रोहतक हरियाणा राज्य में क्षेत्रीय सिनेमा और स्वतंत्र Film निर्माताओं के लिए एक नया अवसर खुलने जा रहा है। दादा लखमीचंद राज्य प्रदर्शन एवं दृश्य कला विश्वविद्यालय (डीएलसी सुपवा) के कुलपति डॉ. अमित आर्य ने घोषणा की है कि विश्वविद्यालय में हर साल हरियाणा फिल्म फेस्टिवल आयोजित किया जाएगा। यह पहल मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी द्वारा वर्ष 2026-27 के राज्य बजट में की गई घोषणा के तहत की जाएगी।
इस फिल्म फेस्टिवल के आयोजन में हरियाणा के कला एवं संस्कृति विभाग की भी सहयोगी भूमिका होगी। राज्य के इतिहास में यह पहला मौका है जब सरकारी स्तर पर फिल्म फेस्टिवल का आयोजन किया जाएगा। अब तक हरियाणा में फिल्म उत्सव केवल निजी संस्थाओं या फिल्म संस्थानों की पहल पर आयोजित होते रहे हैं, लेकिन इस नए प्रयास से सरकार सीधे तौर पर कलाकारों और फिल्म निर्माताओं को एक मंच उपलब्ध कराएगी।
नए प्लेटफॉर्म से मिलेगा क्षेत्रीय सिनेमा को बढ़ावा
कुलपति डॉ. अमित आर्य ने बताया कि फिल्म फेस्टिवल का उद्देश्य क्षेत्रीय सिनेमा, स्वतंत्र फिल्म निर्माताओं, छात्रों और डॉक्यूमेंट्री क्रिएटर्स को एक नया मंच प्रदान करना है। इससे न केवल स्थानीय प्रतिभाओं को अवसर मिलेगा, बल्कि हरियाणा की सांस्कृतिक पहचान को बढ़ावा भी मिलेगा। इस पहल से फिल्म उद्योग में नए विचार और रचनात्मक प्रयोग को प्रोत्साहन मिलेगा।
सुपवा देश का पहला विश्वविद्यालय है जहाँ अभिनय, निर्देशन, सिनेमेटोग्राफी, एडिटिंग और ऑडियोग्राफी जैसे विषयों में डिग्री कोर्स चलाए जाते हैं। ऐसे में यह विश्वविद्यालय फिल्म फेस्टिवल के लिए एक उपयुक्त मंच साबित होगा। विश्वविद्यालय के छात्रों और युवा फिल्म निर्माताओं को न केवल अनुभव मिलेगा, बल्कि उनके काम को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलने की संभावना भी बढ़ जाएगी। फिल्म फेस्टिवल के आयोजन से विश्वविद्यालय के छात्रों को प्रायोगिक अनुभव और नेटवर्किंग के अवसर मिलेंगे। युवा फिल्म निर्माताओं और छात्र क्रिएटर्स को अपने काम को पेश करने, आलोचनात्मक प्रतिक्रिया प्राप्त करने और पेशेवरों के मार्गदर्शन में सीखने का मौका मिलेगा। यह पहल हरियाणा के युवा प्रतिभाओं को अपनी कला और तकनीकी कौशल को निखारने में मदद करेगी। इसके अलावा, यह फिल्म फेस्टिवल क्षेत्रीय भाषाओं और स्थानीय कहानियों को भी प्रमुखता देगा। इससे दर्शकों को हरियाणा की सांस्कृतिक विविधता और स्थानीय मुद्दों को समझने का मौका मिलेगा। स्वतंत्र फिल्म निर्माताओं को अपनी रचनात्मक कहानियों को प्रस्तुत करने के लिए एक सम्मानजनक और सरकारी स्तर का मंच मिलेगा।
हरियाणा का सांस्कृतिक और फिल्म उद्योग में योगदान
हरियाणा में फिल्म फेस्टिवल की यह पहल राज्य की सांस्कृतिक नीति को भी मजबूती देगी। यह न केवल फिल्मों के माध्यम से समाज और संस्कृति को प्रतिबिंबित करेगा, बल्कि फिल्म उद्योग में रोजगार और नवाचार को भी बढ़ावा देगा। फिल्म फेस्टिवल के माध्यम से युवा क्रिएटर्स को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान मिलने की संभावना भी बढ़ जाएगी। कुलपति डॉ. अमित आर्य ने कहा कि फिल्म फेस्टिवल हरियाणा के लिए एक नया अध्याय होगा। यह राज्य की सांस्कृतिक गतिविधियों और फिल्म निर्माण में सरकारी समर्थन का प्रतीक है। इस पहल से राज्य के कलाकारों, छात्रों और स्वतंत्र फिल्म निर्माताओं को नई प्रेरणा मिलेगी और उन्हें अपने कौशल को प्रदर्शित करने का मंच मिलेगा।
हरियाणा में फिल्म फेस्टिवल से नई उम्मीद
हरियाणा फिल्म फेस्टिवल न केवल राज्य के फिल्म उद्योग को विकसित करेगा, बल्कि स्थानीय संस्कृति, भाषा और कला को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच पर उजागर करने का अवसर भी देगा। यह पहल हरियाणा के फिल्म निर्माताओं, छात्रों और युवा क्रिएटर्स के लिए सपनों को साकार करने का एक महत्वपूर्ण रास्ता होगी। डीएलसी सुपवा और कला एवं संस्कृति विभाग के सहयोग से यह फिल्म फेस्टिवल हरियाणा में सिनेमा और कला के क्षेत्र में नई उम्मीद और ऊर्जा भरने वाला कार्यक्रम साबित होगा। इससे राज्य के कलाकारों और युवा प्रतिभाओं को अपनी पहचान बनाने और सांस्कृतिक योगदान देने का मौका मिलेगा।

















