गुरूवार, 8 अक्टूबर 2026

एशियन गेम्स में गोल्ड जीतने वाले कमलजीत का भारत लौटने पर जोरदार स्वागत

Written by: सुनील चौहान

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रेवाड़ी। गांवों में प्रतिभाओ की कमी नहीं है। हाल ही में एशियन गेम्स में गोल्ड मेडल जीतकर देश और क्षेत्र का नाम रोशन करके अपने गांव सुलखा लौटे कमलजीत ने ये साबित…


अवार्ड जीतकर भारत लौटने पर एयरपोर्ट पर गोल्ड मेडल्स्टि कमलजीत का स्वागत किया गया।
अवार्ड जीतकर भारत लौटने पर एयरपोर्ट पर गोल्ड मेडल्स्टि कमलजीत का स्वागत किया गया।
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रेवाड़ी। गांवों में प्रतिभाओ की कमी नहीं है। हाल ही में एशियन गेम्स में गोल्ड मेडल जीतकर देश और क्षेत्र का नाम रोशन करके अपने गांव सुलखा लौटे कमलजीत ने ये साबित कर दिया है। अवार्ड जीतकर भारत लौटने पर एयरपोर्ट पर गोल्ड मेडल्स्टि कमलजीत का स्वागत किया गया। उसके चाहने वालों ने एयरपोर्ट पहुंचकर फूल-मालाओं के साथ उनका स्वागत किया और उपलब्धि पर खुशी जताई।

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हादसे के बावजूद नहीं मानी हार: कहते है अक्सर लोग ​परेशानियो से झूजते हुए खेलों से दूर ही जाते है। लेकिन रेवाड़ी की मिट्टी ने कई ऐसा लाल दिए है जिससे हादसे यानि प​रेशानियों से सबके लेते नया मुकाम हासिल किया है। कमलजीत की तरह धारूहेड़ा पूजा यादव ने कई बार अवार्ड जीतकर जिले का नाम रोशन किया था।

हरियाणा के जिला रेवाड़ी के कमलजीत और झज्जर की सुरुचि ने जोड़ी ने 10 मीटर एयर पिस्टल के मिक्स्ड टीम इवेंट में शानदार प्रदर्शन करते हुए देश की झोली में दूसरा गोल्ड डाल दिया
हरियाणा के जिला रेवाड़ी के कमलजीत और झज्जर की सुरुचि ने जोड़ी ने 10 मीटर एयर पिस्टल के मिक्स्ड टीम इवेंट में शानदार प्रदर्शन करते हुए देश की झोली में दूसरा गोल्ड डाल दिया

पैर टूटा फिर भी अभ्यास जारी: बता दे कि कमलजीत का सफर आसान नहीं रहा। वर्ष 2019 में वह गांव सुलखा से रेवाड़ी कोचिंग के लिए टैंपो से जा रहे थे। इसी दौरान टैंपो का सड़क हादसा हो गया। हादसे में दो लोगों की मौत हो गई थी, जबकि कमलजीत गंभीर रूप से घायल हो गए थे और उनका पैर टूट गया था। इसके बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और निशानेबाजी का अभ्यास जारी रखा। बताया गया कि बिस्तर पर रहने के दौरान भी उन्होंने अभ्यास नहीं छोड़ा।

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आर्थिक स्थिति से भी किया मजबूर: हादसे के बाद कमलजीत के परिवार के सामने इलाज के साथ खेल के उपकरण और प्रशिक्षण का खर्च उठाने की चुनौती भी थी। उनके पिता रतीराम फैक्ट्री में काम करते हैं और परिवार की आर्थिक स्थिति सीमित है। परिवार ने इलाज और निशानेबाजी से जुड़े खर्च के लिए कर्ज भी लिया, लेकिन कमलजीत के खेल को जारी रखने में पूरा सहयोग किया।

हादसे के करीब 20 दिन बाद ही कमलजीत ने ट्रायल दिया और सफल रहे। इसके बाद उन्होंने लगातार मेहनत करते हुए निशानेबाजी में बेहतर प्रदर्शन किया। उन्होंने जूनियर विश्व चैंपियनशिप और विश्व कप स्तर पर पदक जीतकर राष्ट्रीय टीम में जगह बनाई।

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50 मीटर पिस्टल से शुरू किया सफर
कमलजीत ने शूटिंग में शुरुआत 50 मीटर पिस्टल से की थी। इसके बाद उन्होंने 10 मीटर एयर पिस्टल की बारीकियां सीखीं और इसी स्पर्धा में पहचान बनाई। 2023 में उन्होंने आईएसएसएफ जूनियर विश्व चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीता। इसके बाद एशियाई चैंपियनशिप में रजत पदक हासिल किया।

सुनील चौहान
About the Author सुनील चौहान

सुनील चौहान Best24News के संस्थापक हैं। उन्होंने रेवाड़ी और हरियाणा के लोगों तक ताज़ा, सटीक और निष्पक्ष खबरें हिंदी में पहुँचाने के उद्देश्य से इस वेबसाइट की शुरुआत की। 2018 ये यह न्यूज पोर्टल जारी है। हर खबर तथ्यों की जाँच के बाद ही प्रकाशित की जाती है। View all posts by सुनील चौहान →

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