रेवाड़ी: शिक्षा और संस्कारों की छांव देने वाले गुरुओं के सम्मान में रेवाड़ी में एक बेहद अनूठी और भावुक कर देने वाली पहल देखने को मिली। करीब दो दशक (20 वर्ष) पहले गांव बोड़िया कमालपुर के सरकारी स्कूल से शिक्षा प्राप्त कर चुके पूर्व विद्यार्थियों ने शहर के बीएमजी (BMG) मॉल के सभागार में एक भव्य ‘गुरु-वंदन’ कार्यक्रम का आयोजन किया।
कार्यक्रम में लोग हुए भावविभोर
लंबे अरसे बाद जब गुरु और शिष्य एक-दूसरे से मिले, तो माहौल बेहद भावुक हो गया। इस मिलन समारोह में जहाँ सभी ने अपने स्कूल के दिनों की अनमोल और खट्टी-मीठी स्मृतियों को ताजा किया, वहीं रोचक संस्मरणों, मधुर गीतों, रागनी, भजनों और कविताओं के माध्यम से कार्यक्रम में उपस्थित सभी लोगों को भावविभोर कर दिया।
स्कूल परिसर में हर साल कार्यक्रम करने का प्रस्ताव पारित, वयोवृद्ध गुरुजी ने की अध्यक्षता
इस यादगार कार्यक्रम की अध्यक्षता वयोवृद्ध गुरुजी बिशनदयाल ने की। कार्यक्रम के दौरान सभी पूर्व छात्रों और गुरुजनों ने सर्वसम्मति से एक बेहद महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित किया, जिसके तहत भविष्य में इस ‘गुरु-वंदन’ कार्यक्रम को हर साल बोड़िया कमालपुर के स्कूल परिसर में ही आयोजित किया जाएगा, ताकि वर्तमान में पढ़ रहे छात्रों को भी इससे प्रेरणा मिल सके।
ये रहे मौजूद: इस मौके पर अजय शर्मा, सुखराम, अश्विनी कुमार, डॉ. हरिप्रकाश, सत्यवीर नाहड़िया, मुकेश सैनी, प्रहलाद सिंह, संतरा देवी, कौशल यादव और सविता देवी ने अपने विचार व शुभकामनाएं दीं। इस मौके पर पुरानी यादों को साझा करने वालों में विकास, अनु, ललिता, दिनेश, संजीव, राज बब्बर, भूपेंद्र, कुमार संदीप, संध्या, देवेंद्र, जयवीर, सुनील, दिनेश, लवकेश, महेंद्र, कीर्ति, अंजू, पूनम, हिम्मत, संगम, शशिकांत, नरेंद्र और मनीष आदि शामिल रहे।
IIT, NEET और NDA में सफल रहे गांव के होनहारों की दी जानकारी
आयोजन समिति द्वारा मंच से जानकारी दी गई कि बोड़िया कमालपुर स्कूल का रिकॉर्ड हमेशा से बेहतरीन रहा है। इस स्कूल से पढ़कर निकले एक दर्जन से ज्यादा विद्यार्थियों ने IIT, NEET, और NDA जैसी देश की सबसे कठिन प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता का परचम लहराया है। इसके अलावा देश-विदेश में विभिन्न ऊंचे पदों और क्षेत्रों में इस स्कूल के पूर्व छात्र अपनी उत्कृष्ट सेवाएं दे रहे हैं।
अंगवस्त्र और स्मृति चिह्न देकर गुरुओं को किया सम्मानित
समारोह के समापन पर आयोजन समिति की ओर से सभी आदरणीय गुरुजनों को शॉल (अंगवस्त्र), स्मृति चिह्न और विशेष उपहार भेंट कर सम्मानित किया गया और उनका आशीर्वाद लिया गया। इस पूरे कार्यक्रम का मंच पर कुशल संचालन युवा कवि हिम्मत सिंह ने अपनी कविताओं के माध्यम से किया, जबकि अंत में सभी का आभार अंग्रेजी अध्यापिका संध्या द्वारा व्यक्त किया गया।













