शनिवार, 24 अक्टूबर 2026

रेवाड़ी के भाड़ावास में किसान मेला: प्राकृतिक खेती के बताए ये 3 बड़े फायदे, किसानों की उमड़ी भीड़

Written by: सुनील चौहान

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Agriculture News: (Best24News) रेवाड़ी: गांव भाड़ावास में कृषि एवं किसान कल्याण विभाग की ओर से कृषि मेले का आयोजन किया गया। इस मौके पर मुख्य अतिथि एसडीएम बावल संजीव कुमार रहे। उन्होंने…


Agriculture News: किसान मेंले में किसानों केा बताए प्राकृतिक खेती के फायदे
Agriculture News: किसान मेंले में किसानों केा बताए प्राकृतिक खेती के फायदे
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Agriculture News: (Best24News) रेवाड़ी: गांव भाड़ावास में कृषि एवं किसान कल्याण विभाग की ओर से कृषि मेले का आयोजन किया गया। इस मौके पर मुख्य अतिथि एसडीएम बावल संजीव कुमार रहे। उन्होंने किसानों को प्राकृतिक खेती, मृदा स्वास्थ्य और आधुनिक कृषि तकनीक अपनाने की अपील की। इस मौके पर किसानों ने कई सवाल भी पूछे डॉ. प्रमोद यादव ने मृदा स्वास्थ्य, मिट्टी की जांच और पोषक तत्वों के संतुलन की जानकारी दी। कृषि खंड अधिकारी डॉ. अजित सिंह और एडीओ अंकित यादव ने विभागीय योजनाओं, फसल प्रबंधन और प्रशिक्षण कार्यक्रमों की जानकारी दी।

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प्राकृतिक खेती के लाभ

पैदावार में सुधार : प्राकृतिक खेती करने वाले किसानों ने पारंपरिक खेती करने वाले किसानों के समान उपज की सूचना दी। कई मामलों में, प्रति फसल अधिक उपज भी दर्ज की गई। प्राकृतिक खेती में किसी भी प्रकार के कृत्रिम रसायनों का उपयोग नहीं किया जाता है, इसलिए स्वास्थ्य संबंधी जोखिम और खतरे पूरी तरह से समाप्त हो जाते हैं। इस भोजन में पोषक तत्वों की मात्रा अधिक होती है और इसलिए यह बेहतर स्वास्थ्य लाभ प्रदान करता है।

पर्यावरण संरक्षण: प्राकृतिक खेती से मिट्टी की जैविकता बेहतर होती है, कृषि जैव विविधता में सुधार होता है और पानी का अधिक विवेकपूर्ण उपयोग होता है, साथ ही कार्बन और नाइट्रोजन उत्सर्जन भी काफी कम होता है।प्राकृतिक खेती का उद्देश्य लागत में कमी, जोखिम में कमी, समान पैदावार और अंतरफसल से होने वाली आय के कारण किसानों की शुद्ध आय बढ़ाकर खेती को व्यवहार्य और आकर्षक बनाना है।

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रोजगार सृजन: प्राकृतिक खेती से रोजगार उत्पन्न होता है, क्योंकि इसमें प्राकृतिक कृषि से संबंधित उद्यम, मूल्यवर्धन, स्थानीय क्षेत्रों में विपणन आदि शामिल हैं। प्राकृतिक खेती से प्राप्त अधिशेष को गांव में ही निवेश किया जाता है।विभिन्न प्रकार की फसलों के साथ काम करके, जो एक दूसरे की मदद करती हैं और वाष्पीकरण के माध्यम से अनावश्यक जल हानि को रोकने के लिए मिट्टी को ढकती हैं, प्राकृतिक खेती ‘प्रति बूंद फसल’ की मात्रा को अनुकूलित करती है।

उत्पादन लागत न्यूनतम: प्राकृतिक खेती का उद्देश्य किसानों को खेत में उपलब्ध प्राकृतिक और घरेलू संसाधनों का उपयोग करके आवश्यक जैविक इनपुट तैयार करने के लिए प्रोत्साहित करके उत्पादन लागत को काफी कम करना है। सिंथेटिक उर्वरकों, विशेष रूप से यूरिया, कीटनाशकों, शाकनाशी, खरपतवारनाशक आदि के अत्यधिक उपयोग से मिट्टी की जैविकता और मिट्टी की संरचना में परिवर्तन होता है, जिसके परिणामस्वरूप मिट्टी में कार्बनिक कार्बन और उर्वरता का नुकसान होता है मिट्टी के स्वास्थ्य को पुनर्जीवित करता है
प्राकृतिक खेती का सबसे तात्कालिक प्रभाव मिट्टी की जीव विज्ञान पर पड़ता है—सूक्ष्मजीवों और अन्य जीवित जीवों जैसे केंचुओं पर। मिट्टी का स्वास्थ्य पूरी तरह से उसमें मौजूद जीवित जीवों पर निर्भर करता है।

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पशुधन स्थिरता: कृषि प्रणाली में पशुधन का समावेश प्राकृतिक कृषि में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है और पारिस्थितिकी तंत्र को पुनर्स्थापित करने में सहायक होता है। गाय के गोबर, मूत्र और अन्य प्राकृतिक उत्पादों से जीवामृत और बीजामृत जैसे पर्यावरण अनुकूल जैविक पदार्थ तैयार किए जाते हैं।

राष्ट्रपति किसान रत्न अवार्डी एवं अरावली किसान क्लब के प्रधान यशपाल खोला ने प्राकृतिक खेती के महत्व और लाभ बताए। उन्होंने कहा कि इससे रासायनिक लागत कम करने और मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने में मदद मिलती है। उन्होंने जीवामृत, घनजीवामृत और बीजामृत जैसी तकनीकों तथा स्थानीय प्राकृतिक संसाधनों के उपयोग की जानकारी दी।
किसानों से प्राकृतिक खेती का प्रशिक्षण लेकर इसे वैज्ञानिक एवं योजनाबद्ध तरीके से अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने जिले में प्राकृतिक खेती का रकबा बढ़ाने पर जोर दिया।

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सुनील चौहान
About the Author सुनील चौहान

सुनील चौहान Best24News के संस्थापक एवं वरिष्ठ संपादक हैं। उन्हें रेवाड़ी, धारूहेड़ा और हरियाणा की स्थानीय पत्रकारिता का लगभग 10 वर्षों का अनुभव है। वे पहले दैनिक जागरण, राजस्थान पत्रिका, हरिभूमि और अमर उजाला जैसे समाचार संस्थानों से जुड़े रहे हैं। वे राजनीति, अपराध, प्रशासन, शिक्षा, रोजगार और स्थानीय जनसमस्याओं से जुड़ी खबरों के संपादन एवं प्रकाशन का कार्य करते हैं। उनका उद्देश्य पाठकों तक तथ्यात्मक, निष्पक्ष और विश्वसनीय समाचार पहुंचाना है। View all posts by सुनील चौहान →

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