Rewari News: रेवाड़ी में बेसहारा गोवंशी की बढ़ती समस्या और हाल ही में गोवंशी के हमले से दो बुजुर्गों की मौत के बाद लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। लेकिन ये कोई नई बात नही हैं पहले भी कई गोवंशों से हादसे हो चुकी है उनको लेकर आजतक प्रशासन ने कुछ नहीं तो फिर अब क्या होगा भाई..
एक घंटे तक किया सांकेतिक धरना प्रदर्शन
विभिन्न सामाजिक एवं शहरवासियों ने शुक्रवार को राजीव चौक पर एक घंटे तक सांकेतिक धरना प्रदर्शन किया। बाद में लोगो ने प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए उपायुक्त को ज्ञापन सौंपकर जिम्मेदार अधिकारियों पर आपराधिक मुकदमा दर्ज करने मांग की। पहले भी कई बार ये मामल उठाये जा चुके है लेकिन कोई सुनवाई नही की जा रही है।

टेंडर राशि की जांच की उठी मांग
साफ जाहिर है डीएमसी से मिलकर गाय पकउने वाले केवल कागजों में अभियान चलाते है। सेक्टर चार में पहले भी कई ऐसी वारदात हो चुकी है। ऐसे में यह जांच जरूरी है कि गोवंश पकड़ने के लिए जारी किए गए टेंडरों में कितनी राशि खर्च हुई और वास्तव में कितने गोवंशी पकड़े गए। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के लिए कमेटी गठित करने तथा जांच में दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की।
संगठनों ने आरोप लगाया कि गोवंश को पकड़ने के लिए समय-समय पर टेंडर जारी किए जाते हैं और इनके माध्यम से बड़ी राशि खर्च की जाती है। इसके बावजूद धरातल पर स्थिति में कोई खास सुधार नजर नहीं आ रहा।गोवंश पकड़ने के टेंडरों में खर्च की जा रही राशि की जांच कराने की मांग की।

दूध निकालकर सड़क पर छोड़ देते है गाय, कार्रवाई क्यों नहीं
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि बेसहारा गोवंशी की समस्या के लिए केवल प्रशासन को जिम्मेदार ठहराना पर्याप्त नहीं है। ऐसे पशुपालकों पर भी सख्त कार्रवाई होनी चाहिए, जो गायों का दूध निकालने के बाद उन्हें सड़कों पर खुला छोड़ देते हैं। इतना नहीं पहले कई ऐसे मामले आए है जब गाय को पकडने तक गोपालक उन पर हमला कर देते हैं
मंगलवार को गोवंशी के हमले में सेवानिवृत्त कैप्टन सहित दो बुजुर्गों की मौत ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पिछले करीब पांच वर्षों में गोवंश के हमलों से जिले में पांच लोगों की जान जा चुकी है।
गोवंशी पकड़ने को लेकर शहरवासी पहले भी कई बार प्रदर्शन कर चुके हैं। प्रशासन की ओर से रेवाड़ी शहर को कैटल फ्री घोषित किया जा चुका है। संगठनों ने चेतावनी दी कि यदि एक सप्ताह में स्थायी समाधान नहीं किया गया और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन किया जाएगा।
गोवंशी के संरक्षण और उन्हें पकड़ने के नाम पर हर वर्ष लाखों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद सड़कों पर घूम रहे बेसहारा गोवंशी की संख्या कम होने के बजाय लगातार बढ़ रही है। शहर की मुख्य सड़कों, बाजारों और रिहायशी क्षेत्रों में जगह-जगह गोवंश के झुंड देखे जा सकते हैं । शहर में बेसहारा गोवंशी की समस्या कोई नई नहीं है। लेकिन समाधान नहीं किया जा रहा है।













