Hero MotoCorp Dharuhera: धारूहेड़ा: याद करों वो कुर्बानी जब चल रही थी पुलिस की लाठिया….. दिल्ली जयपुर हाईवे स्थित Hero MotoCorp के धारूहेड़ा प्लांट किसी परिचय का मोहताज नहीं है। पिछले करीब 35 सालो देश में नंबर वन का खिताब लेने वाली कपंनी को भला कौन नहीं जानता है। लेकिन यहां पर 21 मार्च अपने आप एक एतिहासिक दिन है। पता नहीं कितने लोगो यादे व यातनाएं इस दिन से जुडी हुई है। आइए जानते है इस दिन को क्यों धारूहेड़ा में हीरो कंपनी एतिहासिक के रूप में मनाते है ऐसा क्या कारण है जिसे आज के नवयुवक नहीं जानते।Hero MotoCorp Dharuhera
देश की नवंबर वन बाइक प्लाट: बता दे कि Hero MotoCorp के धारूहेड़ा प्लांट में दस से ज्यादा तरह की बाइक बनाई जाती है। यहां पर दस हजार से ज्यादा कर्मचारी कार्यरत है। मदर प्लाट हरियाणा में होंडा व हीरो के सयुंक्त में 1985 में संचालित हुआ था। कर्मचारियों के हकों के लिए किए संघर्ष के बाद हई जीत की याद में यहां कर्मचारी यूनियन स्थापित की गई।
मजदूरों पर चली थी लाठियां: इसी दिन काफी लोगो को यातनाएं सहन करनी पडी इसी लिए इस दिन को मजूदर स्थापना दिवस के नाम से जाना जाता है। कहने का अर्थ है मजदूरो को अपने हक मांगने की आवाज उठाने के एक सामूहिक संगठन आज के दिन ही बनाया गया था।

एतिहासिक दिवस को भला कोन भूल सकता है: जिन कर्मचारियो ने अपना हक पाने की पुलिस की लाठिया झेली जेल काटी, भूखे प्यासे संघर्ष् करते रहे भला उस समय को कौन भूल सकता हैंं। बता दें कि यूनियन दिवस के अवसर पर कर्मचारियों की एकजुटता और संगठन की ताकत को प्रदर्शित करने के लिए सांस्कृतिक और जागरूकता कार्यक्रम भी आयोजित किए जाने की संभावना है, जिससे कर्मचारियों के बीच आपसी सहयोग और बेहतर तालमेल को बढ़ावा मिल सके। इस बार रागिनी कलाकार सुरेश गोला की टीम यूनियन दिवस पर पहुंच रही है।
पुरानी यादो का संगम है ये दिवस: 1985 में कपनी में जैसे जैसे उत्पादन में ग्रोथ हुई तो कर्मचारियो पर उनके हकों को दबाना शुरू कर दिया था यू समझें अत्याचार बढ गया था। इतना ही नहीं कंपनी में कर्मचारियों पर अत्याचार बढ गया था उस समय कर्मचारियों ने एकता का परिचय देते हुए अपने हकों के लिए एक संगठन बनाया तो उसे समय इस संगठन का नाम हीरो होंडा कर्मचारी यूनियन रखा गया था। चुंकि यूनियन की स्थापना 21 मार्च को हुई थी इसी को लेकर हर साल 21 मार्च को स्थापना दिवस के रूप में मनाया जाता है।

रूह कांप उठती है उस समय को याद करके: कर्मचारी से सेवानिवृत हुए कर्मचारियो ने बताया कि कंपनी में यूनियन बनाना कोई आसान काम नहीं था। उस समय के यादो जानकर रूह कांप उठती है। कितने दिन पर भूखे प्यासे संघर्ष किया था। जहां पर कर्मचारी मिलता पुलिस उसे पकड पर पिटाई करती थी ओर जेल में डाल देते थे। कितने कर्मचारियों ने पुलिस की लाठी डंडे खाए थे कई कर्मचारियो को जेल की सजा तक भुगतनी पडी थी काफी संघर्ष के बाद कर्मचारियों की एकता के चलते 1987 में यूनियन बन पाई थी। उसी दिन से 21 मार्च को स्थापना दिवस मनाया जाता है।Hero MotoCorp Dharuhera
एनसीआर की बनी ताकत: उस समय में धारूहेड़ा कर्मचारियों को संघर्ष् एनसीआर की ओए एक बडी मिशाल बन गया है। चूंकि उस समय इनता बडा कोई आस पास प्लांट नही था वहीं कर्मचारियो की आवाज उठाने के लिए कोई भी संगठन आगे नहीं आता था। कुछ दिन तक विवाद चलता ओर मेनेजमैन उन कर्मचारियों को बाहर करके मामले दबा देते है। धारूहेड़ा में कई ऐसे कारखाने है जिनमें मजूदरो की आवाज को दफन कर दिया है। इसी के चलते एनसीआर मे हीरो मकर्मियो का वह संघर्ष किसी यादगार से कम नही है।

















