता है।

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बाबा उमाकांत महाराज ने कहा कि साधना के दौरान यदि व्यक्ति को अपनी उपलब्धियों का अहंकार हो जाए तो वह ऊंचाई से नीचे गिर सकता है। इसलिए अहंकार को परछाई की तरह समझना चाहिए। उन्होंने कहा माया छाया एक सी, बिरला जाने कोई, भगता के पीछे फिरे, सम्मुख भागे सोई।
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उन्होंने समझाया कि माया से ही काम, क्रोध, लोभ और अहंकार जैसी प्रवृत्तियां पैदा होती हैं। व्यक्ति यदि माया को पाने के पीछे भागता रहेगा तो वह उससे दूर होती जाएगी। इसके विपरीत यदि वह अपने लक्ष्य की ओर बढ़ता रहे और अपना आचरण व खान-पान सही रखे तथा चरित्रवान बने तो लोग भी उसे पसंद करते हैं।

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सुनील चौहान
About the Author सुनील चौहान

सुनील चौहान Best24News के संस्थापक हैं। उन्होंने रेवाड़ी और हरियाणा के लोगों तक ताज़ा, सटीक और निष्पक्ष खबरें हिंदी में पहुँचाने के उद्देश्य से इस वेबसाइट की शुरुआत की। 2018 ये यह न्यूज पोर्टल जारी है। हर खबर तथ्यों की जाँच के बाद ही प्रकाशित की जाती है। View all posts by सुनील चौहान →

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