Haryana News: हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने बुधवार को ऐसा काम किया जिसकी चर्चा पूरे प्रदेश में हो रही है। लाडवा-बाबैन मार्ग से गुजरते समय उनकी नजर सड़क हादसे में घायल दो युवकों पर पड़ी। हालात को देखते हुए मुख्यमंत्री ने तुरंत अपना काफिला रुकवाया और घायलों को तत्काल चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।Haryana News
अचानक दिखा हादसा, मुख्यमंत्री ने तुरंत लिया बड़ा फैसला
बताया जा रहा है कि दो युवक मोटरसाइकिल दुर्घटना में घायल होकर सड़क किनारे पड़े थे। मुख्यमंत्री का काफिला जैसे ही वहां पहुंचा, उन्होंने बिना समय गंवाए स्थिति का जायजा लिया। मौके पर मौजूद सुरक्षा कर्मियों और मेडिकल टीम को तुरंत सक्रिय कर दिया गया ताकि घायलों को जल्द से जल्द उपचार मिल सके।
काफिले की एंबुलेंस बनी जीवन रक्षक, अस्पताल पहुंचाए गए घायल
मुख्यमंत्री ने अपने काफिले के साथ चल रही एडवांस लाइफ सपोर्ट एंबुलेंस को घायलों की मदद के लिए लगाया। प्राथमिक उपचार देने के बाद दोनों युवकों को अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनका इलाज जारी है। समय पर मिली मदद के कारण स्थिति को नियंत्रित करने में आसानी हुई।
घायलों से की बातचीत, जाना स्वास्थ्य का हाल
मुख्यमंत्री ने केवल निर्देश देकर जिम्मेदारी पूरी नहीं की, बल्कि घायलों का हालचाल भी जाना। उन्होंने चिकित्सकों से बेहतर इलाज सुनिश्चित करने को कहा और युवकों के जल्द स्वस्थ होने की कामना की।
‘संकट में मदद करना ही सबसे बड़ी जिम्मेदारी’
मुख्यमंत्री ने कहा कि सड़क हादसे में घायल व्यक्ति को समय पर सहायता मिलना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि किसी भी जरूरतमंद को मुश्किल में देखकर मदद करना केवल प्रशासनिक नहीं बल्कि मानवीय जिम्मेदारी भी है।
विधायकों और अधिकारियों को दिए खास निर्देश
इस घटना के बाद मुख्यमंत्री ने जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों को भी आपातकालीन परिस्थितियों के लिए तैयार रहने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि जहां संभव हो, वहां चिकित्सा सहायता की व्यवस्था साथ रखी जाए ताकि जरूरत पड़ने पर तुरंत राहत पहुंचाई जा सके।
गोल्डन ऑवर का महत्व समझाया
मुख्यमंत्री ने लोगों से अपील करते हुए कहा कि सड़क दुर्घटना के बाद शुरुआती एक घंटा बेहद महत्वपूर्ण होता है। इस दौरान घायल को अस्पताल पहुंचाने से उसकी जान बचने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है।
प्रदेशभर में हो रही सराहना
मुख्यमंत्री नायब सैनी की इस मानवीय पहल की सोशल मीडिया से लेकर स्थानीय स्तर तक चर्चा हो रही है। लोगों का कहना है कि पद की जिम्मेदारियों के बीच मानवीय संवेदनाओं को प्राथमिकता देना समाज के लिए प्रेरणादायक संदेश है।













