Haryana Crime: 44 किलो अफीम के साथ पकडा गया तस्कर बरी, पुलिस की कोर्ट में हुई किरकरी

On: March 16, 2026 6:07 PM
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Haryana Crime: हरियाणा के Ambala में एनडीपीएस एक्ट से जुड़े एक पुराने मामले में अदालत ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने अली हुसैन उर्फ नारू को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया है। सोमवार को अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश अरविंद कुमार बंसल की फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट ने यह निर्णय सुनाया। Haryana Crime

 

सुनाया फैसला,  Police की हुई किरकरी: अदालत ने स्पष्ट किया कि अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ कोई ठोस और स्वीकार्य साक्ष्य पेश किए गए, जिसके चलते उसे संदेह का लाभ देते हुए बरी किया गया। अदालत के इस आदेश से एक बार फिर पुलिस की किरकरी हो गई है।

जानिए कब का हैै मामला: बता दे ये यह मामला करीब 16 साल पुराना है, जिसकी सुनवाई लंबे समय से अदालत में चल रही थी। अदालत ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद पाया कि आरोपी के खिलाफ कोई ठोस सबूत पेश नहीं किया गया। इसी के चलते अदालत का ओर से उसे बरी करना पडा।

मामला कैसे सामने आया ?

बता दें कि ये घटना 22 मार्च 2009 की है। उस दिन अंबाला सिटी पुलिस ने सिविल अस्पताल के पास नाकाबंदी करके एक संदिग्ध कार को रोककर तलाशी ली। तलाशी के दौरान कार से करीब 44 किलोग्राम अफीम बरामद की गई थी। पुलिस ने अफीम जब्त कर कार में मौजूद तीन लोगों को गिरफ्तार कर लिया था तथा उनके खिलाफ मामला दर्ज किया था।

गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान आशुतोष उर्फ लकी, गुरमीत सिंह और बलजीत सिंह उर्फ कालू के रूप में हुई थी। पुलिस ने इन तीनों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू की। बाद में अदालत में सुनवाई के दौरान वर्ष 2011 में इन तीनों आरोपियों को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई गई थी।

जांच में सामने आया अली हुसैन का नाम ?

पुलिस जांच के दौरान गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ की गई थी। पूछताछ में आरोपियों ने अपने बयान में राजस्थान के जालवाड़ निवासी अली हुसैन उर्फ नारू का नाम लिया था। आरोपियों ने दावा किया था कि इस मामले में अली हुसैन की भी भूमिका है और उसने कथित तौर पर साजिश रची थी।

इसी आधार पर पुलिस ने अली हुसैन के खिलाफ भी मामला दर्ज कर लिया और उसे इस मामले में आरोपी बनाया गया। हालांकि जांच के दौरान पुलिस अली हुसैन के खिलाफ कोई प्रत्यक्ष साक्ष्य जुटाने में सफल नहीं हो पाई। न तो उसके पास से कोई बरामदगी हुई और न ही उसके खिलाफ ऐसा कोई ठोस दस्तावेजी सबूत सामने आया ।

 

फैसले में यह भी उल्लेख किया गया कि जांच एजेंसियां आरोपी अली हुसैन और पहले से दोषी ठहराए गए अन्य आरोपियों के बीच किसी प्रकार का कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) या पैसों के लेन-देन का कोई प्रमाण अदालत में पेश नहीं कर सकीं। ऐसे में यह साबित नहीं हो पाया कि अली हुसैन इस कथित साजिश में शामिल था या उसने अफीम की आपूर्ति की थी।

अदालत ने कहा कि जब तक किसी आरोपी के खिलाफ पुख्ता और भरोसेमंद साक्ष्य मौजूद न हों, तब तक उसे दोषी ठहराना न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ होगा। इसी आधार पर अदालत ने अली हुसैन को संदेह का लाभ देते हुए बरी करने का आदेश सुनाया।

 

Sunil Chauhan

सुनील चौहान हरियाणा के रेवाड़ी और धारूहेड़ा क्षेत्र की खबरों को कवर करते हैं। उन्हें पत्रकारिता में 10 साल का अनुभव है और वे सामाजिक, प्रशासनिक और स्थानीय मुद्दों पर रिपोर्टिंग करते हैं।

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