Haryana News: हरियाणा पुलिस भर्ती में फंसे उम्मीदवारों के लिए राहत, हाई कोर्ट ने 2 हफ्ते में जॉइनिंग लेटर देने का आदेश

On: March 21, 2026 8:34 PM
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Haryana News: हरियाणा पुलिस भर्ती में फंसे उम्मीदवारों के लिए राहत, हाई कोर्ट ने 2 हफ्ते में जॉइनिंग लेटर देने का आदेश

Haryana News: पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने एक मामले में साफ किया है कि किसी उम्मीदवार को सिर्फ 30 दिन के भीतर जॉइन न करने के आधार पर नौकरी से वंचित नहीं किया जा सकता, खासकर जब देरी उसके नियंत्रण से बाहर हो। जस्टिस जगमोहन बंसल ने याची हर्ष रावल की नियुक्ति अस्वीकार करने के आदेश को रद्द कर दिया और हरियाणा सरकार को दो हफ्ते के अंदर नियुक्ति पत्र जारी करने का निर्देश दिया।

हाई कोर्ट ने कहा कि हरियाणा में लागू पंजाब पुलिस नियम इस तरह के मामलों के लिए पर्याप्त मार्गदर्शन देते हैं। इनमें 30 दिन की कठोर सीमा नहीं है। जस्टिस बंसल ने स्पष्ट किया कि नौकरी के मौके देश में सीमित हैं और किसी उम्मीदवार को सिर्फ प्रक्रिया में देरी या तकनीकी कारणों से नियुक्ति से वंचित करना उचित नहीं है। कोर्ट ने कहा कि निर्देशों को कठोर नियम की तरह नहीं, बल्कि व्यावहारिक दृष्टिकोण से देखा जाना चाहिए।

कोर्ट ने हरियाणा पुलिस विभाग को आदेश दिया कि वे दो हफ्ते के अंदर हर्ष रावल को जॉइनिंग लेटर जारी करें और उन्हें सेवा में शामिल होने दें, बशर्ते वे अन्य आवश्यक फॉर्मेलिटी पूरी करें। कोर्ट ने यह भी कहा कि प्रशासनिक निर्देश कोर्ट पर बाध्यकारी नहीं होते, बल्कि न्याय और निष्पक्षता सर्वोपरि है।

याची हर्ष रावल ने बताया कि उन्होंने हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग (HSSC) द्वारा 28 जून 2024 को जारी विज्ञापन के तहत कांस्टेबल पद के लिए आवेदन किया था। उन्होंने कॉमन एलिजिबिलिटी टेस्ट, फिजिकल टेस्ट और स्क्रीनिंग टेस्ट सभी सफलतापूर्वक पूरे किए। 17 अक्टूबर 2024 को परिणाम घोषित हुआ और 20 नवंबर 2024 को उन्हें जॉइनिंग के लिए लेटर भेजा गया।

इस बीच उनके गांव में राजनीतिक गुटबाजी के चलते झगड़ा हुआ, जिसमें दो एफआईआर दर्ज हुईं। हर्ष रावल न्यायिक हिरासत में चले गए। बाद में मामला सुलझा और हाई कोर्ट ने 19 मई 2025 को उनके विरुद्ध दर्ज एफआईआर रद्द कर दी।

हालांकि जिला पुलिस अधीक्षक ने 8 सितंबर 2025 को जॉइनिंग की मांग ठुकरा दी थी, यह कहते हुए कि सरकारी निर्देशों के मुताबिक 30 दिन से ज्यादा विलंब स्वीकार नहीं किया जा सकता। हाई कोर्ट ने इसे अस्वीकार कर कहा कि ये सरकारी निर्देश सिर्फ दिशा-निर्देश हैं, उन्हें यांत्रिक रूप से लागू नहीं किया जा सकता।

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