शुक्रवार, 6 नवम्बर 2026

प्राइवेट स्कूल के तर्ज पर विकसित होंगे रेवाड़ी सहित इन जिलों के सरकारी स्कूल, जानें क्या होगा बदलाव

Written by: सुनील चौहान

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रेवाड़ी:    हरियाणा सरकार सरकारी स्कूलों के बुनियादी ढांचे को आधुनिक तकनीक से जोड़ने की दिशा में बड़ा कदम उठा रही है। अब प्रदेश के सभी सरकारी विद्यालयों का डिजिटल ब्लूप्रिंट तैयार…


प्राइवेट स्कूल के तर्ज पर विकसित होंगे रेवाड़ी सहित इन जिलों के सरकारी स्कूल
प्राइवेट स्कूल के तर्ज पर विकसित होंगे रेवाड़ी सहित इन जिलों के सरकारी स्कूल
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रेवाड़ी:    हरियाणा सरकार सरकारी स्कूलों के बुनियादी ढांचे को आधुनिक तकनीक से जोड़ने की दिशा में बड़ा कदम उठा रही है। अब प्रदेश के सभी सरकारी विद्यालयों का डिजिटल ब्लूप्रिंट तैयार किया जाएगा। इस पहल के तहत स्कूल परिसर के प्रत्येक हिस्से का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार होगा, जिससे भविष्य में विकास कार्यों की योजना बनाना पहले से कहीं अधिक आसान और तेज हो जाएगा।

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हर स्कूल का तैयार होगा डिजिटल लेआउट

हरियाणा स्कूल शिक्षा परियोजना परिषद (HSSPP) ने सभी जिलों को निर्देश दिए हैं कि सरकारी स्कूलों का विस्तृत लेआउट प्लान तैयार कराया जाए। इसमें भवन, कक्ष, प्रयोगशालाएं, शौचालय, खेल मैदान, बाउंड्रीवाल, मुख्य प्रवेश द्वार और खाली भूमि सहित पूरे परिसर की डिजिटल मैपिंग की जाएगी। यह कार्य आर्किटेक्ट की सहायता से AutoCAD सॉफ्टवेयर पर किया जाएगा।

निर्माण और मरम्मत की योजना होगी ज्यादा सटीक

डिजिटल ब्लूप्रिंट तैयार होने के बाद शिक्षा विभाग को यह जानकारी तुरंत मिल सकेगी कि किस स्कूल में अतिरिक्त कमरों, प्रयोगशालाओं, शौचालयों या अन्य सुविधाओं की आवश्यकता है। इससे बजट स्वीकृत करने, नई परियोजनाएं शुरू करने और मरम्मत कार्यों में होने वाली देरी काफी हद तक कम हो सकेगी।

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ऑनलाइन उपलब्ध रहेगा हर स्कूल का पूरा रिकॉर्ड

इस परियोजना के पूरा होने के बाद प्रत्येक सरकारी स्कूल का डिजिटल नक्शा ऑनलाइन उपलब्ध रहेगा। इससे अधिकारियों को किसी भी स्कूल की मौजूदा स्थिति का आकलन करने के लिए बार-बार मौके पर सर्वे कराने की जरूरत नहीं पड़ेगी। साथ ही पूरे प्रदेश के सरकारी स्कूलों का एकीकृत डिजिटल डेटाबेस भी तैयार हो जाएगा।

तकनीकी कार्यों के लिए तय की गईं मानक दरें

शिक्षा विभाग ने इस परियोजना से जुड़े विभिन्न तकनीकी कार्यों के लिए मानक दरें भी निर्धारित की हैं। इनमें स्ट्रक्चरल डिजाइन, सिविल एस्टीमेट, इलेक्ट्रिकल एवं पब्लिक हेल्थ प्लान, ऑटोकैड ट्रेसिंग, ड्राइंग प्रिंट, स्टील एवं बार बेंडिंग शेड्यूल, बाउंड्रीवाल प्लान और साइट सर्वे जैसे कार्य शामिल हैं। आवश्यकता पड़ने पर नए भवन निर्माण से पहले जियोटेक्निकल जांच भी कराई जाएगी।

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पिछले अनुभवों से मिली सीख, अब पहले होगी तैयारी

पिछले कुछ वर्षों में कई सरकारी स्कूलों में जर्जर भवनों और बारिश के दौरान जलभराव जैसी समस्याएं सामने आई थीं। इन घटनाओं के बाद शिक्षा विभाग ने स्कूलों के बुनियादी ढांचे की बेहतर निगरानी और समय पर सुधार सुनिश्चित करने के लिए डिजिटल ब्लूप्रिंट तैयार करने का फैसला लिया है।नई व्यवस्था लागू होने के बाद विभाग आसानी से यह पहचान सकेगा कि किस सरकारी स्कूल में कौन-सी बुनियादी सुविधा का अभाव है। इससे जरूरत के अनुसार बजट जारी करने और विकास कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर पूरा करने में मदद मिलेगी। अधिकारियों का मानना है कि यह पहल सरकारी स्कूलों के इंफ्रास्ट्रक्चर को अधिक व्यवस्थित, पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाने की दिशा में अहम साबित होगी।

सुनील चौहान
About the Author सुनील चौहान

सुनील चौहान Best24News के संस्थापक एवं वरिष्ठ संपादक हैं। उन्हें रेवाड़ी, धारूहेड़ा और हरियाणा की स्थानीय पत्रकारिता का लगभग 10 वर्षों का अनुभव है। वे पहले दैनिक जागरण, राजस्थान पत्रिका, हरिभूमि और अमर उजाला जैसे समाचार संस्थानों से जुड़े रहे हैं। वे राजनीति, अपराध, प्रशासन, शिक्षा, रोजगार और स्थानीय जनसमस्याओं से जुड़ी खबरों के संपादन एवं प्रकाशन का कार्य करते हैं। उनका उद्देश्य पाठकों तक तथ्यात्मक, निष्पक्ष और विश्वसनीय समाचार पहुंचाना है। View all posts by सुनील चौहान →

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