Hidden Hill Station: अगर आप दिल्ली की भागदौड़, ट्रैफिक और तेज गर्मी से परेशान हैं और एक ऐसी जगह चाहते हैं जहां सिर्फ हरियाली, ठंडी हवाएं और पक्षियों की चहचहाहट हो, तो आपके लिए पंगोट एक परफेक्ट ऑप्शन है. उत्तराखंड के कुमाऊं क्षेत्र में बसा यह छोटा-सा गांव दिल्ली से सिर्फ 331 किमी दूर है, जो अब धीरे-धीरे ट्रेवलर्स की लिस्ट में जगह बना रहा है.
पंगोट
नैनीताल से मात्र 13 किमी दूर स्थित पंगोट एक शांत, भीड़-भाड़ से दूर और सुकून देने वाला हिल स्टेशन है. यहां के घने ओक, पाइन और रोडोडेंड्रोन के जंगल, बर्फ से ढके हिमालय के दृश्य और 580 से अधिक पक्षियों की प्रजातियां इसे पक्षी प्रेमियों और ट्रेकिंग के शौकीनों का पसंदीदा बनाती हैं. मार्च-अप्रैल में खिलते रोडोडेंड्रोन और सर्दियों की बर्फबारी, पंगोट को स्वर्ग बना देते हैं.

दिल्ली से पंगोट कैसे पहुंचें? जानें हर तरीका
बस से यात्रा
दिल्ली से काठगोदाम या नैनीताल तक रात की AC बस उपलब्ध (6-7 घंटे की यात्रा).
टिकट खर्च: ₹600-₹800 प्रति व्यक्ति
काठगोदाम से पंगोट (20 किमी) तक टैक्सी/लोकल बस ₹300-₹600
कुल एक तरफ बस यात्रा खर्च: ₹900-₹1400
राउंड ट्रिप खर्च: ₹1800-₹2800 प्रति व्यक्ति
ट्रेन से यात्रा
काठगोदाम शताब्दी एक्सप्रेस सुबह 6:20 बजे दिल्ली से चलकर 11:40 बजे पहुंचती है
स्लीपर किराया: ₹300-₹500 | AC चेयर कार: ₹700-₹900
काठगोदाम से पंगोट टैक्सी खर्च: ₹300-₹500
ट्रेन यात्रा का कुल खर्च (एक तरफ): ₹600-₹1400
राउंड ट्रिप: ₹1200-₹2800 प्रति व्यक्ति
कार से जाएं तो रूट और खर्च
रूट: दिल्ली – हापुड़ – मुरादाबाद – हल्द्वानी – नैनीताल – पंगोट
टोल और फ्यूल खर्च: ₹4000-₹6000 (राउंड ट्रिप)
यात्रा समय: 7-8 घंटे
3 दिन-2 रात का ट्रिप प्लान
दिन 1

रात की बस या ट्रेन से काठगोदाम पहुंचें
सुबह पंगोट पहुंचे और होटल/हॉस्टल में चेक-इन करें
दोपहर में किलबरी ट्रेक (8 किमी) करें और बर्डवॉचिंग का मजा लें
शाम को स्नो व्यू पॉइंट से हिमालय के बर्फीले दृश्य देखें
कनातल
छुपे हुए खूबसूरत हिल स्टेशनों की तलाश में हैं तो उत्तराखंड के कनातल हिल स्टेशन के सफर पर जा सकते हैं। यहां सीमित सैलानी आते हैं, इसलिए प्राकृतिक नजारों का लुत्फ उठाने के साथ ही भीड़ भाड़ से दूर सुकून का वक्त बिता सकते हैं। कनातल में कैंपिंग, ट्रैकिंग कर सकते हैं। यह हिल स्टेशन देहरादून से 78 किमी दूर है। मसूरी से 38 किमी और चंबा से 12 किमी दूर इस हिल स्टेशन पर पहुंचना भी आसान है।
कैसे पहुंचें
कनातल हिल स्टेशन की सैर के लिए देहरादून रेलवे स्टेशन से आगे का सफर बस से कर सकते हैं। अगर मसूरी या चंबा में है तो भी टैक्सी या स्थानीय बस आपको कनातल की सैर करा सकती हैं।
दिन 2
सुबह गुआनो हिल्स में नेचर वॉक करें
दोपहर में नैनीताल की डे ट्रिप (13 किमी दूर): नैना देवी मंदिर, नैनी झील में बोटिंग
रात को पंगोट वापस लौटें
दिन 3
सुबह ब्रह्मस्थली ट्रेक (2 किमी)
दोपहर में चेक-आउट और दिल्ली के लिए वापसी
कहां ठहरें? बजट में बेहतरीन ऑप्शन
पंगोट में सीमित होटल और हॉस्टल हैं. इसलिए एडवांस बुकिंग जरूरी है.
बजट हॉस्टल: ₹500-₹800 प्रति रात
तीन दिन की ट्रिप में रहने का कुल खर्च: ₹1000-₹1600
4700 रुपये में हो सकती है शानदार ट्रिप
अगर आप स्मार्टली ट्रिप प्लान करें तो ट्रांसपोर्ट, स्टे और खाने का कुल खर्च ₹4700 के अंदर रखा जा सकता है.
यह ट्रिप खासकर बैकपैकर्स, कपल्स और प्रकृति प्रेमियों के लिए एक बेहतरीन अनुभव है.

क्यों पंगोट है खास?
स्थानीय लोगों का गर्मजोशी भरा स्वागत
कम भीड़, ज्यादा सुकून
डिजिटल डिटॉक्स का मौका – मोबाइल नेटवर्क कमजोर होने से सोशल मीडिया से छुट्टी
कुमाऊंनी संस्कृति और भोजन का अनोखा स्वाद – जैसे भट्ट की चुरकानी
कलगा गांव
ट्रैकिंग के शौकीन हैं तो कलगा गांव का रुख करें। कलगा-बुनबुनी-खीरगंगा ट्रैक बेहतर विकल्प हो सकता है। इस 28 किमी लंबे ट्रैक को पूरा करने में तीन दिन का वक्त लग सकता है। कलगा गांव और ट्रैक हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले में पार्वती घाटी में पुलगा डैम के पास स्थित है।
ट्रैकिंग के अलावा यहां पहाड़ी की चोटी से मणिकर्ण घाटी का अद्भुत नजारा दिखता है। सूर्यास्त का दृश्य तो बहुत ही मनमोहक होता है।
कैसे पहुंचे कलगा
कुल्लू जिले के भुंतर तक सड़क व हवाई मार्ग से पहुंचें। हवाई अड्डे से 25 किलोमीटर की दूरी पर मणिकर्ण है, जहां के लिए बस या टैक्सी आसानी से मिल जाती हैं। मणिकर्ण से 10 किमी दूर कलगा गांव है, जहां से ट्रैक की शुरुआत होती है।














